प्रेम विवाह के बाद दूसरी शादी पर कोर्ट सख्त: पति की तलाक याचिका खारिज; एफआईआर के आदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर जिला कोर्ट ने बिना तलाक दिए दूसरी शादी करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए उसके खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला प्रेम विवाह के बाद दूसरी शादी और कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
यह है मामला
इंदौर के नंदानगर निवासी नितिन (परिवर्तित नाम), जो पेशे से व्यापारी है, ने अप्रैल 2016 में रीना (परिवर्तित नाम) से प्रेम विवाह किया था। शुरुआती वर्षों में दंपती का जीवन सामान्य रहा, लेकिन संतान न होने के कारण रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगीं। वर्ष 2018 के बाद दोनों अलग रहने लगे। इसी दौरान वर्ष 2021 में नितिन ने पारिवारिक सहमति से सोनम (परिवर्तित नाम) से दूसरी शादी कर ली। बताया जा रहा है कि सोनम को नितिन की पहली शादी की जानकारी थी, इसके बावजूद विवाह संपन्न हुआ।
पहली पत्नी ने जताई आपत्ति, कोर्ट पहुंचा मामला
जब रीना को दूसरी शादी की जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। इसी बीच नितिन ने कोर्ट में तलाक के लिए आवेदन दायर किया, जिसकी सूचना नोटिस के माध्यम से रीना को मिली। रीना ने अपने अधिवक्ता के जरिए कोर्ट में जवाब प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि नितिन ने बिना तलाक लिए ही दूसरी शादी की है। साथ ही यह भी बताया कि नितिन और सोनम का एक बच्चा भी है, जबकि नितिन ने कोर्ट में दूसरी शादी से इनकार किया।
फोटो और दस्तावेज बने अहम सबूत
रीना की ओर से कोर्ट में ठोस साक्ष्य पेश किए गए, जिनमें नितिन और सोनम की शादी के फोटो, बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, अस्पताल और नगर निगम से जुड़े दस्तावेज शामिल थे। इन सबूतों के आधार पर यह स्थापित किया गया कि नितिन ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी की और तथ्य छिपाए।
कोर्ट का सख्त रुख, FIR के आदेश
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद इंदौर जिला कोर्ट ने रीना द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए नितिन की तलाक याचिका खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के तहत FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है IPC की धारा 494?
भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी के जीवित रहते और पहला विवाह वैध होने के बावजूद दूसरा विवाह करता है, तो यह द्विविवाह (बिगैमी) की श्रेणी में आता है। यह अपराध जमानती है, जिसमें अधिकतम 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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