दिया तले अंधेरा: मॉक ड्रिल में फेल हुआ कलेक्टर कार्यालय का फायर सिस्टम; हाइड्रेंट नहीं चला
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सुरक्षा व्यवस्थाओं की हकीकत उस वक्त सामने आ गई, जब कलेक्टर कार्यालय में आग से बचाव की मॉक ड्रिल के दौरान ही फायर हाइड्रेंट सिस्टम काम नहीं कर पाया। प्रशासनिक अमला ड्रिल देखता रहा और कर्मचारी सिस्टम चालू करने में जूझते रहे।
सुरक्षा व्यवस्थाओं की बड़ी खामी उजागर
कलेक्टर कार्यालय परिसर में आयोजित आग से बचाव की मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं की बड़ी खामी उजागर हो गई। जिस समय प्रशासनिक भवन में आग लगने की स्थिति से निपटने का अभ्यास किया जा रहा था, उसी दौरान कार्यालय का फायर हाइड्रेंट सिस्टम ही चालू नहीं हो सका।
पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद था
मॉक ड्रिल के दौरान परिसर में कलेक्टर शिवम वर्मा, एडीएम रोशन राय और रिंकेश वैश्य सहित पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद था और ड्रिल का निरीक्षण कर रहा था। वहीं दूसरी ओर, कलेक्टर कार्यालय के नाजीर गौरव धोड़पकर और अन्य कर्मचारी भवन में लगे फायर हाइड्रेंट को चालू करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
सिस्टम फेल
ड्रिल के तहत यह प्रदर्शन किया जाना था कि आपात स्थिति में हाइड्रेंट सिस्टम के जरिए पूरे परिसर में पानी की आपूर्ति कर आग पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन सिस्टम फेल होने के कारण यह प्रदर्शन फायर ब्रिगेड की वाटर लारी के जरिए करना पड़ा।
फायर सेफ्टी तैयारियों पर गंभीर सवाल
इस घटना ने कलेक्टर कार्यालय की फायर सेफ्टी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि परिसर में रजिस्ट्रार कार्यालय के सामने करीब 2 लाख लीटर क्षमता का पानी टैंक और पूरा फायर फाइटिंग प्लांट स्थापित है, जिसमें 6 मोटर पंप लगे हुए हैं। इसके संचालन के लिए कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है।
सुरक्षा इंतजामों की पोल
इसके बावजूद, जरूरत के समय सिस्टम का चालू न हो पाना सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलता है। जब इस संबंध में नाजीर गौरव धोड़पकर से बात की गई, तो उन्होंने मामले को टालते हुए कहा कि सुबह हाइड्रेंट चल रहा था, लेकिन ड्रिल के दौरान किसी कारणवश चालू नहीं हो सका।
बड़ा सवाल
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मॉक ड्रिल जैसे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में ही फायर सिस्टम काम नहीं कर रहा, तो वास्तविक आपात स्थिति में हालात कैसे संभाले जाएंगे? यह घटना प्रशासनिक तैयारियों की गंभीर समीक्षा की मांग करती है।
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