कलेक्ट्रेट में फर्जीवाड़ा: बाबू और दलाल की मिलीभगत से जारी हुए नकली आदेश; बेची जमीन, 4 गिरफ्तार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देवास।
कलेक्ट्रेट कार्यालय से फर्जी आदेश जारी होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले में सरकारी कर्मचारियों और एक दलाल की मिलीभगत का खुलासा हुआ है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
शिकायत के बाद हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, कलेक्टर ऋतुराज सिंह को करीब 10 दिन पहले इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली थी। दस्तावेज संदिग्ध लगने पर उन्होंने तत्काल BNP थाना पुलिस को शिकायत दी। जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी, कूट रचना और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।
आरोपियों की पहचान
पुलिस ने नजूल शाखा के बाबू रमेश लोबानिया, अपर कलेक्टर कार्यालय के बाबू संजय जाटव, विजयागंज मंडी तहसील के बाबू जितेंद्र भद्रे और एक दलाल कुशवाहा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीनों की अवैध बिक्री का प्रयास किया।
फर्जी दस्तावेजों से जमीन बेचने की साजिश
शहर सीएसपी सुमित अग्रवाल के मुताबिक, आरोपियों ने सरकारी पदों का दुरुपयोग करते हुए कलेक्ट्रेट के नाम पर फर्जी आदेश जारी किए। इन दस्तावेजों के जरिए छोटे और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीन हड़पने की साजिश रची गई। एक मामले में तो फर्जी तरीके से रजिस्ट्री तक करा दी गई, जिसे बाद में निरस्त कराया गया।
दलाल की भूमिका से मामला और गंभीर
जांच में सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में एक दलाल की अहम भूमिका रही, जिसने सरकारी दस्तावेजों को वैध दिखाने में मदद की। यह सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से किया गया बड़ा घोटाला माना जा रहा है।
प्रशासनिक तंत्र पर उठे सवाल
इस घटना ने कलेक्ट्रेट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों में भी नाराजगी है कि यदि सरकारी कार्यालयों से ही फर्जी आदेश जारी होने लगें, तो व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहेगा।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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