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2.52 करोड़ की ठगी का खुलासा: 3 और आरोपी गिरफ्तार; अब तक 7 को पकड़ा

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 अप्रैल 2026, 12:48 pm
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2.52 करोड़ की ठगी का खुलासा

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
साइबर क्राइम पुलिस ने 2.52 करोड़ रुपए की डिजिटल ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली से तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस केस में अब तक कुल 7 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। सभी को ग्वालियर लाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा और रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।

CBI अधिकारी बनकर की ठगी
आरोपियों ने एयरफोर्स से रिटायर्ड 90 वर्षीय रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण महादेव को निशाना बनाया था। व्हाट्सऐप कॉल पर खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें “ऑनलाइन अरेस्ट” का डर दिखाया गया।

इसके बाद 27 दिनों तक वीडियो कॉल पर निगरानी में रखकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में 2.52 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए।

15 राज्यों के 300 खातों में घुमाई रकम
क्राइम ब्रांच जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम पहले 5 खातों में भेजी गई, फिर उसे देश के 15 राज्यों के 300 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इनमें दिल्ली, यूपी, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, असम और कर्नाटक सहित कई राज्य शामिल हैं।

इस दौरान आंध्र प्रदेश के 2 खातों में करीब 1.5 करोड़ रुपए। दिल्ली-यूपी के 3 खातों में करीब 1 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए।

दिल्ली से 3 आरोपी गिरफ्तार
तकनीकी जांच के आधार पर दिल्ली पहुंची टीम ने जिन तीन आरोपियों को पकड़ा, वे फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने इनके पास से 6 पासबुक और चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

आरोपियों की भूमिका
हरीश गढ़वाल (27)-छिंदवाड़ा का निवासी, दिल्ली में रहकर फर्जी खाते खुलवाता और ऑपरेट करता था। सौरव यादव (23)-इसके खाते में 28 लाख रुपए ट्रांसफर हुए। शरद डेहरिया (20)-जॉइंट अकाउंट ऑपरेट कर रहा था। पूरे नेटवर्क का संचालन टेलीग्राम ऐप के जरिए किया जा रहा था।

फर्जी फर्म के जरिए ट्रांजेक्शन
जांच में दिल्ली की एक फर्म “जिंग्गा क्रंच एंड स्नैक्स” का करंट अकाउंट भी सामने आया, जिसमें बड़ी रकम जमा हुई थी। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह फर्म गिरोह के कहने पर खोली गई थी और बैंक वेरिफिकेशन के बाद बंद कर दी गई। इसके बदले संबंधित लोगों को करीब 2.5 लाख रुपए कमीशन मिला।

पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है, खासकर उन लोगों की तलाश की जा रही है जो “म्यूल अकाउंट” उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने में मदद करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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