इच्छामृत्यु के बाद युवक की अंत्येष्टि: पिता ने हाथ जोड़कर क्या कहा; अंगदान से इतने लोगों को मिलेगा नया जीवन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
दिल्ली-गाजियाबाद के हरीश राणा, जिन्हें हाल ही में इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी, का बुधवार सुबह अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के भावुक माहौल के बीच पिता ने हाथ जोड़कर लोगों से बेटे की शांति के लिए रोने से परहेज करने की अपील की। वहीं, हरीश के अंगदान से छह लोगों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रीन पार्क श्मशान घाट में अंतिम विदाई
हरीश राणा का अंतिम संस्कार ग्रीन पार्क श्मशान घाट में सुबह करीब 9:40 बजे हुआ। छोटे भाई आशीष राणा ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजनों और परिचितों की आंखें नम थीं, लेकिन पिता अशोक राणा ने सभी से संयम रखने की अपील की।
पिता की भावुक अपील
अंतिम विदाई के समय पिता ने हाथ जोड़कर कहा, “कोई रोना मत… बेटा शांति से जाए, यही प्रार्थना है। जहां भी जन्म ले, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।”
13 साल से कोमा में थे हरीश
31 वर्षीय हरीश ने 24 मार्च को एम्स दिल्ली में अंतिम सांस ली। वे पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे। 2013 में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित हो गए थे।
इच्छामृत्यु की अनुमति और प्रक्रिया
हरीश को सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी थी। इसके तहत 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई थी, जिसके बाद 24 मार्च को उनका निधन हो गया।
अंगदान से मिलेगी नई उम्मीद
डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के फेफड़े, दोनों किडनी और कॉर्निया दान किए गए हैं, जिससे छह जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिलने की संभावना है। हरीश राणा की कहानी जहां एक ओर लंबे संघर्ष और पीड़ा को दर्शाती है, वहीं अंगदान के माध्यम से कई जिंदगियों में नई उम्मीद भी जगाती है।
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