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एक हजार करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा: विकास योजनाएं पड़ी हैं ठप; प्राधिकरण की ऐसी हालत क्यों

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 मार्च 2026, 4:29 pm
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एक हजार करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के पास लगभग 1000 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा है, जिससे हर साल 60 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज प्राप्त होता है। इसके बावजूद प्राधिकरण के कई बड़े विकास प्रोजेक्ट सितंबर 2025 से ठप पड़े हुए हैं और आगामी बजट 1500 करोड़ रुपये से कम रहने की संभावना जताई जा रही है।

नगर निगम से भी आगे
IDA की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत है कि यह इंदौर नगर निगम से भी आगे है, लेकिन वित्तीय ताकत के बावजूद कामकाज धीमा है और नई योजनाएं फाइलों में ही बंद हैं।

राजनीतिक नियुक्तियां नहीं
मोहन सरकार के गठन के बाद इंदौर विकास प्राधिकरण में राजनीतिक नियुक्तियां समाप्त कर दी गईं और प्राधिकरण का संचालन अब संभागायुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े और सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े की संयुक्त जिम्मेदारी में है। दोनों अधिकारी मिलकर प्राधिकरण के दैनिक संचालन और निर्णय प्रक्रिया को संभाल रहे हैं, लेकिन बड़े प्रोजेक्टों के कार्यान्वयन में अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

1150 करोड़ रुपये की लागत वाला स्टार्टअप पार्क
सबसे बड़े प्रोजेक्टों में 1150 करोड़ रुपये की लागत वाला स्टार्टअप पार्क शामिल है, जो केवल फाइलों में ही बंद है और इसे पीपीपी मोड या अन्य किसी तरीके से बनाना है, इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।

कन्वेंशन सेंटर के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी
545 करोड़ रुपये के कन्वेंशन सेंटर के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन आगे की कार्यवाही अभी साफ नहीं है। ISBT बस टर्मिनल भी लगभग एक साल पुराना हो गया है, लेकिन इसे चलाने वाली एजेंसी तय न होने के कारण निर्माण धीरे-धीरे खराब होने लगा है।

कई फ्लाईओवर और ब्रिज परियोजनाएं भी अधूरी
स्नेहधाम, जिसे बुजुर्गों के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था, बिना लिखित करार के एक कंपनी को सौंपा गया था। कंपनी ने बुजुर्गों को हटाने का नोटिस भी दिया, लेकिन बाद में राहत मिली। यह प्रोजेक्ट अभी भी अधर में है। शहर में कई फ्लाईओवर और ब्रिज परियोजनाएं भी अधूरी हैं। बड़ा गणपति और मरीमाता चौराहे पर वर्क ऑर्डर जारी हैं, लेकिन काम अभी शुरू नहीं हुआ।

सिंहस्थ के कई प्रोजेक्ट भी अधूरे
उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारी के लिए एमआर 12 (Master Road 12) और एमआर 10 ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी अधूरे हैं और इन पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

पुरानी घोषणाएं भी फाइलों में ही
इसके अलावा रिवर साइड कॉरिडोर, मोरोद में अनाज मंडी की शिफ्टिंग और स्कीम 97 में सिटी फॉरेस्ट की पुरानी घोषणाएं भी फाइलों में ही पड़ी हैं। स्कीम 171 पुष्पविहार और 13 अन्य संस्थाओं के चार हजार से अधिक प्लॉट धारक भी अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन का इंतजार कर रहे हैं।

इस कारण हो रही देरी
विशेषज्ञों का कहना है कि प्राधिकरण के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं, लेकिन प्रशासनिक निर्णय और योजना क्रियान्वयन में देरी के कारण शहर के बड़े विकास प्रोजेक्ट ठप पड़े हैं। 31 मार्च को आने वाले बजट के बाद ही स्पष्ट होगा कि अगले साल इंदौर में विकास की गति कितनी तेज होगी और लंबित योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

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