मिस्त्री के गले के आर-पार सरिया डॉक्टरों ने निकाला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सांसें अटकी थीं और गर्दन के आर-पार सरिया मौत बनकर खड़ा था, लेकिन इंदौर के एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों के हौसले उस लोहे से कहीं ज्यादा मजबूत साबित हुए। खरगोन निवासी 30 वर्षीय सद्दाम के साथ 1 अप्रैल की सुबह जो हादसा हुआ, उसने देखने वालों की रूह कंपा दी थी, मगर अस्पताल के सर्जरी विभाग ने उस भयावह स्थिति में भी कमाल कर दिखाया।
विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद शुक्ला के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने अपनी सूझबूझ और तकनीकी कौशल से एक ऐसा ऑपरेशन सफल किया, जिसे चिकित्सा जगत में बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
निर्माण कार्य के दौरान हादसे का शिकार हुए मिस्त्री सद्दाम को जब गंभीर हालत में जिला अस्पताल खरगोन से इंदौर रेफर किया गया, तब हर पल कीमती था। एमवाय अस्पताल पहुंचते ही विशेषज्ञ टीम सक्रिय हुई और डॉ. अविनाश गौतम, डॉ. उपेंद्र पांडेय, डॉ. रामेंद्र गुर्जर सहित सीनियर रेजिडेंट डॉ. सुब्रजीत नायक ने मोर्चा संभाला।
इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. शालिनी जैन की टीम ने नाजुक परिस्थितियों में मरीज को स्थिर रखा, जिससे डॉक्टरों के लिए सरिया निकालना संभव हो सका। गर्दन की जटिल नसों और श्वसन नली को सुरक्षित बचाते हुए डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक सरिया बाहर निकाल लिया है।
अस्पताल की इस तत्परता ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझने से बचा लिया, बल्कि सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की श्रेष्ठता का एक और कीर्तिमान स्थापित किया है। सद्दाम अब खतरे से बाहर है और डॉक्टरों की निगरानी में है।
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