23 लाख की नकदी से हुआ भगोड़े सनपाल गैंग का खुलासा: पूछताछ में आईडी से सट्टा खिलाने का दावा; आयकर विभाग ने भी मांगा था रकम का हिसाब
KHULASA FIRST
संवाददाता

आईपीएल सट्टे का पैसा, सतीश की आईडी और नेटवर्क
चालान में तीन आरोपी, विदेश में बैठे होने के चलते कार्रवाई अटकी
स्कूटी की डिक्की से 13.02 लाख और पिता के थैले से 10 लाख मिले थे
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आईपीएल सट्टे की 23 लाख 2 हजार 990 रुपए की नकदी ने सतीश सनपाल से जुड़े नेटवर्क की ऐसी कड़ी सामने ला दी, जो अब सिर्फ सट्टे की एफआईआर तक सीमित नहीं है। 23 मई 2022 को जबलपुर के ओमती थाना क्षेत्र में पुलिस ने संजय खत्री और उसके पिता मुरलीधर खत्री को पकड़ा था।
संजय की स्कूटी की डिक्की से 13 लाख 2 हजार 990 रुपए और मुरलीधर के हाथ में मौजूद थैले से 10 लाख रुपए बरामद हुए। मोबाइल भी जब्त किए गए। पुलिस जांच में इस रकम को आईपीएल सट्टे से जुड़ा बताया गया और पूछताछ के दौरान सनपाल नेटवर्क की कड़ी सामने आने का दावा किया गया।
सबसे अहम बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में संजय खत्री, मुरलीधर खत्री और दिलीप खत्री के खिलाफ चालान पेश कर दिया, लेकिन सतीश सनपाल को आरोपपत्र में आरोपी नहीं बनाया।
पुलिस दस्तावेज में उसे संदिग्ध बताते हुए कहा गया कि घटना के बाद से वह लगातार देश से बाहर है और उसके स्थायी पते पर तलाश-पतासाजी के प्रयास किए गए। यानी नाम जांच में आया, नेटवर्क की कड़ी सामने आई, लेकिन कार्रवाई की अंतिम रेखा सनपाल तक नहीं पहुंच सकी।
चालान में दर्ज पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिले मेमोरंडम में दिलीप खत्री द्वारा सतीश सनपाल के साथ मिलकर और उसकी आईडी लेकर आईपीएल सट्टा खिलाने की बात सामने आई थी।
इसी आधार पर पुलिस ने मध्यप्रदेश जुआ अधिनियम की धारा 4-ए और तत्कालीन आईपीसी की धारा 120-बी के तहत कार्रवाई की।पुलिस ने तीन आरोपियों को आरोपपत्र में शामिल किया, जबकि सनपाल को लेकर दस्तावेज में विदेश में होने और उसकी गिरफ्तारी नहीं होने का उल्लेख किया गया।
23 लाख पर आयकर विभाग की भी नजर
बरामद नकदी की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। 31 अगस्त 2022 को आयकर विभाग के उप निदेशक (जांच), कटनी ने ओमती थाना प्रभारी को पत्र भेजा। पत्र में 23 लाख 2 हजार 990 रुपए की जब्ती का हवाला देते हुए रकम को लेकर आयकर जांच चलने की जानकारी दी गई थी।
आयकर विभाग ने पुलिस से प्रकरण की जांच और स्थिति रिपोर्ट मांगी थी तथा आगे के निर्देश तक जब्त रकम रिलीज नहीं करने का अनुरोध किया था यानी एक तरफ पुलिस सट्टे के मामले में चालान तैयार कर रही थी, दूसरी तरफ इतनी बड़ी नकदी का स्रोत और उसका हिसाब आयकर जांच के दायरे में पहुंच चुका था।
दुबई से रिमोट, जबलपुर में नेटवर्क!
जांच से जुड़े दावों में सामने आया कि सनपाल के विदेश जाने के बाद जबलपुर में उसके बुआ के बेटे गुरुमुख आहूजा की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट के दौरान कथित सट्टा नेटवर्क के सक्रिय होने और डिजिटल माध्यमों से लोगों को जोड़ने के दावे भी जांच में सामने आते रहे हैं।
यदि इन दावों की पुष्टि होती है तो जांच का दायरा सिर्फ सट्टा खिलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। फिर सवाल उठेगा कि कथित सट्टे से आने वाला पैसा कौन संभालता था, किसके खातों में जाता था, किसके नाम पर संपत्ति बनती थी और क्या पैसा विदेश तक पहुंचता था?
तीन थानों की कार्रवाई के बाद भी क्यों नहीं टूटी कड़ी?
सनपाल से जुड़े नेटवर्क को लेकर जबलपुर के कोतवाली, मदन महल और गोरखपुर थाना क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर पुलिस कार्रवाई सामने आई। गिरफ्तारी हुई, प्रकरण दर्ज हुए और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन इसके बावजूद नेटवर्क की स्थानीय कड़ियों को लेकर सवाल बने रहे।
अब 23 लाख की बरामदगी और चालान में सामने आए तथ्यों ने एक नया सवाल खड़ा किया है, क्या पुलिस की जांच सट्टा खिलाने वालों तक पहुंचकर रुक गई, या उस पैसे की पूरी यात्रा भी खंगाली गई?
अब सवाल सिर्फ सट्टे का नहीं, पैसे का है
23 लाख की नकदी, मोबाइल, कथित सनपाल आईडी, जबलपुर का स्थानीय नेटवर्क, आयकर विभाग की जांच, विदेश में मौजूद सनपाल और बाद में सामने आई शहपुरा की जमीन इन सभी कड़ियों को जोड़ने पर मामला आर्थिक जांच की दिशा में जाता है।कथित सट्टे की कमाई कहां गई?
किसके खातों में पहुंची?
किसके नाम संपत्तियां बनीं?
जमीन में कितना पैसा लगा?
विदेश से पैसा आया या भारत से बाहर गया?
और क्या इन तमाम लेनदेन की पूरी मनी ट्रेल कभी खंगाली गई? यही वह बिंदु है जहां पुलिस की एफआईआर और चालान के आगे आर्थिक जांच का सवाल खड़ा होता है। सनपाल के खिलाफ एलओसी के बावजूद उसकी संपत्ति से जुड़ी प्रक्रिया सामने आना और उससे पहले सट्टे के मामले में लाखों की नकदी बरामद होना, दोनों घटनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय इनके बीच की आर्थिक कड़ी तलाशना जांच का अगला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
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