टॉप-10 में टॉप आईएएस डॉ. सुदाम बनेंगे सरकार के संकट मोचक
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दू सरा मोर्चा मुख्यमंत्री के लिए राजनीति का था, जहां अपने और विपक्ष दोनों से वह जूझ रहे थे। ऐसी विकट स्थिति के बाद भी मुख्यमंत्री चट्टान की तरह मजबूती से चुनौतियों से निपट रहे थे, लेकिन इसी समय उन्हें ऐसे भरोसेमंद और कुशल अधिकारियों की जरूरत महसूस हुई, जो शासन-प्रशासन और क्राइसिस मैनेजमेंट को बेहतर तरीके से हैंडल कर सकें।
तभी से प्रशासन में बड़े बदलाव की पटकथा लिखनी शुरू हो गई थी। दूसरा कारण मुख्यमंत्री सचिवालय से जारी निर्देशों का पालन करने में शासन-प्रशासन स्तर पर ढिलाई का भी था। इसके कारण सचिवालय के कामकाज प्रभावित हो रहे थे।
ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री को अपने सचिवालय के लिए एक मजबूत, दूरदर्शी, प्रभावी, परिश्रमी और बेहतर समन्वय वाले, जनसरोकारों से जुड़े अधिकारी की जरूरत थी। विचार मंथन के बाद सबसे उपयुक्त नाम डॉ. सुदाम खाड़े के रूप में उभरकर आया।
इस समय डॉ. सुदाम की नई भूमिका तय हो गई थी। इंदौर संभाग आयुक्त के पद पर पदस्थ डॉ. सुदाम को मुख्यमंत्री का सचिव बनाने के लिए नए मुख्य सचिव का इंतजार किया गया। इससे पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन की बदली केंद्र ने दिल्ली में करवा ली।
इसके बाद मुख्यमंत्री के लिए और बेहतर स्थिति बनी। कल नए मुख्य सचिव के लिए अनुभवी और योग्य अधिकारी अशोक बर्णवाल की ताजपोशी के साथ प्रशासन में कसावट लाने के लिए अधिकारियों को इधर से उधर किया गया।
मध्य प्रदेश के नए मुख्य सचिव बर्णवाल ने पदभार संभालने के तुरंत बाद 20 आईएएस अधिकारियों की पहली तबादला सूची जारी कर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बदलाव होगा। इस सूची में वन, जल संसाधन, उद्योग, खाद्य, प्रशासन अकादमी और कई जिलों के कलेक्टर स्तर तक बड़े फेरबदल किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार यह सूची केवल नियमित प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि नई टीम तैयार करने की शुरुआत मानी जा रही है। जिन विभागों को मुख्यमंत्री सरकार की प्राथमिकताओं निवेश, उद्योग, नगरीय विकास, जल संसाधन और प्रशासनिक प्रशिक्षण, से जोड़ा जा रहा है, वहां अपेक्षाकृत भरोसेमंद और परिणाम देने वाले अधिकारियों को तैनाती दी गई है।
प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल के बाद से ही इंदौर संभाग के आयुक्त रहे डॉ. सुदाम खाड़े को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव बनाए जाने की चर्चा सबसे प्रमुख है। नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की पहली तबादला सूची के इस सबसे चर्चित डॉ. सुदाम के नाम पर फैसला केवल एक सामान्य प्रशासनिक स्थानांतरण नहीं, बल्कि सरकार के नीतिगत और कामकाज में योग्य अधिकारी का मूल्यांकन है। प्रशासनिक फेरबदल के बाद से ही इंदौर संभाग के आयुक्त रहे डॉ. सुदाम खाड़े को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव बनाए जाने की चर्चा शासन और प्रशासन में सकारात्मक रूप से देखी जा रही है।
वल्लभ भवन से भी विदा
सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राजेश कुमार राजोरा जिन भी कारणों से मुख्य सचिव नहीं बन पाए, अब वल्लभ भवन से भी विदा हो रहे हैं। परसों का दिन भी उनके लिए उदासी का रहा होगा, जब मुख्य सचिव के पद से वंचित हुए और फिर दूसरे ही दिन कल उन्हें उनकी वरिष्ठता के अनुकूल महानिदेशक का पद दे दिया गय।
उनको प्रशासन अकादमी का डीजी बनाना यह संकेत माना जा रहा है कि मुख्य सचिव की दौड़ से बाहर होने के बाद उन्हें उनकी वरिष्ठता के अनुसार मुख्य सचिव पद से बड़ा या समकक्षा पद देना जरूरी था, क्योंकि वह मुख्य सचिव नहीं बन पाए, जबकि उनसे जूनियर अधिकारी अशोक बर्णवाल मुख्य सचिव बने, इसलिए उन्हें महानिदेशक का पद दिया गया। इस प्रशिक्षण अकादमी में सिवाय ट्रेनिंग के और कोई दूसरे काम नहीं हैं, जैसे वल्लभ भवन में, मुख्यमंत्री के सचिवालय में होते हैं। फिलहाल यह पनिशमेंट पोस्टिंग जैसा ही कुछ-कुछ है।
वैसे देखा जाए तो एक तरह से डॉ. राजोरा को अपेक्षाकृत कम राजनीतिक, लेकिन महत्वपूर्ण संस्थागत जिम्मेदारी दी गई है। नीरज मंडलोई को उद्योग विभाग की जिम्मेदारी देकर सरकार ने निवेश और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों पर फोकस का संदेश दिया है। इंदौर कमिश्नर रहे सुदाम खाड़े को मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव बनाना मुख्यमंत्री की टीम को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
