गवाहों पर नहीं किया भरोसा: हत्या के मामले में पांच आरोपियों को किया बरी; चार साल पुराने मर्डर केस में बड़ा फैसला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खजराना क्षेत्र में बाउंड्रीवॉल पर नाम लिखने को लेकर हुए विवाद में ठेकेदार की हत्या के चर्चित मामले में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब चार साल पुराने इस हत्याकांड में पुलिस के गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को संदेह से परे न मानते हुए हत्या के आरोप में जेल में बंद पांच आरोपियों को बरी कर दिया।
यह फैसला नवम अपर सत्र न्यायाधीश विवेककुमार चंदेल की अदालत ने सुनाया। अदालत ने निर्णय में कहा संदेह कितना भी गंभीर क्यों न हो, सबूत का स्थान नहीं ले सकता। गवाहों के बयान विश्वसनीय नहीं पाए गए और वैज्ञानिक साक्ष्यों में भी कई खामियां सामने आईं, इसलिए आरोपियों को दोषमुक्त किया जाता है।
बाउंड्रीवॉल के ठेके को लेकर हुआ था विवाद
प्रकरण के अनुसार फरियादी शाकिर पटेल ने खजराना थाने में रिपोर्ट की थी बड़ा भाई इरफान पटेल बाउंड्रीवॉल बनाने का ठेका लेता था। घटना से चार दिन पहले इरफान ने पुष्प विहार कॉलोनी, खजराना स्थित एक प्लॉट पर बाउंड्रीवॉल का ठेका लिया था। 24 मार्च 2021 को इरफान पटेल अपने साथियों आरिफ और रईस के साथ मौके पर काम कर रहा था।
दोपहर के समय वहां गणेश पाटिल नामक व्यक्ति आया, जो खुद भी बाउंड्रीवॉल बनाने का काम करता था। वह अपने साथ एक पेंटर लाया था। गणेश पाटिल ने पेंटर से उस साइट की दीवार पर ‘पाटिल कंस्ट्रक्शन’ लिखवा दिया।
इस बात पर इरफान पटेल ने आपत्ति जताई और कहा उसकी साइट पर यह नाम क्यों लिखवाया, तुरंत मिटाएं। इस बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। आरोप था। गणेश पाटिल गालियां देते हुए चला गया और जाते-जाते धमकी दी लौटकर देख लेगा।
फैसला को लेकर हो रही चर्चा
सभी पहलुओं पर विचार के बाद अदालत ने हत्या के आरोप से गणेश पाटिल, अमन नागर, अंकुश सेंगर, करण राठौर और राजेश राठौर को मुक्त कर दिया। फैसला चर्चा में है कि जांच के दौरान साक्ष्यों की कड़ी मजबूत न होने पर गंभीर मामलों में भी आरोपियों को राहत मिल जाती है।
केवल संदेह के आधार पर नहीं मान सकते दोषी
अदालत ने फैसले में यह भी कहा गवाहों के बयान भी विश्वसनीय नहीं पाए गए। कई विरोधाभास सामने आए, जिससे आरोपियों के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके। केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
आधे घंटे बाद साथियों के साथ लौटा आरोपी
रिपोर्ट के अनुसार करीब आधे घंटे बाद गणेश पाटिल साथियों के साथ लौटा। आते ही इरफान पटेल को जान से मारने की धमकी दी और गुप्ती से उसके सीने, पसलियों और पीठ पर ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर रूप से घायल इरफान गिर पड़ा। भाई शाकिर पटेल और अन्य साथी बचाने के लिए आगे आए तो आरोपियों ने पत्थरों से हमला कर दिया। इरफान को तत्काल बॉम्बे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने इन लोगों को बनाया था आरोपी
जांच के बाद पुलिस ने गणेश पाटिल, अमन नागर, अंकुश सेंगर, करण राठौर और राजेश राठौर को हत्या का आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चालान पेश किया था। विचारण के दौरान पुलिस की ओर से 14 गवाहों के बयान कराए गए। मुख्य आरोपी गणेश पाटिल की ओर से अधिवक्ता योगेशकुमार गुप्ता ने पैरवी की और पुलिस द्वारा पेश साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
वैज्ञानिक साक्ष्य पर भी उठाए सवाल
अदालत के सामने यह तथ्य सामने आया पुलिस द्वारा जब्त गुप्ती को रासायनिक परीक्षण के लिए लगभग दो माह 20 दिन बाद क्षेत्रीय न्यायालयीन विज्ञान प्रयोगशाला राऊ भेजा गया था। अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया उक्त अवधि में गुप्ती को कहां और किसकी अभिरक्षा में रखा गया था, इसका स्पष्ट विवरण पुलिस नहीं दे सकी। गुप्ती पर मानव रक्त के निशान थे, ऐसे में जरूरी था उसे विधिक अभिरक्षा में रखा जाता ताकि किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न रहती। जब पुलिस साबित ही नहीं कर पाई बरामद हथियार को सुरक्षित तरीके से रखा गया था, तो वैज्ञानिक साक्ष्य को निर्णायक मानना उचित नहीं है।
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