मरीजों से खतरनाक खेल: एंबुलेंस में घरेलू गैस सिलेंडर का प्रयोग; सुप्रीम कोर्ट ने लगा रखी है रोक
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजेंद्र खंडेलवाल 98931-90781 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मरीजों को अस्पताल लाने के लिए सड़कों पर दौड़ रही एंबुलेंस जीता-जागता बम साबित हो सकती हैं। इनमें घरेलू गैस सिलैंडर का प्रयोग किया जा रहा है जो कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एंबुलेंस में गैस किट लगाने पर रोक लगा रखी है इसके बावजूद इंदौर में एंबुलेंस में ये खतरनाक खेल मरीजों के साथ खेला जा रहा है। एक ड्राइवर का कहना है कि सस्ती पडऩे के कारण ऐसा करते हैं। जो होगा, वो देखा जाएगा।
आश्चर्य इस बात का है कि जिला चिकित्सालय में ऐसा हो रहा है। यहां की एंबुलेंस क्र. एमपी 43 जी 2551 में गैस सिलेंडर लगाया जाता है और वो भी घरेलू, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर का कोई भी व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। अक्सर इस तरह की एंबुलेंस में गैस रिफिलिंग भी की जाती है और वो भी घरेलू गैस सिलेंडर से।
कभी न तो खाद्य विभाग के अधिकारियों ने इस ओर झांककर देखा और न स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने। खाद्य नियंत्रक एमएल मारू का सारा ध्यान चावल की अवैध कालाबाजारी पर रहता है और उनका महकमा भी दिनरात ऐसे लोगों की खोज में ही रहता है, जबकि उनकी नाक के नीचे ही शहरभर में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए दौड़ रही एंबुलेंस में गैस सिलेंडर का उपयोग हो रहा है जो नियम विरुद्ध होने के साथ मरीजों की जान से खुलेआम खिलवाड़ भी है।
खाद्य अधिकारी तो कभी-कभार पेट्रोल पंपों पर जाकर छोटी-मोटी कार्रवाई कर लेते हैं और फिर चुप होकर बैठ जाते हैं। एक अधिकारी से जब पूछा तो उन्होंने बताया कि पिछली बार किसी पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल या मिलावटी पेट्रोल मिलने पर कार्रवाई कब की थी, याद नहीं।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
कुछ वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में अपने निर्णय में कहा था कि यदि वाहन में एलपीजी सिलेंडर या अन्य खतरनाक/ज्वलनशील वस्तुएं ले जाई जा रही हैं, तो ड्राइवर के पास खतरनाक सामान ढोने के लिए आवश्यक विशिष्ट योग्यता और लाइसेंस होना अनिवार्य है। 2017 के मुकुंद देवानंद बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में कोर्ट ने ये फैसला दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि गैस सिलेंडर (जो खतरनाक श्रेणी में आते हैं) से भरा वाहन चला रहे हैं, तो केवल सामान्य एलएमवी लाइसेंस काफी नहीं है; आपको खतरनाक वस्तुओं के परिवहन के लिए विशेष योग्यता/लाइसेंस की आवश्यकता होगी, जैसा कि इंडियन कानून में उल्लेखित है।
हटाए जाएंगे ऐसे लोग
हमारे पास पूर्व में भी शिकायत आई थी। ये एंबुलैंस जिला अस्पताल से संबद्ध नहीं हैं। इन्हें हटाने की कार्रवाई चल रही है। जल्दी ही हटा दिए जाएंगे। - डॉ. जीएल सोढ़ी, सिविल सर्जन।
क्या कहता है ड्राइवर भूरा
एंबुलेंस के ड्राइवर भूरा उर्फ अमन प्रजापत ने स्वीकारा कि वो घरेलू गैस सिलेंडर का प्रयोग करता है। ये पूछने पर कि क्या कभी किसी अधिकारी ने टोका नहीं, तो जवाब था कि उन्हें पता ही कहां है जो टोकेंगे। उसने बताया कि वो ऐसा इसलिए करता है कि मरीज के परिजनों को एंबुलेंस का खर्च कम हो।
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