भोले की भक्ति बिकती है: बोलो खरीदोगे; भाजपा के राज में अपने इष्ट की आरती के प्रति आस्था का टिकट तय
KHULASA FIRST
संवाददाता
श्री महाकाल राजा की संध्या व शयन आरती के भी अब चुकाने होंगे 250 रु. दाम
महाकाल के दरबार में अब तक सिर्फ शीघ्र दर्शन के ही चुकाने होते थे दाम, अब संध्या व शयन आरती भी सशुल्क हुई
ढाई सौ रुपए हैं तो एडवांस बुकिंग कर बैठकर देखो बाबा की आरती, नहीं तो धक्के खाते हुए करो चलित दर्शन
बाबा के दर्शन इतने दूभर कर दिए गए कि आम दर्शनार्थी शिखर दर्शन को हुए मजबूर
धर्म के धंधाकरण पर खामोश है धर्मांतरण के खिलाफ शोर मचाने वाली जमात, कथावाचक भी मौन
जिस ज्योतिर्लिंग नगरी उज्जैन के निवासी राज्य के मुख्यमंत्री, उसी शहर में मंदिर प्रबंधन ने आरती के भी लगा दिए दाम
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
धर्मांतरण के खिलाफ तो इस देश में ऊपर से नीचे तक खूब शोर-आक्रोश पसरा हुआ है। सनातन धर्म के प्रति आस्थावान धर्मांतरण पर खूब उद्वेलित हैं, लेकिन धर्म के धंधे बनते जाने पर इतनी ही खामोशी क्यों? क्या धर्म का धंधाकरण सनातनियों को विचलित नहीं करता? वह भी तब, जब सब तरफ ‘राज' ही उस दल का, जो ‘धर्मानुकूल' होने का दावा व दंभ भरता है।
धर्म का धंधाकरण इसी ‘धर्मानुकूल' दल के राज में सब जगह तेजी से कायम होता जा रहा है, लेकिन कहीं कोई हलचल नहीं। देवताओं के स्थान, तीर्थ नगरियां पर्यटन का केंद्र बनती जा रही हैं। आस्था के स्थल पौराणिक स्वरूप से हटकर आधुनिक होते जा रहे हैं। भक्ति के दाम, टिकट तय हो रहे हैं।
भक्तों की श्रेणी, यानी औकात तय हो रही है। मालदार है भक्त तो इष्ट के नजदीक से दीदार हैं, वह भी पूरे सम्मान के साथ। खीसे में रोकड़ा नहीं तो विग्रह के नजदीक तो छोड़ो, दूर से एक झलक भी दूभर है। वीआईपी भक्त के लिए पलक पांवड़े हैं, आम भक्त के लिए हैं धक्के, झिड़कियां और अपमानजनक व्यवहार।
क्या ऐसी थी सनातन की मंदिर व दर्शन व्यवस्था? क्या किसी अन्य धर्म में आस्था ऐसे तौल-मोलकर तय होती है? क्या भक्ति के अन्य धर्म में दाम तय होते हैं? आस्था के प्रकटीकरण का कोई टिकट भी होता है? उज्जैन में तो भोले की भक्ति के ताजा दाम तय किए गए हैं। महाकाल की भक्ति बिक रही है… बोलो, खरीदोगे?
