धीरज दुबे ने फर्जी सदस्य बनाए: जहां मल्टी ही नहीं; वहां फ्लैट बेच खाए
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
धार रोड पर बसी अवैध गोवर्धन पैलेस कालोनी में युग चेतना हाउसिंग सोसायटी के अध्यक्ष धीरज दुबे के एक और मामले का खुलासा हुआ है। उन्होंने कालोनी में 31 लोगों को फ्लैट बेच खाए, जबकि वहां कोई मल्टी ही नहीं है। यही नहीं, दुबे ने 14 लोगों को प्लॉट आवंटित किए हैं, जो कि संस्था के सदस्य ही नहीं है। इसके अलावा, दुबे ने जो 123 सदस्यों की सूची सहकारिता विभाग को सौंपी है, उसमें न तो इन 14 और न उन 31 लोगों के नाम हैं। जाहिर है कि ये 45 फर्जी सदस्य हैं, जिन्हें दुबे ने उपकृत किया है।
फर्जी सदस्यों की सूची
ये काॅलोनी चंदननगर रोड पर सिरपुर तालाब के सामने बसी है। ये एरोड्रम रोड पर बीएसएफ की बाउंड्री के पीछे का हिस्सा है। कालोनी युग चेतना गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष सुनील कुमावत ने काटी थी, लेकिन उनके द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या कर लेने के बाद अब इस पर धीरज दुबे काबिज हैं। खुलासा फर्स्ट के हाथ लगे दस्तावेजों से साफ जाहिर है कि संस्थाध्यक्ष दुबे ने काफी गड़बड़ियां की हैं।
यह है गड़बड़ी
प्रमाणित कॉपियों में एक सदस्यता सूची है, जिसमें संस्था के 123 सदस्यों के नामों और पतों का जिक्र है। लेकिन एक सूची 14 सदस्यों की है, जिनमें से एक भी नाम इन 123 सदस्यों की सूची में नहीं हैं। इसका मतलब ये है कि ये सूची फर्जी सदस्यों की है। इनमें नाम के साथ प्लॉट क्रमांक दिए गए हैं।
इनमें मधु जगदीश पंचोली-45, वीणा देवेंद्र शर्मा-33, श्याममनोहर नंदलाल शर्मा-19, कमलेश कांतिलाल शर्मा-47, सत्यनारायण बजरंगलाल शर्मा-46, सूरज चतुर्भुज गुप्ता-24, लीलाबाई जगदीश गौर-14, मालतीदेवी मधुकरराव-20, देवेंद्र बाबूलाल शर्मा-32, सीमा हरिकृष्ण गौहर-07, हरीश सूरजप्रसाद गुप्ता-25, सरिता मनोज कल्याणे-39, प्रवीणा सुनील धौलपुरे-26, मनोहर कन्हैयालाल गौड़-59 शामिल हैं। इन सभी से 30-30000 रुपए लिए गए हैं। इनके अलावा, दिलीप भागीरथ गौड़-12 और विनोद पुरुषोत्तम शर्मा-13 को लीज डीड भी की गई है जो 55-5500 रुपए की है।
दुबे ने एक और बड़ा खेला किया
दुबे ने इनके अलावा और एक बड़ा खेला किया है। गोवर्धन पैलेस काॅलोनी में कोई मल्टी ही नहीं है लेकिन उन्होंने 31 लोगों को फ्लैट बेच खाए हैं। इनमें से 16 के नाम और फ्लैट क्रमांक हैं-अनूप शंकरलाल सोनी-203, शुभेंद्र शिवकुमार चतुर्वेदी-105, बृजकिशोर बालकृष्ण गोयल-102, रितेश हेमंत जैन-405, रमन के माथुर-103, स्मृति कृष्णा 403, राधिका कृष्णा चौपड़ा 206, विक्रम पीके चौपड़ा-406, रणजीत पीके चौपड़ा-305, पीथमपुर प्रालि-201, साहिब चामोरकर 204, संतोष तनसुखलाल जैन-106, हुसैन एके खान-401, राधाकृष्ण गोविंद गोयल 102, राजेश मोहनलाल जैन 202, ममता रमन-402, जगदीश गोवंदराम भाटी-302। इनको कहां, किस मल्टी में फ्लैट मिले हैं, कुछ जानकारी नहीं है।
कर्मचारी के साथ भी कर चुके हैं धोखाधड़ी
संस्थाध्यक्ष धीरज दुबे ने अपनी ही संस्था के कर्मचारी मनोज राठौर के साथ भी धोखाधड़ी की है। उन्होंने 2006 में तत्कालीन अध्यक्ष सुनील कुमावत से 5 प्लॉट (प्रत्येक की कीमत 32 हजार रुपए) लिए थे और एवज में एक ही दिन नकद राशि भी भुगतान की थी। राठौर को प्लॉट क्र. 99, 101, 102 और 103 आवंटित किए गए जिनमें प्लॉट क्र. 101 संयुक्तीकरण का था।
प्लॉटों पर कब्जा नहीं दिया। दुबे उस वक्त संस्था का सारा कामकाज देखते थे। उन्होंने राठौर को प्लॉट न देने के लिए 2012 मेंं गांजा तस्करी के झूठे आरोप में जेल पहुंचा दिया। 20 माह बाद जेल से छूटे तो पता चला कि कुमावत ने रहस्यमय परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
राठौर का आरोप है कि दुबे ने तीन प्लॉट जो सास, साले, बड़सास के नाम थे, फर्जी नोटरी पर बेच दिए। पत्नी गायत्री दुबे ने फर्जी साइन किए। विरोध किया तो दुबे ने बुलाकर तीन प्लॉटों के पैसे लौटा दिए। दुबे ने भरोसा दिया कि वो कहीं और मकान दिला देगा। वाटर प्लांट भी लगाएगा, लेकिन ये वादा पूरा नहीं किया और धमकाना शुरू कर दिया।
अन्नपूर्णा थाने में शिकायत की तो उसने फर्जी नौटरी पेश की जिस पर राठौर की पत्नी संतोष के फर्जी हस्ताक्षर थे। सबदुर शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। राठौर का ये भी आरोप है कि दुबे के इशारे पर संस्था सदस्य कमल संदवाने ने जान से मारने की धमकी दी।
क्या कहते हैं धीरज दुबे...
मामले में युग चेतना हाउसिंग सोसायटी के अध्यक्ष धीरज दुबे ने कहा कि कहीं कोई गड़बड़ नहीं है। जो नियमानुसार सदस्य बने हैं, उन्हें ही प्लॉट दिए गए हैं। राठौर खुद डिफाल्टर हैं।
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