जहरीले पानी से मौत का मामला: हाईकोर्ट में प्रारंभिक रिपोर्ट पेश; विस्तृत रिपोर्ट के लिए दिया एक माह का समय
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले में गुरुवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान गठित एक सदस्यीय जांच आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।
अगली सुनवाई 6 अप्रैल को
वहीं, विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए हाईकोर्ट ने आयोग को एक माह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की गई है।
जांच आयोग की प्रारंभिक रिपोर्ट
आज की सुनवाई में जांच आयोग की ओर से प्रारंभिक रिपोर्ट रखी गई, जिस पर विस्तृत बहस अगली तारीख पर होगी। कोर्ट ने आयोग को एक कर्मचारी नियुक्त करने की अनुमति भी दी है, ताकि भागीरथपुरा से जुड़े रहवासियों की शिकायतें, आवेदन, साक्ष्य और दस्तावेजों का समुचित समन्वय किया जा सके।
10 दिन में रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश
मामले में यह भी सामने आया कि नगर निगम द्वारा मांगे गए रिकॉर्ड अब तक जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिए कि 10 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर सभी रिकॉर्ड आयोग को सौंपे जाएं।
आयोग को एक माह में रिपोर्ट दाखिल करनी है। इस मामले में अलग-अलग जनहित याचिकाएं लगी हैं। इसमें सीनियर एडवोकेट अजय बागडिया, रितेश इनानी, नीरज सोनी, ऋषि कुमार चौकसे आदि उपस्थित हुए।
पहले ही रिपोर्ट को बता चुका है ‘आई-वॉश’
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने शासन और नगर निगम की रिपोर्ट को ‘आई-वॉश’ करार दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है और स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
खंडपीठ की कड़ी टिप्पणी
यह मामला न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई में है। कोर्ट ने रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए ‘वर्बल ऑटॉप्सी’ शब्द पर भी आपत्ति जताते हुए पूछा था कि क्या यह कोई मान्य मेडिकल टर्म है या अधिकारियों द्वारा गढ़ा गया शब्द। कोर्ट ने साफ कहा था कि पेश की गई रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं है।
स्वतंत्र जांच आयोग का गठन
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता (सेवानिवृत्त न्यायाधीश) की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय स्वतंत्र जांच आयोग के गठन के आदेश दिए थे। आयोग को भागीरथपुरा में दूषित पानी की आपूर्ति, मौतों के कारण, प्रशासनिक लापरवाही, जल गुणवत्ता जांच और स्वास्थ्य शिविरों की स्थिति जैसे बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट सौंपनी है।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि क्षेत्र में दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर लगातार जारी रखे जाएं।
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