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चर्चित ऐतिहासिक स्थल मामले में आज से रोज सुनवाई: जानिये किन मुद्दों पर होगी बहस; अब न्यायिक प्रक्रिया का अहम चरण

KHULASA FIRST

संवाददाता

06 अप्रैल 2026, 11:09 am
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चर्चित ऐतिहासिक स्थल मामले में आज से रोज सुनवाई

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
धार स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया के अहम चरण में पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में आज से इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू हो रही है, जहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट, साइट की वीडियोग्राफी और पक्षकारों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह सुनवाई मामले के अंतिम निर्णय की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रोजाना सुनवाई की शुरुआत, सभी याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी
सोमवार, 6 अप्रैल से हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में इस संवेदनशील मामले की दैनिक सुनवाई शुरू हो गई है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ दोपहर 2:30 बजे से सभी संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। आज के लिए यह मामला 41वें नंबर पर सूचीबद्ध किया गया है।

पहले सुने जाएंगे याचिकाकर्ता के तर्क
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि सुनवाई की प्रक्रिया चरणबद्ध होगी। पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, उसके बाद आपत्ति दर्ज कराने वाले पक्षों को अपनी दलील रखने का अवसर मिलेगा।

पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ वकीलों की मौजूदगी
सुनवाई के दौरान विभिन्न पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से विष्णु शंकर जैन और विनय जोशी उपस्थित हैं, जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं। आज भी इन्हीं वकीलों द्वारा बहस जारी रहने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: अंतिम निर्णय हाई कोर्ट करेगा
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट किया था कि अंतिम निर्णय अब हाई कोर्ट ही करेगा। शीर्ष अदालत ने कहा था कि ASI की सर्वे रिपोर्ट, साइट की वीडियोग्राफी और सभी पक्षों की आपत्तियों पर विस्तृत विचार हाई कोर्ट में अंतिम सुनवाई के दौरान किया जाएगा।

सभी पक्षों को उपलब्ध करवाई रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया था कि सभी पक्षों को ASI रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा चुकी है और जिन पक्षों ने आपत्तियां दर्ज की हैं, उनकी दलीलों को भी गंभीरता से सुना जाएगा। यदि वीडियोग्राफी के आधार पर कोई नई आपत्तियां सामने आती हैं, तो उन्हें भी न्यायालय में शामिल किया जाएगा।

यह निर्देश भी बरकरार
साथ ही, कोर्ट ने यह निर्देश भी बरकरार रखा कि भोजशाला परिसर के मौजूदा स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश का पालन यथावत जारी रहेगा।

ASI सर्वे रिपोर्ट में ऐतिहासिक पहलुओं का उल्लेख
हाई कोर्ट में प्रस्तुत ASI की सर्वेक्षण रिपोर्ट में भोजशाला परिसर के ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह परिसर 10वीं से 13वीं शताब्दी के दौरान राजा भोज और राजा अर्जुन वर्मन के समय में विकसित हुआ था, जिसके प्रमाण शिलालेखों और संरचनात्मक अवशेषों में मिले हैं।

परिसर में कुल 106 स्तंभ मौजूद
रिपोर्ट में बताया गया है कि परिसर में कुल 106 स्तंभ मौजूद हैं, जिन पर विविध प्रकार की नक्काशी और डिजाइन देखने को मिलती है। इसके अलावा 32 शिलालेख भी पाए गए हैं, जिनमें उस कालखंड की साहित्यिक और सांस्कृतिक झलक मिलती है। इनमें ‘पारिजलमंजरी नाटिका’ और ‘विजयश्री’ जैसे नाटकों के अंशों का उल्लेख भी शामिल है।

मध्यकालीन इतिहास के संकेत भी दर्ज
कुछ शिलालेखों में 14वीं शताब्दी के दौरान मालवा क्षेत्र में मुस्लिम शासन के आगमन का भी उल्लेख मिलता है। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, 1389 ईस्वी में दिलावर खान को दिल्ली से मालवा का राज्यपाल नियुक्त किया गया था, जिसने बाद में धार को अपनी राजधानी बनाकर स्वतंत्र शासन स्थापित किया।

आगे की सुनवाई में अहम बहस की संभावना
ASI रिपोर्ट में दर्ज इन ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर अब कानूनी और ऐतिहासिक दोनों दृष्टिकोणों से गहन बहस होने की संभावना है। सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के माध्यम से इन तथ्यों की व्याख्या करेंगे, जिससे इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा तय हो सकती है।

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