धधकती घास और सुलगता भ्रष्टाचार: एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय चकाचौंध के बीच सुरक्षा का तमाशा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यह देवी अहिल्या की नगरी का गौरवशाली एयरपोर्ट है या लापरवाही का कोई लावारिस अड्डा? जिस ‘अंतरराष्ट्रीय’ टैग को हम माथे पर सजाकर गर्व करते हैं, उसकी हकीकत होली के दिन बुधवार को रनवे के पास धधकती लपटों ने पूरी दुनिया के सामने लाकर रख दी। कांच की चमचमाती दीवारों के पीछे भ्रष्टाचार और घोर अव्यवस्था का जो खेल चल रहा है वह अब किसी बड़े हादसे को खुली दावत दे रहा है।
जब सूखी घास और सूखे पेड़ों ने आग पकड़ी तो केवल धुआं नहीं उठा, बल्कि एयरपोर्ट प्रबंधन के उन दावों की अर्थी भी उठी जिनमें सुरक्षा को सर्वोपरि बताया जाता है। हैरत की बात है कि हर साल घास कटाई और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपयों के टेंडर छोड़े जाते हैं, फिर भी एयरपोर्ट परिसर के भीतर सूखी घास का अंबार और सूखे पेड़-पौधे क्यों रखे गए थे?
उस खौफनाक मंजर ने, जिसने आसपास की कॉलोनियों के रहवासियों की नींद उड़ा दी, यह बताने के लिए काफी है कि मोटी तनख्वाहें डकारने वाला अमला केवल फाइलों में घोड़े दौड़ा रहा है।
परिसर में आवारा पशुओं का डेरा: रनवे पर जब सियार और लोमड़ियां अपनी मर्जी से विचरते हैं और परिसर में आवारा पशुओं का डेरा रहता है, तब समझ आता है कि वर्ल्ड क्लास का तमगा केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए है। पार्किंग के नाम पर चल रही अवैध वसूली ने इस संस्थान की साख को पहले ही दागदार कर दिया है।
विडंबना देखिए, जो प्रबंधन कभी आम आदमी के मकान की ऊंचाई पर इंच-इंच का हिसाब लेकर अड़ंगे लगाता था, वही आज दलालों के साथ फनल क्षेत्र में ऊंचे टावरों और आलीशान होटलों को एनओसी की रेवड़ियां बांट रहा है। क्या यह भ्रष्टाचार का खुला खेल नहीं है?
जब परिंदों की वजह से उड़ानों पर खतरा मंडराता है और आग बुझाने में घंटों की देरी होती है तो जवाबदेह अफसर चुप्पी साध लेते हैं। लाखों का बजट आखिर किसकी जेब में जा रहा है और क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही गहरी नींद से जागेगा?
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