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ईडब्ल्यूएस फ्लैट किराए पर: रहवासी कॉलोनी में धड़ल्ले से चल रहा व्यवसाय; प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला

KHULASA FIRST

संवाददाता

21 अप्रैल 2026, 7:39 pm
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ईडब्ल्यूएस फ्लैट किराए पर

नागरिकों का विरोध तेज, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब और निम्न आय वर्ग को रहने के लिए दिए जाने वाले ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। शहर के जनशक्ति नगर क्षेत्र में आवासीय प्लॉट और मल्टी का खुलेआम व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि प्रशासन इस पर मौन है।

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आवासहीन लोगों को रहने के लिए छत उपलब्ध कराना है, लेकिन जनशक्ति नगर में इसके विपरीत स्थिति देखने को मिल रही है। यहां ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट और प्लॉट किराए पर देकर उनमें दुकानें, दफ्तर, होटल और रेस्टोरेंट संचालित किए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि तीन मंजिला मल्टी में नीचे की मंजिल 15 से 25 हजार रुपए, पहली मंजिल 10 से 12 हजार और तीसरी मंजिल 8 से 10 हजार रुपए तक किराए पर दी जा रही है।

लीज शर्तों का खुला उल्लंघन- जनशक्ति गृह निर्माण सहकारी संस्था को वर्ष 2008 में ग्राम सिरपुर की जमीन आवासीय निर्माण के लिए लीज पर दी गई थी। स्पष्ट शर्त थी कि भूमि का उपयोग केवल आवासीय उद्देश्यों के लिए होगा।

इसके बावजूद न केवल व्यावसायिक निर्माण किया गया, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बनी मल्टी तक का दुरुपयोग कर दिया गया। यह सीधे तौर पर लीज शर्तों और योजना के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।

पात्रों के बजाय अपात्रों को मिले प्लॉट
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता दीपू मिश्रा सहित अन्य नागरिकों ने आरोप लगाया है कि पात्र हितग्राहियों को प्लॉट नहीं दिए गए, जबकि अपात्र लोगों को नगर निगम अधिकारियों और संस्था पदाधिकारियों की मिलीभगत से लाभ पहुंचाया गया। नागरिकों का कहना है कि यही वजह है कि आज इन आवासों का उपयोग किराए और व्यवसाय के लिए किया जा रहा है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल
मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने कलेक्टर और संबंधित एसडीएम निधि वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आम लोगों की शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर सीधा घोटाला बताते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।

नियमों के विपरीत अनुमति दिलाई
जनशक्ति गृह निर्माण सहकारी संस्था में भूखंड आवंटन को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2001 में स्वीकृत 104 प्लॉटों की संख्या को बढ़ाकर 133 कर दिया गया और इसमें भारी अनियमितताएं की गईं। तत्कालीन अध्यक्ष पंकज पांडे पर आरोप है कि उन्होंने अपने परिजन और चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी शपथ पत्र, अवैध रजिस्ट्रियां और नियमों के विपरीत विकास अनुमति दिलाई।

हाई कोर्ट आदेश के बाद भी अटका डिमार्केशन
मामले में वर्ष 2009 में हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई थी, जिस पर 2013 में डिमार्केशन (सीमांकन) प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया गया था। आरोप है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद डिमार्केशन प्लान को जानबूझकर आगे नहीं बढ़ाया गया, ताकि अनियमितताओं का खुलासा न हो सके।

जांच पर भी सवाल, मिलीभगत के आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा डिमार्केशन प्लान की स्वीकृत प्रति अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसे साक्ष्य दबाने की साजिश बताया जा रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है, उन्हीं को जांच सौंपी गई है। इसे खुली मिलीभगत बताते हुए स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।

…तो कॉलोनी सेल कार्रवाई करेगा
एसडीएम निधि वर्मा ने बताया कि उक्त शिकायत मेरे संज्ञान में नहीं है, अगर मामला आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के संबंध में है तो कॉलोनी सेल कार्रवाई करेगा।

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