चार लोगों ने मिलकर रची थी डेली कॉलेज को टारगेट करने की डिजिटल साजिश: अहेड एजेंसी संचालिका के बयान से मची सनसनी
KHULASA FIRST
संवाददाता

मीटिंग, मैसेज और मैन्युफैक्चर्ड कंटेंट से कॉलेज को निशाना बनाने का ब्लूप्रिंट आया सामने
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में चर्चा का केंद्र बना ‘वॉइस ऑफ डीसी’ मामला सोशल मीडिया विवाद नहीं रहते हुए एक सुनियोजित डिजिटल साजिश के रूप में सामने आ रहा है। पिछले महीने मामले में चार आरोपियों पर केस दर्ज करने वाली क्राइम ब्रांच ने कल अहेड एजेंसी संचालिका के बयान लिए तो इसका खुलासा हुआ। बयान के बाद न केवल पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया, बल्कि कुछ लोगों द्वारा पर्दे के पीछे रहकर डेली कॉलेज को बदनाम करने की साजिश का भी खुलासा हुआ है।
यानी सामने आए सबूतों के आधार पर मीटिंग, मैसेज और मैन्युफैक्चर्ड कंटेंट से कॉलेज को निशाना बनाने का ब्लूप्रिंट सामने आ गया। अहेड एजेंसी संचालिका ने सबूत उपलब्ध कराते हुए खुद को पूरे मामले में पाक-साफ बताया है।
कल डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल (अहेड एजेंसी संचालिका) अलीशा सैनी क्राइम ब्रांच में अपने बयान दर्ज कराने पहुंची थीं। शपथ-पत्र में कहा कि 2025 में संदीप पारेख ने उनसे संपर्क कर ‘वॉइस ऑफ डीसी’ नामक इंस्टाग्राम अकाउंट के लिए कंटेंट तैयार करने को कहा था।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह कि जिस अकाउंट को लेकर इतना बवाल मचा, वह न तो उनका बनाया हुआ था और न ही उनके नियंत्रण में था। वह सिर्फ निर्देशों के मुताबिक कंटेंट तैयार कर रही थीं, जबकि पूरा खेल कोई और संचालित कर रहा था।
पारेख के घर हुई मीटिंग अब जांच का अहम हिस्सा
जानकारी के अनुसार क्राइम ब्रांच की जांच में 4 नवंबर 2025 को संदीप पारेख के घर पर हुई एक मीटिंग अब जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है। इस बैठक में रंजीतसिंह नामली, अनुराग जैन और मानवीर बायस भी मौजूद थे। यहीं कथित तौर पर कॉलेज के खिलाफ सोशल मीडिया अभियान की रणनीति बनाई गई।
एक ऐसा अभियान, जिसमें शब्द, तस्वीरें और वीडियो सब कुछ पहले से तय स्क्रिप्ट के तहत तैयार किया जा रहा था। इसके बाद एक वाट्सएप ग्रुप बना, जो इस पूरे ऑपरेशन का ‘कमांड सेंटर’ बन गया। यहीं से स्क्रिप्ट, ऑडियो, कैप्शन और पोस्टिंग के निर्देश साझा होते थे।
अलीशा के मुताबिक उनका काम केवल कंटेंट बनाना था। फाइनल पोस्ट करना और उसे फैलाना बाकी लोगों की जिम्मेदारी थी। उन्होंने पूरे मामले से जुड़े डिजिटल और प्रिंटेड सबूत पुलिस को उपलब्ध कराए, जिनमें वाट्सएप चैट्स, स्क्रीनशॉट्स, स्क्रीन रिकॉर्डिंग, ऑडियो-वीडियो क्लिप और पेमेंट से जुड़े प्रमाण शामिल हैं।
8 से 9 वीडियो का कंटेंट हमने कराया डिजाइन
अलीशा का कहना है लगभग 100 वीडियो हैं, लेकिन 8 से 9 वीडियो का कंटेंट ही हमने डिजाइन किया था। दिसंबर में जब ग्रुप को लेकर शिकायत हुई, तब हमारी जानकारी में पूरा मामला आया और हमने कैंपेन व पेज के लिए काम करने से इनकार करते हुए दिसंबर से इस कैंपेन से दूरी बना ली।
अब हम पूरी जानकारी कॉलेज प्रबंधन व संबंधित अधिकारियों को सौंपते हुए जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। वहीं क्राइम ब्रांच एडीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
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