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युद्ध से कन्फेक्शनरी क्लस्टर पर संकट: 50 लाख की रोजाना सप्लाई घटकर 22 लाख; आधी फैक्टरियां बंद

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 अप्रैल 2026, 11:28 am
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युद्ध से कन्फेक्शनरी क्लस्टर पर संकट

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कच्चे माल और गैस की भारी किल्लत ने इंदौर के कन्फेक्शनरी क्लस्टर को गहरे संकट में डाल दिया है। उत्पादन घटकर 40% रह गया है, जबकि आधी फैक्टरियां बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। इसका सीधा असर मजदूरों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है।

अभूतपूर्व संकट
इंदौर का कन्फेक्शनरी क्लस्टर इन दिनों अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। कच्चे माल की कमी और गैस सप्लाई में आई बाधाओं ने उद्योग की रफ्तार थाम दी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि क्लस्टर की करीब आधी फैक्टरियां बंद हो गई हैं और कई यूनिट्स में काम पूरी तरह ठप है।

सप्लाई और उत्पादन घटा
पहले इस क्लस्टर से रोजाना करीब 50 लाख रुपए का माल सप्लाई होता था, वह अब घटकर सिर्फ 20 से 22 लाख रुपए रह गया है। उत्पादन भी गिरकर 35 से 40 प्रतिशत के बीच सिमट गया है।

गैस आधारित यूनिट बंद
क्लस्टर में संचालित 30 यूनिट्स में से 8 गैस आधारित हैं, जिनमें से 6 पूरी तरह बंद पड़ी हैं। गैस की अनुपलब्धता ने उत्पादन प्रक्रिया को सीधे प्रभावित किया है। वहीं, कच्चे माल की कमी के कारण सप्लाई चेन भी टूट गई है, जिससे तैयार माल बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है।

सरकार ने मांगी स्थिति की रिपोर्ट
औद्योगिक उत्पादन में आई इस गिरावट और रोजगार पर पड़ रहे असर को देखते हुए राज्य सरकार ने औद्योगिक संगठनों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अनुसार, भुगतान संतुलन बिगड़ने से उद्योगों पर पूंजी का संकट गहरा गया है। कच्चे माल और गैस की खरीद के लिए एडवांस पेमेंट करना पड़ रहा है, जिससे नकदी प्रवाह प्रभावित हुआ है।

मजदूरों पर सबसे ज्यादा मार
इस संकट का सबसे ज्यादा असर मजदूर वर्ग पर पड़ा है। काम बंद होने से छंटनी शुरू हो गई है और मजदूरों को वेतन मिलने में भी दिक्कत हो रही है। लेबर कॉन्ट्रैक्टर विशाल यदुवंशी के अनुसार, रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतें बढ़ गई हैं और मजदूरों के लिए 300 रुपए में सिलेंडर भरवाना भी मुश्किल हो गया है।

गैस कनेक्शन प्रक्रियाएं भी प्रभावित
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गैस संकट के चलते ई-केवायसी और नए गैस कनेक्शन से जुड़ी प्रक्रियाएं भी फिलहाल स्थगित कर दी गई हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी मोहनलाल मारू ने इसकी पुष्टि की है।

आगे और गहराने का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल और गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट और गहरा सकता है। इससे न केवल उत्पादन बल्कि रोजगार और बाजार व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका है।

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