पंचकुइया मुक्तिधाम में अस्थियों की अदला-बदली: एक ही टोकन दो परिवारों को बांटा; नर्मदा तट से परिजन को वापस बुलाया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के पंचकुइया मुक्तिधाम में नगर निगम प्रबंधन की ऐसी महा-लापरवाही सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। निगम प्रशासन की इस अंधेरगर्दी के चलते तीन परिवारों को अपनों की अंतिम विदाई के समय वह मानसिक संताप झेलना पड़ा, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए।
मुक्तिधाम पर तैनात लापरवाह कर्मचारियों ने टोकन वितरण में ऐसी गफलत पैदा की कि एक परिवार अपने पिता की अस्थियों के लिए घंटों परेशान होता रहा, तो दूसरा परिवार किसी अजनबी की अस्थियां लेकर नर्मदा विसर्जन के लिए 100 किलोमीटर दूर खेड़ीघाट तक पहुंच गया।
इस पूरे घटनाक्रम में मदनलाल विश्वकर्मा और सुनील चौबे के परिवारों के साथ जो हुआ वह सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रमाण है। प्रजापत नगर निवासी मदनलाल विश्वकर्मा का निधन हुआ था, जिनका दाह संस्कार 6 मार्च को किया गया। उनके बेटे अजय विश्वकर्मा ने रुंधे गले से बताया कि अंतिम संस्कार के समय उन्हें 13 नंबर के दो टोकन दिए गए थे।
नियमों के अनुसार एक टोकन मौके पर जमा हुआ और दूसरा जमा कर अस्थियां लेना था। अजय व समाजजन शनिवार सुबह 9 बजे अपने पिता की अस्थियां लेने पहुंचे तो पैरों तले जमीन खिसक गई उनके पिता की अस्थियां वहां से गायब थीं। पता चला कि निगम की लापरवाही से वही 13 नंबर का टोकन किसी और को भी दे दिया गया था और वे अस्थियां ले जा चुके हैं। दुखी परिवार ने मौके पर डायल 100 बुलाकर विरोध दर्ज कराया, लेकिन गमगीन माहौल में पुलिस कार्रवाई के बजाय पिता की अस्थियां ढूंढना उनकी प्राथमिकता थी।
नगर निगम के लापरवाह तंत्र पर उठते गंभीर सवाल
मुक्तिधाम में तैनात नगर निगम के कर्मचारियों की इस अक्षम्य गलती ने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मृतकों के परिजन एवं समाजजन में इस पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करार दिया है। जब एक ही नंबर का टोकन जारी हो रहा था, तब काउंटर पर बैठे कर्मचारियों की आंखें क्यों बंद थीं? पीड़ित परिवारों को जो मानसिक पीड़ा और अपमान झेलना पड़ा उसकी जवाबदेही किसकी है? यह महज एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि एक बड़ी मानवीय भूल है।
थाने में माफीनामा दिया है...
पंचकुइया मोक्षधाम विकास समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने कहा कि जिस कर्मचारी से गलती हुई है वह 35 साल से सेवा दे रहा है। अस्थियों की अदला-बदली के संबंध में कर्मचारी दीपक प्रजापत और पूनम ने मल्हारगंज थाने में लिखित माफीनामा दिया है। भविष्य में इस तरह की लापरवाही नहीं करने की बात कही है।
डायल 112 के माध्यम से पंचकुइया मुक्तिधाम पर विवाद की सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। हालांकि, इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। यदि इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त होती है, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। - राजेश दंडोतिया, एडिशनल डीसीपी, इंदौर
100 किमी दूर खेड़ीघाट पहुंचे परिजन, विसर्जन से ठीक पहले आया फोन
लापरवाही का दूसरा मामला नगीन नगर के सुनील चौबे (65 वर्ष) के परिवार से जुड़ा है। उनकी भांजी अनन्या मिश्रा ने बताया कि उनके मामा अविवाहित थे, अंतिम संस्कार 5 मार्च को किया था। मुक्तिधाम प्रबंधन ने उन्हें भी 13 नंबर का टोकन थमा दिया। इसी टोकन के आधार पर परिवार को जो अस्थियां सौंपी गईं, उन्हें लेकर वे नर्मदा तट खेड़ीघाट पहुंच गए थे।
विसर्जन की तैयारी चल ही रही थी कि तभी पंचकुइयां मुक्तिधाम के ट्रस्टियों और लापरवाह कर्मचारियों का फोन आया कि आप गलत अस्थियां ले आए हैं, तुरंत वापस आएं। दो-तीन घंटे का सफर तय कर नर्मदा किनारे पहुंचे परिजन को भारी मन से बिना विसर्जन किए वापस इंदौर लौटना पड़ा।
बाद में पता चला कि उनके मामा की अस्थियों का असली टोकन नंबर 12 था, लेकिन कर्मचारियों ने 13 नंबर की अस्थियां उन्हें सौंप दी थीं। वापस लौटकर उन्होंने मामा की अस्थियां लीं और तीसरे दिन कर्म पूर्ण किया।
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