सरकार पर हावी ठेकेदार कंपनी को रास्ते पर ले आए किसान: विधानसभा में बता दिया 98% काम पूरा; असल में आधा भी नहीं हुआ
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जब प्रदेश अजब गजब होगा तो सरकारी तंत्र भी और ज्यादा अजब गजब ही होगा। जल संसाधन मंत्रालय से संबंधित 810 करोड़ रुपए के एक आधे-अधूरे ठेके में (बताया जाता है कि हैदराबाद की सत्ता में रसूख रखने वाली) कंपनी के दबाव में बिंजलवाड़ा सिंचाई परियोजना का कार्य 98% पूरा होना सरकार द्वारा बता दिया गया।
ठेकेदार कंपनी जीबीपीआर हैदराबाद के काम की जानकारी विधानसभा में दी गई। कंपनी द्वारा कार्य पूर्ण करने की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया है कि मुख्यमंत्री को जानकारी प्रस्तुत की थी। यह बताते हुए भारतीय किसान संघ के संभागीय युवा संयोजक श्याम सिंह पवार और जिला अध्यक्ष सदाशिव पाटीदार ने बताया कि कंपनी द्वारा सरकार को भी अंधेरे में रखा गया या फिर हो सकता है सरकार कंपनी के साथ खड़ी रही है।
जबकि वास्तविक स्थिति यह थी कि इस सिंचाई परियोजना का लगभग आधा काम ही हुआ था और काम पूरा करवाने के लिए किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। किसानों का कहना है कि दक्षिण भारत के नायडूओं से रिश्ता रखने वाली यह कंपनी शिवराज सरकार के कार्यकाल में आई थी, उस समय दक्षिण भारत की ठेकेदार कंपनियां मध्य प्रदेश में बड़े-बड़े ठेके ले रही थी।
जैसे कि इस समय गुजरात की कंपनियां प्रदेश में छाई हुई है। पवार कहते हैं कि इसलिए ठेकेदार कंपनियां मनमानी कर रही हैं और काम भी पूरा नहीं करतीं, साथ में गुणवत्ता भी नहीं होती। सिंचाई परियोजना खरगोन जिले के भीकनगांव क्षेत्र में है।
कंपनी और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से काम पूरा करने के लिए किसान गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी, तब जाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठना पड़ा और भारतीय किसान संघ के माध्यम से सरकार को किसानों ने नींद से जगाया।
तब जाकर कल कलेक्टर ने बैठक बुलाई और अधूरे काम को पूरा करने का आदेश देते हुए कार्य योजना बनाई गई। बीते 10 दिनों से भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसान धरने पर बैठे हुए थे, लेकिन उनकी कोई बात कलेक्टर से आगे कोई नहीं सुन रहा था।
कंपनी के आगे विभाग अधिकारी और उच्च अधिकारी नतमस्तक नजर आए। फिर किसान सड़कों पर उतरे और उन्होंने अपनी भाषा में भोपाल तक जल संसाधन विभाग के प्रमुख अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दे दी कि काम शुरू नहीं हुआ तो उग्र किसान आंदोलन होगा।
ऐसा करने के साथ सिंचाई परियोजना के काम की जमीनी सच्चाई प्रमाण के साथ किसानों ने रखी, तब जाकर अपर मुख्य सचिव जो जल संसाधन विभाग के मुखिया भी हैं, उन्होंने कंपनी की खबर ली।
कंपनी के दबाव, प्रभाव के बावजूद भोपाल में बैठे नेता मंत्री और उच्च अधिकारियों को कहना पड़ा कि किसानों का आंदोलन हो रहा है, इसलिए समय सीमा में कंपनी को काम पूरा करके देना होगा।
किसान नेता पवार ने बताया कि कल कलेक्टर भव्या मित्तल ने कंपनी के कर्ताधर्ताओं और जल संसाधन विभाग के अफसर को किसानों के आमने-सामने बैठाया और जब किसानों ने ठेकेदार कंपनी के घोटाले को सामने रखा तो अफसर और कंपनी के पास कोई जवाब नहीं था।
टेंडर के अनुसार कंपनी को क्या-क्या काम करने थे, जो उसने नहीं किया, यह भी किसानों ने बताया, तब जाकर कलेक्टर के आश्वासन पर किसानों ने धरना आंदोलन स्थगित किया।
धरना स्थगित किया है, समाप्त नहीं
भीकनगांव जिला खरगोन के किसानों का कहना है कि बीते 15 वर्षों से प्रदेश में बड़े-बड़े ठेके टेंडर की धूम है। ऐसा ही एक टेंडर ठेका 2017 में हुआ था, जो दक्षिण भारत की कंपनी को मिला था। बिंजलवाड़ा सिंचाई परियोजना का यह ठेका घोटाले का ठेका प्रतीत हुआ।
जिला प्रशासन की मध्यस्थता में कलेक्टर भव्या मित्तल ने एनवीडीए विभाग के ईई एमके सिंह, सीसीएल आरख और जीवीपीआर कंपनी के जीएम फिलीफोस एवं पीएम रघुकुर्मिला तथा किसान प्रतिनिधियों के साथ कल बैठक की। इसमें तय हुआ,20 दिनों में कार्य में तेजी लाई जाएगी, जिससे किसानों को पानी मिल सके।
यहां सभी परियोजनाओं की समीक्षा भी की।किसानों ने सख्त लहजे में कहा कि यह धरना स्थगित किया है, समाप्त नहीं। अगर योजना अनुसार कार्य में गति नहीं दिखती तो आगे पुनः आंदोलन किया जाएगा। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश पाटीदार, प्रांत अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पटेल, संगठन मंत्री दिनेश शर्मा, दयाराम पाटीदार, प्रांत युवा वाहिनी संयोजक श्याम सिंह पवार, जिला अध्यक्ष सदाशिव पाटीदार आदि शामिल हुए।
इन मुद्दों पर चर्चा
चना-गेहूं खरीदी: स्लॉट बुक नहीं होना, सत्यापन के लिए सर्वर बिजी बताना, बुक स्लॉट वाले किसानों को भी असत्यापित बताना।
खाद की समस्या: ई-टोकन के माध्यम से किसानों को बहुत कम खाद मिल रहा है।
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