खबर
Top News

निलंबन के बाद भी फील्ड पर मैडम पटवारी कलेक्टर के आदेश को ठेंगा: ग्रामीणों के वीडियो से हुआ खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 मार्च 2026, 1:08 pm
182 views
शेयर करें:

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिला प्रशासन की सख्ती और कलेक्टर शिवम वर्मा के आदेशों की धज्जियां उड़ाने का एक सनसनीखेज मामले का खुलासा सांवेर तहसील में हुआ है। भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोपों में निलंबित की गई पटवारी दीपशिखा कैथवास न केवल बेखौफ होकर फील्ड पर घूम रही हैं, बल्कि खुलेआम शासकीय कार्यों को अंजाम दे रही हैं।

ग्रामीणों द्वारा बनाए गए एक वीडियो ने तहसील कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक हड़कंप मचा दिया है, जिसमें निलंबित पटवारी खुद यह स्वीकार कर रही हैं कि वे वहां जमीन सीमांकन के पॉइंट देने आई थीं।

वीडियो में जब उनसे उनके निलंबन के बावजूद काम करने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से अपनी सक्रियता को जायज ठहराया। पटवारी कैथवास ने वीडियो में कहा कि ‘मेरा प्रभार अभी मेरे पास ही है और मैंने अभी तक चार्ज सौंपा नहीं है। सीमांकन के कुछ बिंदु देना शेष रह गए थे, इसलिए यहां आना पड़ा।

यह इस कार्य का तीसरा-चौथा मौका है। हां, यह सही है कि मैं अभी निलंबित हूं, लेकिन आज निलंबन के चौथे दिन मुझे यहां इसलिए आना पड़ा क्योंकि जिस दिन मेरा सस्पेंशन ऑर्डर आया था, उसी दिन कुछ महत्वपूर्ण बिंदु दर्ज करने रह गए थे।

एक लोक सेवक होने के नाते मुझे अपना अधूरा काम तो पूरा करना ही होगा, इसके बाद मैंने कोई भी नया काम हाथ में नहीं लिया है। मैं यहां केवल वही पुराने बिंदु स्पष्ट करने आई हूं।

इस मामले में सभी नोटिस 23 तारीख को जारी किए गए थे, इसलिए रिकॉर्ड के अनुसार ही सारा काम पूर्ण करना होगा।

चूंकि नोटिस मैंने ही जारी किए थे और मौके पर भी मैं ही मौजूद थी, इसलिए इस प्रक्रिया को मुझे ही पूर्ण करना होगा। आगामी लिखा-पढ़ी भी मेरी ओर से ही जाएगी क्योंकि नोटिसों पर मेरे ही हस्ताक्षर हैं।

यदि यह कार्य मेरे द्वारा पहले शुरू नहीं किया गया होता, तो मैं इसे छोड़ देती, लेकिन अधूरी फाइल जमा नहीं की जा सकती।‘

निलंबित कर्मचारी का सीमांकन कार्य करना गंभीर सवाल: यह मामला सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था और वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है। नियम स्पष्ट हैं कि निलंबन की अवधि में कोई भी लोक सेवक सरकारी पद का लाभ नहीं ले सकता और न ही किसी शासकीय कार्य में हस्तक्षेप कर सकता है। इसके बावजूद, सांवेर में नियमों को ताक पर रखकर पटवारी का सक्रिय रहना यह दर्शाता है कि प्रशासन का खौफ शून्य हो चुका है।

मुख्यालय सांवेर तहसील ही क्यों?: प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी तकनीकी चूक यह भी मानी जा रही है कि पटवारी और आरआई को निलंबित करने के बाद भी उनका मुख्यालय सांवेर तहसील ही रखा गया।

आमतौर पर जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए निलंबित कर्मचारी का मुख्यालय दूरस्थ तहसील में किया जाता है, ताकि वे संबंधित क्षेत्र के रिकॉर्ड या काम में दखल न दे सकें।

अन्य स्थान पर भेजने की मांग: ग्रामीणों की मांग और मौजूदा हालातों को देखते हुए अब कलेक्टर शिवम वर्मा को तत्काल इनका मुख्यालय जिले की अन्य किसी दूरस्थ तहसील में स्थानांतरित करना चाहिए, ताकि जांच की निष्पक्षता बनी रहे।

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!