टाउनशिप की विकास मंजूरी पर विवाद: तीन कलेक्टर पहले ही दे चुके हैं इतनी मंजूरी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर जिले में एक टाउनशिप की विकास मंजूरी को लेकर इन दिनों विवाद खड़ा हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब जिले के तीन पूर्व कलेक्टर 79 गांवों में 158 विकास मंजूरियां पहले ही जारी कर चुके हैं, तो अब एक मंजूरी पर आपत्ति क्यों हो रही है। खास बात यह है कि जिस मंजूरी पर विवाद है, वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी की गई है।
मास्टर प्लान के बाद बदले नियम
इंदौर का मास्टर प्लान 1 जनवरी 2022 से लागू हुआ, जिसके तहत शहर का दायरा बढ़ाकर 79 गांवों को शामिल किया गया। इसके बाद नई कॉलोनियों की मंजूरी पर रोक लग गई।
केवल मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम (टीएंडसीपी) की धारा-16 के तहत कम से कम चार हेक्टेयर भूमि पर ही विकास मंजूरी का प्रावधान लागू हुआ।
बाद में धारा-16 के तहत भी मंजूरियों को लेकर विवाद सामने आए। इसी बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में कहा था कि फिलहाल धारा-16 के तहत भी नई मंजूरियां नहीं दी जा रही हैं।
किस मंजूरी पर उठा विवाद?
विवाद सांवेर तहसील के मुरादपुरा स्थित एसआर रियलिटी की गुरुकृपा टाउनशिप की विकास मंजूरी को लेकर है। डेवलपर से प्रशासन ने करीब 1.36 करोड़ रुपये विकास शुल्क जमा कराया, लेकिन बाद में मंजूरी जारी नहीं की।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां 9 दिसंबर 2025 को अदालत ने जिला प्रशासन को कानून के अनुसार 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
इसके बावजूद मंजूरी जारी नहीं हुई। प्रशासन ने दो बार राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगा। बाद में अदालत से अवमानना नोटिस मिलने के बाद 19 जून को विकास मंजूरी जारी कर दी गई।
विवाद की वजह क्या है?
शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि जब धारा-16 के तहत मंजूरियों पर रोक है, तब यह मंजूरी कैसे जारी कर दी गई। यह भी सवाल उठाया गया कि तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने 30 अप्रैल 2024 को शासन से मार्गदर्शन मांगा था, फिर भी मंजूरी क्यों दी गई।
प्रशासन का पक्ष
जिला प्रशासन का कहना है कि यह मामला धारा-16 के तहत नई मंजूरी का नहीं, बल्कि 1 जनवरी 2022 से पहले टीएंडसीपी द्वारा जारी अभिमत (NOC) के आधार पर लंबित विकास मंजूरी का है।
प्रशासन के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश, अवमानना नोटिस और महाधिवक्ता कार्यालय से प्राप्त विधिक सलाह के बाद ही मंजूरी जारी की गई। वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी इस संबंध में राज्य शासन को दो बार पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था।
टीएंडसीपी के पुराने अभिमत का आधार
प्रशासन के मुताबिक, 5 जुलाई 2023 को टीएंडसीपी ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर स्पष्ट किया था कि 1 जनवरी 2022 से पहले जारी अभिमतों के आधार पर लंबित विकास कार्यों में कोई कानूनी बाधा नहीं है। ऐसे मामलों को नई विकास मंजूरी नहीं माना जाएगा और इन्हें धारा-16 से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
तीन कलेक्टरों के कार्यकाल में 158 मंजूरियां
इसी आधार पर वर्ष 2022 से 2024 के बीच कुल 158 विकास मंजूरियां जारी की गईं।
मनीष सिंह के कार्यकाल में – 78 मंजूरियां
इलैयाराजा टी. के कार्यकाल में – 70 मंजूरियां
आशीष सिंह के कार्यकाल में – 10 मंजूरियां
प्रशासन का कहना है कि ये सभी मंजूरियां 1 जनवरी 2022 से पहले टीएंडसीपी द्वारा जारी अभिमतों के आधार पर थीं और इनमें कोई नई स्वीकृति शामिल नहीं थी।
शासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग
तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह और वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने अलग-अलग समय पर शासन को पत्र लिखकर कहा कि एक ही तरह के मामलों में अलग-अलग स्तर पर भिन्न व्याख्या हो रही है। इसलिए भविष्य में भ्रम और अनावश्यक विलंब से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
10 और मामले हाईकोर्ट में
बताया जा रहा है कि टीएंडसीपी के पुराने अभिमत के आधार पर 35 से 40 टाउनशिप अभी भी विकास मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इनमें से करीब 10 डेवलपर्स हाईकोर्ट का रुख कर चुके हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि बिना न्यायालय के आदेश के कोई नई मंजूरी जारी नहीं की जाएगी। जहां अदालत निर्देश देगी, वहीं कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का दावा
जिला प्रशासन और कॉलोनी सेल के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित मंजूरी पूरी तरह न्यायालय के आदेश, उपलब्ध विधिक राय और टीएंडसीपी के पूर्व निर्देशों के अनुरूप जारी की गई है। प्रशासन के अनुसार, मामले में किसी प्रकार की नियम-विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई है।
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