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ई-बसों का विस्तार: 8 शहरों के लिए 26 इलेक्ट्रिक बसें जल्द शुरू होंगी; 150 बसों के लिए बन रहे नए डिपो

KHULASA FIRST

संवाददाता

05 अप्रैल 2026, 12:01 pm
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ई-बसों का विस्तार

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री परिवहन सेवा के तहत ‘अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड’ (AICTSL) की पहली बोर्ड बैठक में इंटरसिटी बस सेवा के विस्तार का रोडमैप तैयार किया गया।

26 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन
बैठक में तय किया गया कि प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों को जोड़ते हुए 26 नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन जल्द शुरू किया जाएगा। इन शहरों में उज्जैन, भोपाल, खरगोन, सेंधवा, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, धार-मांडव और महेश्वर शामिल हैं।

इंटरसिटी नेटवर्क को मिलेगा बढ़ावा
AICTSL अब केवल इंदौर शहर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे संभाग में बसों का संचालन करेगी। बैठक में बोर्ड का पुनर्गठन भी किया गया, जिसमें अन्य जिलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

अनुबंध को एक साल के लिए बढ़ाने का निर्णय
साथ ही, इंदौर-उज्जैन और इंदौर-भोपाल रूट पर पहले से चल रही बस सेवाओं के अनुबंध को एक साल के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, ताकि यात्रियों को निरंतर सुविधा मिलती रहे।

150 ई-बसों के लिए तैयार हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर
केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा के तहत इंदौर को पहले चरण में 150 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। इन बसों के संचालन के लिए दो बड़े डिपो बनाए जा रहे हैं। ये हैं- नायता मुंडला आईएसबीटी और देवास नाका।

एक अतिरिक्त डिपो का स्थान भी चिन्हित
इसके अलावा दूसरे चरण के लिए एक अतिरिक्त डिपो का स्थान भी चिन्हित कर लिया गया है। इस पूरी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। संभावना है कि बसों के शुरू होने पर प्रधानमंत्री वर्चुअल माध्यम से इस सेवा का शुभारंभ कर सकते हैं।

निजी बसों के अधिग्रहण पर फिलहाल निर्णय नहीं
बैठक में बसों की संख्या बढ़ाने और मौजूदा सेवाओं को जारी रखने पर सहमति बनी, लेकिन निजी बसों के अधिग्रहण को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। इस संबंध में नीति बाद में तय की जाएगी।

साइकिल और मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट पर भी जोर
शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और मजबूत बनाने के लिए 500 इलेक्ट्रिक साइकिलों को भी मंजूरी दी गई है। इससे अंतिम माइल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोग बसों के साथ अन्य पर्यावरण अनुकूल साधनों का भी उपयोग कर सकेंगे।

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