नौकरशाही के जानकार मानते हैं कि किसी भी नई सरकार या नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालने के बड़े प्रशासनिक परिवर्तन होते हैं। इसी क्रम में पहली तबादला सूची से स्पष्ट होता है कि प्रशासन में मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं के अनुरूप टीम तैयार करना, जिन विभागों में तेज निर्णय चाहिए, वहां भरोसेमंद अधिकारियों की नियुक्ति और लंबे समय से एक ही विभाग में जमे अधिकारियों को दूसरे विभागों में भेजना प्रमुख रूप से ट्रांसफर के आधार हैं। ये वे कारण हैं, जो सामने दिखाई देते हैं। बाकी जो दिखाई नहीं देता वह सब जानते हैं।
कुछ समय पहले से तैयार मध्य प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों की तबादला सूची कल आधी रात के बाद मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने जारी की। ये तबादले सामान्य नहीं हैं, क्योंकि ढाई बरस के अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को कई सारे खट्टे-मीठे प्रशासनिक अनुभवों से गुजरना पड़ा।
कुछेक ऐसे मौके भी आए, जब सरकार संकट में नजर आई। इसका एक बड़ा कारण वे बड़े अधिकारी भी रहे, जिनके भरोसे मुख्यमंत्री थे। ऐसे संकट में जिम्मेदार अधिकारियों का तंत्र पूरी तरह विफल साबित होता नजर आया।
बड़ी जिम्मेदारी की बड़ी वजह
सरकार के अंदरूनी गलियारों से छनकर आ रही जानकारी के अनुसार डॉ. सुदाम खाड़े को मुख्यमंत्री कार्यालय में लाने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े रणनीतिक कारण रहे हैं।
मंत्रालय और फील्ड के बीच समन्वय के काम के लिए कई सारे अधिकारी आजमाए गए, लेकिन बात नहीं बनी और आखिर में घूम-फिरकर योग्य अधिकारी के रूप में डॉ. सुदाम का नाम इसलिए आया, क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली आक्रामक और परिणामोन्मुख मानी जाती है।
सरकार चाहती है कि महत्वपूर्ण नीतियां केवल कागजों पर न रहें, बल्कि मैदानी स्तर पर तेजी से लागू हों। डॉ. खाड़े की फील्ड प्रशासन पर मजबूत पकड़ और समन्वय क्षमता को इसके लिए सबसे उपयुक्त माना गया।
दूसरा कारण निवेश और विकास कार्यों को गति गति देने के साथ विजनरी प्लान पर काम करना सरकार की प्राथमिकता में है, इसलिए आगामी महीनों में सरकार का पूरा फोकस इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और समयबद्ध परियोजनाओं को पूरा करने पर है।
इंदौर संभाग में रहते हुए डॉ. खाड़े ने निवेश संवर्द्धन और नगरीय विकास के मोर्चे पर जो सक्रियता दिखाई थी, वैसी ही दक्षता अब पूरे राज्य के स्तर पर सीएमओ से संचालित करने की योजना है।
तीसरा कारण भरोसेमंद और शांत कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. खाड़े को एक शांत, अनुशासित और बिना विवाद के
टार्गेट पूरा करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है। मुख्यमंत्री अपनी कोर टीम में ऐसे ही तेज-तर्रार और विजनरी अफसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कम समय में बड़े प्रशासनिक निर्णय ले सकें।
डॉक्टर से आईएएस बने डॉ. सुदाम
डॉ. सुदाम खाड़े मध्य प्रदेश कैडर के 2006 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की है, जिसके चलते उनकी निर्णय क्षमता और तार्किक दृष्टिकोण को काफी सटीक माना जाता है। वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। खेती-किसानी और चिकित्सा दोनों में उन्हें महारत हासिल है।
राघवेंद्र सिंह को उद्योग से वन विभाग में भेजना भी बताता है कि एक भारी-भरकम विभाग से हटाने के बाद उन्हें दूसरा भारी-भरकम वन विभाग दिया गया है। उद्योग विभाग में बहुत कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा था। राघवेंद्र सिंह जैसा चाह रहे थे वैसा हो नहीं रहा था।
वैसे भी उन्हें बहुत लंबा समय उद्योग विभाग में हो चुका था तथा संदीप यादव को वन से जल संसाधन विभाग में स्थानांतरित करना विभागीय प्राथमिकताओं के पुनर्संतुलन का संकेत देता है। यादव मुख्यमंत्री के विश्वसनीय अधिकारियों में माने जाते हैं।
इंदौर कमिश्नर के रूप में भास्कर लश्कर को लाया गया है। निश्चित तौर पर वह मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारियों में हैं, इसलिए इंदौर कमिश्नर की ड्रीम पोस्टिंग मिली। मुख्य सचिव कार्यालय में पदस्थ रहे गुरु प्रसाद को खरगोन का कलेक्टर बनाया गया है।
पहले इस पद पर महिला अधिकारी भव्या मित्तल थीं, इसलिए कहा जा रहा था कि उनके स्थान पर कोई महिला अधिकारी नियुक्त हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और गुरु प्रसाद को कलेक्टर का दायित्व दे दिया गया। पूर्व मुख्य सचिव के समय में ही उनका नाम संभवत: तय हो गया था।
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