इंदौर से ‘दादा-मालिनी’ की प्रबल दावेदारी: सत्ता के शिखर पर महामंथन मप्र में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल की आहट
KHULASA FIRST
संवाददाता

मंत्रिमंडल विस्तार की बिसात, दिग्गजों की विदाई तय
खुलासा फर्स्ट, भोपाल/इंदौर।
प्रदेश की सियासत के गलियारों में इन दिनों हलचल चरम पर है। वल्लभ भवन से लेकर दिल्ली के सत्ता केंद्रों तक केवल एक ही चर्चा है मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार की। राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया समूहों के बीच अटकलों का बाजार गर्म है कि पल-पल समीकरण बदल रहे हैं।
खबर है कि प्रदेश की कैबिनेट में होने वाले इस बड़े बदलाव के बाद कम से कम दो मंत्रियों का घर बैठना लगभग तय माना जा रहा है। कार्य क्षमता और क्षेत्रीय असंतुलन को देखते हुए आलाकमान सख्त रुख अख्तियार कर सकता है। हालांकि, चर्चा का एक दूसरा पहलू यह भी है कि फिलहाल इस विस्तार पर अघोषित रोक लगा दी गई है और शीर्ष नेतृत्व का पूरा ध्यान फिलहाल महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्तियों पर टिका है, ताकि संगठन की जड़ें और मजबूत की जा सकें, लेकिन जब भी मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की अंतिम मुहर लगेगी तो यह माना जा रहा है कि कम से कम 5 से 6 मंत्रियों के चेहरे बदले जा सकते हैं।
इस संभावित फेरबदल की रेस में मध्यप्रदेश के कई कद्दावर और प्रभावशाली नेताओं के नाम तेजी से सामने आ रहे हैं। इनमें वरिष्ठता के आधार पर गोपाल भार्गव, अर्चना चिटनीस और शैलेंद्र कुमार जैन जैसे अनुभवी नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
वहीं, समीकरणों को साधने के लिए ब्रजेंद्रसिंह यादव, प्रदीप लारिया और हाल ही में पाला बदलकर आए कमलेश शाह के नामों को लेकर भी कयासों का दौर जारी है। इन दिग्गजों की सक्रियता और दिल्ली के दौरों ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।
सबकी नजरें अंतिम सूची पर टिकी
इस पूरी सियासी जंग में सबसे दिलचस्प मोड़ इंदौर से उभरकर सामने आ रहा है। इंदौर की राजनीति के दो बड़े ध्रुव मालिनी गौड़ और रमेश मेंदोला इस बार कैबिनेट की रेस में सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं।
मालिनी गौड़ जहां एक बेहद प्रभावशाली महिला चेहरा हैं और उनके पास लंबे समय का प्रशासनिक अनुभव है, वहीं रमेश मेंदोला का नाम मध्यप्रदेश की राजनीति में रिकॉर्ड पुरुष के रूप में दर्ज है।
मेंदोला लगातार प्रदेश में सबसे अधिक मतों के अंतर से विधायकी का चुनाव जीतते आए हैं। ऐसे में उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच यह मंशा सालों से घर कर गई है कि अब तो दादा को कैबिनेट में बत्ती और उचित सम्मान मिलना ही चाहिए।
समर्थकों का मानना है कि उनकी अजेय लोकप्रियता और संगठन के प्रति समर्पण का फल उन्हें मंत्री पद के रूप में मिलना अब न्यायसंगत होगा। फिलहाल, सबकी नजरें उस अंतिम सूची पर टिकी हैं जो एमपी की नई राजनीतिक तस्वीर को परिभाषित करेगी।
सियासी समीकरण का सार
प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। खराब प्रदर्शन के आधार पर 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की संभावना है, जबकि नए चेहरों की ताजपोशी की तैयारी चल रही है। इस दौड़ में गोपाल भार्गव, अर्चना चिटनीस, शैलेंद्र कुमार जैन और प्रदीप लारिया जैसे दिग्गजों के साथ-साथ इंदौर से मालिनी गौड़ के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। रिकॉर्ड मतों से जीतने वाले दादा के समर्थकों में इस बार भारी उत्साह है। फिलहाल पूरा ध्यान नियुक्तियों पर है, लेकिन बड़े बदलाव के संकेत अब साफ तौर पर मिलने लगे हैं।
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