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मत डरिये लॉकडाउन की खबरों से

KHULASA FIRST

संवाददाता

27 मार्च 2026, 5:42 pm
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मत डरिये लॉकडाउन की खबरों से

राकेश अचल वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खाड़ी युद्ध के चलते देश में एक बार फिर लॉकडाउन की आशंका से दुबले होने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। वैसे तो लॉकडाउन की नौबत आएगी नहीं और लगाया भी गया तो उससे आपको 2019-20 के लॉकडाउन की तरह न घर में नजरबंद रहना पड़ेगा और न आपकी जान को कोई खतरा होगा।

इस बार यदि लॉकडाउन की वजह कोई चीनी वायरस नहीं बल्कि मध्य पूर्व का तैलीय वायरस है जो कि ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है, यानि ये ऊर्जा का संकट है। खाड़ी में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में आ रही बाधाओं ने देश की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए भाषणों और 25 मार्च को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद नये लॉकडाउन की चर्चा गति पकड़ रही है। अगर यह प्रभावी होता है, तो भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी वैसी नहीं रहेगी जैसी आज है। तेल की राशनिंग से लेकर वर्क फ्रॉम होम तक, बहुत कुछ बदल सकता है। ये लॉकडाउन आर्थिक भी हो सकता है।

प्रधानमंत्री ने जिस दिन से संसद में वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया है उसी दिन से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में लॉकडाउन शब्द तब से तेजी से ट्रेंड कर रहा है। सरकार ने इस मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक भी कर ली, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले आर्थिक और ऊर्जा संबंधी प्रभावों पर चर्चा की गई. इस बैठक के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा सकती है। यद्यपि सरकार ने देश में पेट्रोलियम पदार्थों का पर्याप्त स्टॉक होने का आश्वासन दिया है।

इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने भी 1965 में (भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान) देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का आह्वान ऐसे ही एक संकट के समय किया था। इसे ‘शास्त्री व्रत’ भी कहा जाता था, जिसमें अक्सर सोमवार को एक वक्त का भोजन छोड़ने या पूरे दिन उपवास करने की अपील की गई थी.1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय देश में भयंकर सूखा पड़ा और अनाज की भारी कमी हो गई। भारत उस समय गेहूं आदि के लिए अमेरिका पर निर्भर था।

उस समय भी अमेरिका ने युद्ध रोकने की शर्त पर अनाज की सप्लाई रोकने की धमकी दी, जिससे भारत का स्वाभिमान प्रभावित होने वाला था। शास्त्री जी नहीं चाहते थे कि देश विदेशी सहायता के लिए झुके या हाथ फैलाए। उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया और साथ ही ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया, ताकि सैनिकों का मनोबल बढ़े और किसान ज्यादा उत्पादन करें... आज ईरान भी इसी दौर से गुजर रहा है।

नए लॉकडाउन की स्थिति में सबसे पहले गाज परिवहन व्यवस्था पर गिर सकती है। ईंधन की राशनिंग के तहत पेट्रोल और डीजल की बिक्री को सीमित किया जा सकता है। बड़े शहरों में ट्रैफिक और ईंधन की खपत कम करने के लिए कार-फ्री संडे या ऑड-इवन जैसी व्यवस्था दोबारा लागू की जा सकती है। निजी बस ऑपरेटरों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डीजल की कमी के कारण लंबी दूरी की यात्राएं महंगी हो सकती है।

सरकार एक बार फिर सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की गाइड लाइंस जारी कर सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य दफ्तर जाने वाले लाखों लोगों द्वारा खर्च किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल की बचत करना है। इसी तरह, स्कूलों और कॉलेजों को भी भारत में आईपीएल जैसे बड़े आयोजनों का समय करीब है, लेकिन भावी लॉकडाउन के चलते स्टेडियमों में दर्शकों के प्रवेश पर रोक लग सकती है।

भीड़ से होने वाली बिजली की खपत व निजी वाहनों को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा सकती है। सार्वजनिक कार्यक्रमों, रैलियों व बड़े जलसों पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है। हवाई यात्रा के क्षेत्र में भी उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है, क्योंकि जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतें और सीमित उपलब्धता एविएशन सेक्टर के लिए चुनौती बन सकती है।

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