फर्जी डॉ. सज्जन सिंह ले रहा लकवा मरीजों की जान: स्वास्थ्य विभाग में सेटिंग का दावा कर दूरदराज के गांव में करता है मरीजों का इलाज
KHULASA FIRST
संवाददाता

पुनीत विजयवर्गीय 99770-00405, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर और ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों फर्जी डॉक्टर इलाज के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन सज्जनसिंह पंवार नामक एक फर्जी डॉक्टर ऐसा भी है, जो सिर्फ लकवाग्रस्त मरीजों का इलाज कर उन्हें धीरे-धीरे मौत के आगोश में भेज रहा है।
उससे इलाज कराने दूर-दूराज क्षेत्र सहित बाहरी राज्य से भी मरीज आते हैं, जिन्हें तथाकथित डॉक्टर इंजेक्शन लगाकर हजारों रुपए की दवाइयां अपने पास से देता है। बताया जाता है उसके इंजेक्शन से मरीजों को तत्काल राहत तो मिल रही है, लेकिन आरोप है कि उसकी दवाओं के दुष्प्रभाव के चलते कई मरीजों की 6 महीने से सालभर में मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक और पुनः लकवा आना रहा।
पांच हजार रुपए तक वसूली... हैरानी की बात यह कि लकवाग्रस्त मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. सज्जनसिंह पंवार के पास कोई मेडिकल की डिग्री नहीं, फिर भी वह लकवाग्रस्त मरीजों का इलाज कर उन्हें पूरी तरह ठीक करने का दावा करता है।
महू से आगे जामगेट जाने वाले रास्ते पर करीब 5 किलोमीटर अंदर स्थित बसीपीपरी गांव में इसने अपना डेरा जमा रखा है, जहां हर दिन लगभग 200 लकवा मरीज उससे इलाज कराने पहुंचते हैं। इनसे दवा के नाम पर ढाई से पांच हजार रुपए तक वसूले जाते हैं। मरीज को इंजेक्शन का एक पैकेट और कुछ दवाएं देने वाले तथाकथित डॉ. पंवार का दावा है कि उसके इंजेक्शन ही मरीज को ठीक कर देते हैं।
ये है सिस्टम... सज्जनसिंह पंवार द्वारा इलाज कराने आने वाले मरीजों को मैदान में बैठा दिया जाता है। उसका एक अनपढ़ कर्मचारी मरीजों का नाम एक रजिस्टर में लिखकर उन्हें नंबर देता है।
जिस स्थान पर मरीजों को बैठाया जाता है, उससे कुछ दूरी पर उसका ‘संजीवनी क्लिनिक’ है, जिसके बाहर बैठकर यह फर्जी डॉक्टर मरीजों की रिपोर्ट देखने के बाद उन्हें अंदर कमरे में भेजकर अपने अन्य सहायक से इंजेक्शन लगवाता है। पर्चे पर दवाएं लिखकर अपने ही मेडिकल स्टोर से मरीजों को महीनेभर की दवाएं देकर रवाना कर देता है।
कानूनी कार्रवाई की जा सकती है... फर्जी डॉक्टर सज्जन सिंह द्वारा भले ही खुद को बचाने के उद्देश्य से पर्चा कोर्ट में मान्य नहीं है लिख दिया गया हो, लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि इस तरह की बात लिखने का कोई महत्व नहीं।
कोई भी मरीज डॉक्टर के खिलाफ कोर्ट में केस कर सकता है और यदि चाहे तो पुलिस को भी शिकायत कर सकता है। शिकायत के आधार पर कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा।
मरीजों को इसलिए लगता है ठीक हो रहे... जब इस तथाकथित डॉ. सज्जनसिंह पंवार के पर्चे और उसकी दी हुई दवाओं के बारे में खुलासा फर्स्ट की टीम ने एमवाय अस्पताल की न्यूरोलॉजिस्ट एवं एमजीएम मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. अर्चना वर्मा से जानकारी हासिल की तो बड़ी चौंकाने वाली बातों का खुलासा हुआ।
डॉ. वर्मा के मुताबिक लकवा का मरीज अत्यधिक कमजोर होता है, ऐसे में उसे विटामिन के इंजेक्शन और विटामिन बी-12 की टेबलेट दी जा रही है। विटामिन का इंजेक्शन लगते ही मरीज को तुरंत पॉवर मिलती है, जिसके चलते उसे लगता है कि वह ठीक हो रहा है, लेकिन यह ज्यादा समय तक कारगर नहीं रहता।
लकवा के मरीज के इलाज में उसे ठीक करने के साथ ही इस बात का भी ख्याल रखना होता है कि उसे दोबारा लकवा न हो, लेकिन जिस तरह से लकवा मरीजों का इलाज किया जा रहा है, उससे भविष्य में उन्हें पुनः लकवा होने या हार्ट अटैक होने का खतरा बना हुआ है। इस इलाज के बाद मरीजों का जीवन बहुत लंबा नहीं बचता।
भाजपा नेता ने खोई अपनी काकी... भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं वार्ड 74 के पार्षद पति सुनील हार्डिया की काकी को लकवा हुआ था, जिसके बाद किसी परिचित ने उन्हें उक्त डॉ. सज्जनसिंह पंवार के पास ले जाने की सलाह दी थी।
परिजन उन्हें सज्जन सिंह के पास ले गए थे, जहां उसने अपने अंदाज में उनका इलाज किया। इसके करीब 6 महीने बाद उनका हार्ट अटैक से निधन हो गया। पार्षद पति हार्डिया ने आरोप लगाया कि फर्जी डॉक्टर सज्जन सिंह के इलाज की वजह से ही उनकी काकी मां का निधन हुआ। यदि किसी न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर से इलाज कराते तो शायद काकी ठीक होकर आज हमारे बीच होतीं।
‘पर्चा कोर्ट में मान्य नहीं’
फर्जी डॉक्टर सज्जन सिंह को खुद पता है कि उसकी दवाएं मरीजों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसीलिए उसने अपने पर्चे पर नीचे लिख रखा है कि ‘यह दवाई पर्चा कोर्ट में मान्य नहीं होगा।’
ताकि कोई मरीज इसे कानूनी तौर पर चुनौती नहीं दे सके, जबकि आमतौर पर किसी भी वास्तविक डॉक्टर के पर्चे पर इस तरह की हिदायत नहीं लिखी रहती। मरीजों पर होने वाले साइड इफेक्ट्स के बाद भड़के परिजन हमला न कर दें, इस आशंका के चलते उसने अपने क्लिनिक और आसपास गुंडे जैसे लोगों की भीड़ भी जमा कर रखी है।
आपको नहीं दूंगा जानकारी
इस बारे में खुलासा फर्स्ट की टीम ने सज्जनसिंह पंवार से बात कर बताया कि बिना किसी डिग्री के आप मरीजों का इलाज कर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस पर उसने बड़ी अकड़ के साथ जवाब दिया कि मेरा स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन है।
मैं रजिस्टर्ड प्रैक्टिशनर हूं। आपको कोई जानकारी नहीं दूंगा। यदि स्वास्थ्य विभाग मुझसे पूछेगा तो उसे जानकारी दूंगा। मेरा वहां पूरा सेटअप है। कई वर्षों से लकवा मरीजों का इलाज कर रहा हूं। अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। मेरे खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।
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