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नारा बुलंद करने वाली भाजपा के राज में अब भक्ति के दाम तेजी से तय होते जा रहे हैं। अयोध्या, मथुरा, काशी ही नहीं, अब तो ओंकार-महाकाल प्रभु के समक्ष सहज हाजिरी के भी दाम मुकर्रर हो गए हैं। ताजा मामला विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग नगरी उज्जैन का है।
यहां विराजमान भगवान महाकाल राजा के अब तक झटपट दर्शन के नाम से ही दाम का बंदोबस्त था, लेकिन अब यहां आरती के दर्शन के भी दाम तय कर दिए गए हैं। अब आप अपने इष्ट महादेव की आरती को अपलक निहारना चाहते हैं, तो इसके लिए 250 रुपए का टिकट लगेगा।
एडवांस में बुकिंग भी कराना होगी और वह भी ऑनलाइन। दाम के दायरे में बाबा महाकाल की संध्या व शयन आरती की गई है। नकद नारायण के साथ आरती का लाभ लेने वाले भक्तों की संख्या भी तय की गई है। एक बार में हजार-बारह सौ। वह भी सिनेमा हॉल की तरह पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर।
शीघ्र दर्शन के नाम पर दाम चुकाने की व्यवस्था अमूमन अब बड़े मंदिरों में है। अखरती तो ये व्यवस्था भी थी कि जिनके पास अपने इष्ट के लिए समय ही नहीं, उन्हें पैसे चुकाकर दर्शन करवाने की ये कैसी व्यवस्था? लेकिन अब आरती के दर्शन भी सशुल्क!
जी हां, ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में पहली बार संध्या व शयन आरती की ऑनलाइन बुकिंग होगी। यह सुविधा तीन दिन पूर्व, यानी गुरुवार से शुरू भी हो गई। शुरुआती दौर में 1200 भक्तों को इसका लाभ मिल सकेगा। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन का ये फैसला है।
प्रशासक प्रथम कौशिक के मुताबिक दर्शन के मामले में डिजिटल व्यवस्था का विस्तार करने की दिशा में ये कदम उठाया है। इसके तहत मंदिर की संध्या व शयन आरती की ऑनलाइन बुकिंग शुरू करने का निर्णय लिया है। कौशिक का दावा है कि ये व्यवस्था पारदर्शिता व सुव्यवस्थित प्रबंधन तथा श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है।
अब श्रद्धालु दोनों आरतियों के लिए केवल मंदिर की अधिकृत वेबसाइट के जरिये ही बुकिंग करवा सकेंगे। संध्या आरती की बुकिंग प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। शयन आरती की ऑनलाइन बुकिंग रोज शाम 4 बजे से शुरू होगीं। दोनों ही आरती के लिए प्रति श्रद्धालु 250 रुपए शुल्क तय किया गया है। बुकिंग पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर दी जाएगी। दोनों आरती के लिए गेट नंबर-1 तय किया गया।
क्या मुख्यमंत्री को भरोसे में रख तय किए हैं आरती के भी दाम... हर तरह की आस्था के दाम लगाने का ये कारनामा उस उज्जैन नगरी में हुआ है, जो नगर राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह नगर है। मुख्यमंत्री स्वयं राजा महाकाल के परम् उपासक हैं।
उसी ज्योतिर्लिंग नगरी के मंदिर प्रबंधन ने आरती के दाम तय कर दिए। ये सब मुख्यमंत्री को संज्ञान में लाकर किया गया है या फिर मंदिर प्रबंधन समिति ने ही अपने स्तर पर फैसला ले लिया? ये सबकी जिज्ञासा का विषय है। पहले ही उज्जैन में अब राजा महाकाल के दर्शन दूभर हो चले हैं।
आम दर्शनार्थी इन दिनों शिखर दर्शन को मजबूर हैं। इनमें हजारों की संख्या में उज्जैन के ही वे भक्त हैं, जो कभी दौड़ते हुए मंदिर में पहुंच जाते थे और सहजता से अष्टयाम दर्शन किया करते थे। अब वे ही अपने शहर में, अपने ही इष्टदेव के दर्शन, शिखर दर्शन के रूप में करने को मजबूत कर दिए गए हैं।
तो सोचिए, बाहर के श्रद्धालुओं के हाल क्या होंगे? जब से राजा महाकाल को महाकाल लोक बनाकर प्रजा से दूर किया गया, तब से कालों के काल महाकाल राजा अपनी प्रजा के लिए दूर हो गए हैं।
नजरों से भी दूर और हैसियत के हिसाब से भी मीलों दूर कर दिए गए। अब ये मुख्यमंत्री पर निर्भर है कि वह अपने ही शहर के ज्योतिर्लिंग की आरती भी सशुल्क करवाएंगे या पहले की तरह निःशुल्क व निश्चित।
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