डायरेक्टर को झटका: जमानत याचिका खारिज; बिस्किट निर्माण कंपनी में मटेरियल चोरी और धोखाधड़ी का मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की एक बिस्किट निर्माण कंपनी में मटेरियल चोरी और कथित धोखाधड़ी के आरोपों से घिरे डायरेक्टर संजय कलवानी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कंपनी के सामान को कथित तौर पर चोरी कर बाहर बेचने के आरोपों के बीच अदालत में पेश की गई उसकी जमानत याचिका को न्यायाधीश नौशीन खान ने खारिज कर दिया।
मामला जीआरवी बिस्किट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जहां कंपनी के ही शेयर होल्डर दिनेश मनवानी ने बाणगंगा थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि कंपनी के डायरेक्टर ने न सिर्फ बोर्ड को दरकिनार कर फैसले लिए, बल्कि कंपनी का मटेरियल चोरी कर अवैध रूप से बाहर बेचने का भी काम किया। अदालत में सुनवाई के दौरान इन आरोपों से जुड़े साक्ष्य भी पेश किए गए, जिसके बाद न्यायालय ने जमानत देने से इंकार कर दिया।
स्टॉक का मिलान करने पर हुआ खुलासा
फरियादी दिनेश मनवानी के अनुसार जीआरवी बिस्किट प्रालि में छह सदस्य हैं, दो डायरेक्टर और चार शेयर होल्डर। कंपनी के संचालन और वित्तीय मामलों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जाते हैं, लेकिन शिकायत में आरोप लगाया कि डायरेक्टर संजय कलवानी ने इस व्यवस्था को नजरअंदाज करते हुए कंपनी के मटेरियल को कथित रूप से चोरी कर बाहर बेच दिया।
फरियादी का कहना है कि जब कंपनी के रिकॉर्ड और स्टॉक का मिलान किया तो कई जगह अंतर सामने आया। इसी के बाद मामले की गहराई से जांच शुरू हुई और यह विवाद खुलकर सामने आया।
पूरे संगठन की विश्वसनीयता प्रभावित
मामले की सुनवाई के दौरान फरियादी पक्ष के अधिवक्ता एडवोकेट धनेश कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि आरोपी पर कंपनी का मटेरियल चोरी कर अवैध रूप से बाहर बेचने का आरोप है। उन्होंने अदालत के सामने कुछ दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनसे यह संकेत मिलता है कि कंपनी के संसाधनों का कथित रूप से अनुचित उपयोग किया गया।
फरियादी पक्ष का कहना था कि यदि कंपनी के ही जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह का कदम उठाए तो इससे न केवल कंपनी को आर्थिक नुकसान होता है बल्कि पूरे संगठन की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
बोर्ड रिजॉल्यूशन का दुरुपयोग किया
मामले में सिर्फ चोरी के आरोप ही नहीं, बल्कि कंपनी के अंदरूनी फैसलों को लेकर भी विवाद सामने आया है। अधिवक्ता धनेश कुमार मिश्रा के अनुसार आरोपी ने कंपनी द्वारा जारी अधिकृत बोर्ड रिजॉल्यूशन का कथित रूप से दुरुपयोग किया। आरोप है कि इस रिजॉल्यूशन के आधार पर ऐसे फैसले लिए गए जिनकी जानकारी अन्य सदस्यों को नहीं दी गई।
इसी क्रम में कंपनी की ओर से शेयर होल्डर गौरव अहलावत के खिलाफ जिला न्यायालय इंदौर में दायर एक परिवाद को कथित रूप से एकतरफा वापस लेने का भी आरोप लगाया गया है। फरियादी पक्ष का कहना है कि यह निर्णय भी बिना सामूहिक सहमति के लिया गया, जिससे कंपनी के हित प्रभावित हुए।
जमानत का किया विरोध
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। वहीं फरियादी पक्ष ने अदालत के सामने आरोपों की गंभीरता और प्रस्तुत दस्तावेजों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने यह माना कि मामला आर्थिक नुकसान और कंपनी के संसाधनों के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसकी जांच अभी जारी है। इसी कारण अदालत ने इस चरण पर आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
इन धाराओं में दर्ज है मामला
फरियादी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316 (5) और 318 (4) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कंपनी को कितना नुकसान हुआ और आरोपों में कितनी सच्चाई है।
जांच में हो सकते हैं खुलासे
पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। कंपनी के अंदरूनी रिकॉर्ड और स्टॉक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो इस प्रकरण में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसी वजह से पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है।
फिलहाल आरोपी डायरेक्टर की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और तथ्य सामने आने की संभावना है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल कंपनी का विवाद नहीं, बल्कि आर्थिक अपराध के बड़े मामले के रूप में भी सामने आ सकता है।
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