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लॉरेंस गैंग के नाम पर वसूली: अब तक 12 बिल्डरों को मिल चुकी है धमकी; एक बिल्डर के रुपए देने से बढ़ी हिम्मत

KHULASA FIRST

संवाददाता

16 अप्रैल 2026, 12:39 pm
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लॉरेंस गैंग के नाम पर वसूली

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में लॉरेंस गैंग के नाम पर वसूली का नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। हैरी बॉक्सर के नाम से की जा रही धमकियों ने अब खतरनाक रूप ले लिया है। बुधवार (15 अप्रैल) को ही दो नए मामले सामने आए हैं, जिससे कारोबारियों में दहशत का माहौल है।

एक महीने में 12 से ज्यादा कारोबारी टारगेट
जानकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में 12 से अधिक बिल्डर और प्रॉपर्टी कारोबारियों को धमकी भरे कॉल आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि पहले एक बड़े बिल्डर द्वारा डर के चलते करोड़ों रुपए देने के बाद गैंग के हौसले और बढ़ गए हैं।

बड़े नामों को मिली धमकी
राष्ट्रीय रियल एस्टेट विकास परिषद (NAREDCO) एमपी के प्रेसीडेंट विवेक दम्मानी को 5 करोड़ रुपए की धमकी दी गई। वहीं टिगरिया बादशाह क्षेत्र के कारोबारी चेतन सिंह पंवार और उनके पार्टनर कुंवर सिंह भूरिया से 10 करोड़ रुपए मांगे गए। लगातार दो दिनों तक धमकी भरे कॉल आने से व्यापारिक जगत में डर का माहौल है।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
इससे पहले भी शहर में कई बड़े कारोबारियों को निशाना बनाया जा चुका है। बिल्डर संजय मोगरा, कॉलेज संचालक रंजन मित्तल और एक अस्पताल संचालक को भी करोड़ों की फिरौती के कॉल मिल चुके हैं। कई मामलों में शिकायत दर्ज हुई, जबकि कुछ कारोबारी डर के चलते सामने नहीं आए।

SIT जांच में जुटी, लेकिन सुराग कम
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी कैलाश मकवाना ने एसआईटी गठित की है। जांच की कमान एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा को सौंपी गई है, जबकि टीम में डीआईजी राहुल लोढ़ा भी शामिल हैं।

अब तक दो आरोपियों मनीष जांगिड़ और राजपाल सिंह चंद्रावत को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन मुख्य नेटवर्क तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है।

विदेशी नंबर और VPN से ऑपरेट हो रहा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि गैंग विदेशी नंबरों और वीपीएन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है। व्हाट्सएप कॉल और वॉयस मैसेज के जरिए धमकियां दी जा रही हैं। पैसे नहीं मिलने पर स्थानीय बदमाशों से फायरिंग या पेट्रोल बम जैसी घटनाएं करवाई जाती हैं, जिससे डर का माहौल बनाया जा सके।

अंदरूनी जानकारी लीक होने का शक
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन कारोबारियों को धमकी मिल रही है, उनके बारे में बेहद निजी जानकारी कॉल करने वालों के पास मौजूद है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि गैंग को अंदरूनी स्तर से जानकारी मुहैया कराई जा रही है।

फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है, लेकिन बढ़ते मामलों ने साफ कर दिया है कि इंदौर में वसूली का यह नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है।

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