शराब दुकानों की नीलामी में रोज झटके: कीमत घटाने के बाद भी नहीं बिकीं इतनी दुकानें; प्रमुख लोकेशन पर भी नहीं मिले खरीदार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति के बाद शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया सरकार के लिए चुनौती बनती जा रही है। कीमतों में 40 प्रतिशत तक कटौती के बावजूद प्रदेशभर में 200 से अधिक शराब दुकानें अब भी अनबिकी रह गई हैं। हैरानी की बात यह है कि इंदौर जैसे बड़े शहर की प्रमुख लोकेशन पर स्थित दुकानों के लिए भी एक भी टेंडर नहीं आया।
नई नीति के फैसले पड़े भारी
सरकार की आबकारी नीति 2026-27 में दुकानों की बेस प्राइस करीब 20% बढ़ाई गई थी। इसके साथ ही पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण की व्यवस्था समाप्त कर दी गई। इन दोनों फैसलों का असर नीलामी प्रक्रिया पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां कारोबारियों की रुचि काफी कम हो गई है।
3553 में से 200 से अधिक दुकानें अब भी खाली
प्रदेश में कुल 3553 शराब दुकानों की नीलामी होनी थी। शुरुआती चरण में करीब 300 दुकानों के लिए कोई खरीदार नहीं मिला, जिसके बाद सरकार ने राहत देते हुए 40% तक कम बोली लगाने की अनुमति दी। इसके बावजूद हाल ही में खोले गए टेंडरों में 200 से अधिक दुकानें ऐसी रहीं, जिन पर एक भी बोली नहीं लगी।
इंदौर की दो प्रमुख दुकानें भी नहीं बिकी
इंदौर में भी दो अहम लोकेशन सरवटे बस स्टैंड और छोटी ग्वालटोली की शराब दुकानें अनबिकी रह गईं। इन दोनों दुकानों की कुल आरक्षित कीमत करीब 31 करोड़ रुपए बताई जा रही है, लेकिन कम दरों के बावजूद निवेशकों ने रुचि नहीं दिखाई।
एक ही दुकान बिकी, वह भी कम कीमत पर
नीलामी में इंदौर की सिर्फ एक दुकान पलसीकर कॉलोनी बिक पाई। तय कीमत 16.79 करोड़ रुपए थी, लेकिन 40% छूट के बाद यह 10.93 करोड़ रुपए में बिकी। यह दर्शाता है कि खरीदार केवल भारी छूट मिलने पर ही आगे आ रहे हैं।
आज फिर नीलामी, और गिर सकती हैं कीमतें
सरकार अब इन अनबिकी दुकानों की दोबारा नीलामी कर रही है। हालांकि, बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यदि इस बार भी पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं मिली, तो कीमतों में और कटौती करनी पड़ सकती है।
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