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चर्चित बम विस्फोट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल पर लगाई रोक; इतने आरोपियों को राहत

KHULASA FIRST

संवाददाता

23 अप्रैल 2026, 11:41 am
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चर्चित बम विस्फोट मामला

खुलासा फर्स्ट, मुंबई।
2006 के बहुचर्चित मालेगांव बम विस्फोट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट में चल रही ट्रायल प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इस निर्णय से महू निवासी लोकेश शर्मा, देपालपुर के राजेंद्र चौधरी के साथ धनसिंह और मनोहर नरवरिया को बड़ी राहत मिली है।

आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी
मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और दिवंगत सुनील जोशी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जांच का मुख्य आधार स्वामी असीमानंद का 2010 में दिया गया बयान था, जिसमें उन्होंने ‘छह युवकों’ की संलिप्तता का जिक्र किया था। हालांकि बाद में असीमानंद ने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि वह दबाव में दिलवाया गया था।

मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कौशिक म्हात्रे ने दलील दी कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और एक ऐसे बयान के आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते, जिसे पहले ही वापस लिया जा चुका है। अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए ट्रायल पर रोक लगाने का आदेश दिया।

2013 में गिरफ्तारी, वर्षों तक जेल में रहे आरोपी
लोकेश शर्मा और राजेंद्र चौधरी को वर्ष 2013 में गिरफ्तार किया गया था और वे करीब छह वर्षों तक जेल में रहे। साल 2019 में जमानत देते समय हाईकोर्ट ने भी यह टिप्पणी की थी कि बिना ट्रायल के इतने लंबे समय तक हिरासत में रखना न्यायसंगत नहीं है।

क्या था 2006 मालेगांव ब्लास्ट मामला?
8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में सिलसिलेवार चार बम धमाके हुए थे। ये विस्फोट अत्यंत संवेदनशील स्थानों- हमीदिया मस्जिद और बड़े कब्रिस्तान परिसर में शुक्रवार की नमाज के तुरंत बाद हुए, जबकि चौथा धमाका मुशावरत चौक पर हुआ था।

31 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 300 से अधिक लोग घायल
इस भयावह घटना में 31 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस समय इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और जांच एजेंसियों पर दोषियों को पकड़ने का भारी दबाव था। प्रारंभिक जांच में एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने 9 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें वर्ष 2016 में साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। इसके बाद जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और फिर NIA को सौंप दी गई।

2025 में तय हुए आरोप, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
सितंबर 2025 में विशेष अदालत ने चारों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने ट्रायल पर रोक लगा दी।NIA की जांच के अनुसार, धमाकों के पीछे दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों की संलिप्तता बताई गई थी, जिसके आधार पर लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी, धनसिंह और मनोहर नरवरिया को आरोपी बनाया गया था।

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