नर्मदा के चौथे चरण की सौगात: इतने करोड़ की है योजना; मुख्यमंत्री बोले- सिंहस्थ 2028 में क्षिप्रा के जल से स्नान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर को जल आपूर्ति के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिली है। आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा जल प्रदाय योजना के चौथे चरण का भूमिपूजन किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 1356 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिससे शहर को 400 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) अतिरिक्त पानी मिलेगा।
सिंहस्थ 2028 को लेकर भी अहम घोषणा
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 को लेकर भी अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि करीब 60 साल बाद श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के प्राकृतिक जल से स्नान कर सकेंगे।
इंदौर के लिए ऐतिहासिक प्रोजेक्ट
दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि यह परियोजना इंदौर नगर निगम की अब तक की सबसे बड़ी जल योजना है। नर्मदा नदी, जो शहर से लगभग 70 किलोमीटर दूर है, वहां से पंपिंग के जरिए पानी लाकर शहर की जरूरतें पूरी की जाएंगी। इस योजना के पूरा होने के बाद इंदौर को मिलने वाला कुल पानी 900 एमएलडी से अधिक हो जाएगा, जो वर्ष 2029 तक उपलब्ध होने लगेगा।
2047 तक की आबादी को ध्यान में रखकर तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2047 तक इंदौर की आबादी करीब 65 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यदि मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा डेढ़ करोड़ तक हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल प्रबंधन की योजना बनाई गई है, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।
नर्मदा योजना का सफर: 1978 से अब तक
इंदौर में नर्मदा से जल आपूर्ति की शुरुआत 1978 में हुई थी।
पहला और दूसरा चरण: कुल 180 एमएलडी पानी
तीसरा चरण (2006–2010): 360 एमएलडी अतिरिक्त पानी
वर्तमान कुल आपूर्ति: 540 एमएलडी
चौथा चरण जुड़ने के बाद यह क्षमता 900 एमएलडी से अधिक हो जाएगी।
चौथे चरण में क्या होगा काम?
परियोजना के तहत शहर में जल वितरण प्रणाली को पूरी तरह मजबूत किया जाएगा। वांचू पॉइंट से राऊ सर्कल तक 39 किमी लंबी पाइपलाइन, करीब 2870 मीटर लंबी आधुनिक टनल निर्माण, 20 नए ओवरहेड टैंक (15–35 लाख लीटर क्षमता), 685 किमी वितरण पाइपलाइन, 1.26 लाख नए घरेलू कनेक्शन, 1.08 लाख से अधिक वाटर मीटर।
इसके अलावा
20 और नए टैंक और 46 पुराने टैंकों का सुदृढ़ीकरण, 892 किमी अतिरिक्त पाइपलाइन, 1.21 लाख नए कनेक्शन, कुल मिलाकर 2.47 लाख से अधिक परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
सिंहस्थ 2028: क्षिप्रा के प्राकृतिक जल से स्नान
सीएम ने कहा कि 1968 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के प्राकृतिक जल से स्नान कर सकेंगे।उन्होंने बताया कि 1980 के बाद गंभीर नदी का पानी उपयोग करना पड़ा। 2016 में नर्मदा जल से व्यवस्था की गई। अब 1000 करोड़ की योजना से बारिश का पानी संग्रहित कर क्षिप्रा में छोड़ा जाएगा। इससे सिंहस्थ 2028 में “प्राकृतिक जल” से स्नान और आचमन संभव होगा।
नेताओं ने बताया ऐतिहासिक कदम
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे ऐतिहासिक परियोजना बताते हुए कहा कि अपने 50 साल के राजनीतिक जीवन में उन्होंने पानी से जुड़ा इतना बड़ा काम नहीं देखा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यह योजना इंदौर के अगले 25 वर्षों के विकास की नींव रखेगी।
जल प्रबंधन पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने “संकल्प से समाधान” अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए बताया कि इंदौर में 1.44 लाख से अधिक आवेदनों का निराकरण किया गया। अब “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत लगभग 2.75 लाख जल संरचनाओं के संरक्षण का लक्ष्य रखा गया है।
क्यों अहम है यह योजना?
यह परियोजना सिर्फ इंदौर के लिए नहीं, बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। तेजी से बढ़ती आबादी और जल संकट के बीच यह दीर्घकालिक योजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 1356 करोड़ रुपए का यह निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
नर्मदा चौथा चरण क्या है?
यह इंदौर की सबसे बड़ी जल आपूर्ति परियोजना है, जिससे 400 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलेगा और कुल आपूर्ति 900 एमएलडी से ज्यादा हो जाएगी। करीब 2.47 लाख परिवारों को सीधे नए कनेक्शन मिलेंगे और पूरी शहर की जल व्यवस्था मजबूत होगी। करीब 60 साल बाद पहली बार श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के जल से स्नान कर सकेंगे, जो धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
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