डीजीपी का आदेश फेल, फिर पुराने थाने जा पहुंचे तीन ‘अंगद’: तीन साल के अंतराल की अनदेखी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस महकमे में लंबे समय से एक ही थाने में जमे कर्मचारियों की जड़ें काटने और काम में पारदर्शिता लाने के लिए डीजीपी कैलाश मकवाना ने सख्त आदेश जारी किए थे, लेकिन इंदौर में आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हुआ है। हाल ही डीसीपी जोन-1 द्वारा जारी 21 पुलिसकर्मियों की तबादला सूची में तीन ऐसे नाम सामने आए, जिन्हें दोबारा उन्हीं थानों में भेज दिया गया, जहां वे पहले पदस्थ रह चुके थे। खास बात यह कि डीजीपी के आदेश में स्पष्ट रूप से कम से कम तीन वर्ष का अंतराल रखने और एक ही थाने में बार-बार पदस्थापना से बचने के निर्देश दिए गए थे।
22 मई को डीजीपी कैलाश मकवाना ने एक आदेश जारी किया था कि किसी कर्मचारी को एक ही थाने में एक ही पद पर लंबे समय तक नहीं रखा जाएगा। महत्वपूर्ण यह कि हटाने के बाद उसी थाने में उसी पद पर दोबारा पदस्थ नहीं किया जाएगा। यदि उसे उसी थाने में पृथक पद पर भेजा जाता है, तो पुन: पदस्थापना में कम से कम 3 वर्षों का अंतराल होना चाहिए। आदेश का उद्देश्य एक ही जगह लंबे समय तक जमे रहने की प्रवृत्ति रोकना को रोकना। स्थानीय प्रभाव और नेटवर्क को सीमित करना। पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना व थानों में रोटेशन व्यवस्था लागू करना था।
आदेश में डीजीपी ने ये भी स्पष्ट किया था कि उनके उक्त निर्देश के पालन में 1 से 5 जून के तक स्थानांतरण आदेश जारी कर उसका प्रतिवेदन सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कार्मिक) पुलिस मुख्यालय भोपाल के ई-मेल पर भेजा जाए। आदेश के परिपालन में डीसीपी जोन-1 नरेंद्र रावत ने 2 जून को 21 पुलिसकर्मियों की एक तबादला सूची जारी की थी। इसमें तीन पुलिसकर्मियों के मामले में उक्त आदेश का पालन नहीं हुआ। सवाल उठ रहे हैं कि क्या तबादला सूची तैयार करते समय डीजीपी के आदेश का अध्ययन नहीं किया गया या फिर उक्त तीनों पुलिसकर्मी अफसर को गुमराह करने में कामयाब रहे।
तबादला सूची पर सवाल
इनके मामले में हुई गड़बड़
>सूची में 1 नंबर के हेड कांस्टेबल दीपू यादव (बैच नंबर 3164) को एरोड्रम से सदर बाजार भेजा गया है, जबकि ये पूर्व में भी सदर बाजार थाने में पदस्थ रहा है।
>सूची में 14 नंबर के आरक्षक संजय दांगी (बैच नंबर 262) को आजाद नगर से एरोड्रम थाने भेजा गया है, जबकि संजय दांगी पहले एरोड्रम थाने में ही पदस्थ था।
>सूची में 4 नंबर के कार्यवाहक हेड कांस्टेबल राजू बघेल (बैच नंबर 2427) को सदर बाजार से एरोड्रम थाने भेजा गया है। ये पूर्व में भी सदर बाजार थाने में पदस्थ रह चुका है। खास बात यह कि इन तीनों पुलिसकर्मियों के तबादले को तीन साल भी पूरे नहीं हुए थे और उन्हें वापस उन्हीं थानों में भेजा गया, जहां वे पूर्व में पदस्थ रह चुके हैं, जो कि गलत है।
डीजीपी ने दिए थे ये निर्देश
-किसी एक थाने में किसी भी कर्मचारी की एक पद पर पदस्थापना सामान्यत: 4 या अधिकतम 5 वर्ष से अधिक न हो।
-किसी भी अधिकारी/कर्मचारी को उपरोक्त अवधि की पदस्थापना पूर्ण होने के उपरांत पुन: उस पद पर उसी थाने में पदस्थ नहीं किया जाए।
-किसी भी कर्मचारी की पृथक पदों पर किसी एक थाने में पुन: पदस्थापना में कम से कम 3 वर्षों का अंतराल अवश्य रखा जाए।
-आरक्षक से उप निरीक्षक पद पर किसी भी कर्मचारी की एक ही अनुभाग में विभिन्न पदों पर कुल पदस्थापना अवधि 10 वर्ष से अधिक नहीं हो। उपरोक्त सेवाकाल में स्थानांतरण के साथ-साथ अटैचमेंट की समयावधी भी शामिल रहेगी।
इन दो पर विशेष कृपा क्यों?
खुलासा फर्स्ट को थाने के विशेष सूत्रों से ये भी पता चला है कि 21 पुलिसकर्मियों की उक्त लिस्ट में 8 वे नंबर का नाम आरक्षक दीपेंद्र राणा (बैच नं. 2625) और 20वें नंबर का नाम अरुण घुरैया (बैच नं. 1528) दोनों तेजाजी नगर थाने में पदस्थ थे। इनका तबादला आजाद नगर किया गया था। बावजूद इसके ये दोनों तेजाजी नगर थाने का मोह नहीं छोड़ पाए। इन्होंने आदेश के परिपालन में आजाद नगर थाने पर आमद तो दे दी, लेकिन वापस तेजाजी नगर थाने में ड्यूटी करने चले गए। बताते हैं एक अफसर के मौखिक आदेश पर दोनों ऐसा कर रहे हैं। यानी डीसीपी की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।
संशोधन होगा या रफा-दफा हो जाएगा मामला
पुलिस महकमे में चर्चा है कि क्या सूची की दोबारा समीक्षा होगी? क्या जिन मामलों में नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है, उनमें संशोधन कर सख्ती से पालन कराया जाएगा? या फिर डीजीपी के आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?
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