गंदे पानी की बोतल लेकर पहुंचे पार्षद: अपनों को खो चुके परिजन ने लहराई तस्वीरें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम मुख्यालय के अटल सदन में मंगलवार को बजट सत्र के दौरान विकास के दावों के बीच भागीरथपुरा के जख्मों की गूंज सुनाई दी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव जैसे ही अपना चौथा बजट पढ़ने खड़े हुए, विपक्ष ने शहर की दूषित जल व्यवस्था और हाल ही में हुई मौतों को लेकर मोर्चा खोल दिया।
सदन में उस वक्त हंगामा और बढ़ गया जब भागीरथपुरा हादसे में अपनों को खो चुके परिजन भी बजट सम्मेलन में पहुंच गए। उन्होंने दर्शक दीर्घा से मृतकों की तस्वीरें लहराते हुए जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।
इसी गहमागहमी के बीच अचानक सदन की बिजली गुल हो गई और पार्षदों के माइक बंद हो गए, जिसे विपक्ष ने आवाज दबाने की साजिश करार दिया।
बोतल में गंदा पानी और टी-शर्ट पर स्लोगन
सत्र की शुरुआत में ही कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी हाथ में गंदे पानी की भरी बोतल लेकर सदन के बीचोबीच पहुंच गए। उन्होंने एक विशेष टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर जल संकट को लेकर स्लोगन लिखे थे।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि एक तरफ नर्मदा के चौथे चरण के सपने दिखाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता को जहरीला पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
परिजन के आक्रोश और पार्षदों के विरोध के कारण सदन में भारी अफरात-तफरी का माहौल बन गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
‘हत्यारी परिषद’ का संबोधन करने पर टकराव...
बहस के दौरान पार्षद सोनीला मिमरोट ने भागीरथपुरा हादसे का जिक्र करते हुए नगर निगम को हत्यारी परिषद कह दिया। इस शब्द पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने घेराबंदी करते हुए कहा कि जब भी जनता के हक और भागीरथपुरा की बात होती है माइक बंद कर दिए जाते हैं।
उन्होंने पुराने बजट की उन योजनाओं का हिसाब मांगा जो अब तक कागजों से बाहर नहीं आ सकी हैं, जिसमें बिलावली तालाब का कायाकल्प और कान्ह-सरस्वती रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट शामिल हैं।
हंगामे के बीच नौकरी का ऐलान...
भारी विरोध और शोर-शराबे के बीच महापौर ने घोषणा की कि भागीरथपुरा हादसे में जान गंवाने वाले परिवारों के प्रति निगम गंभीर है। पात्रता के आधार पर पीड़ित परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्स के माध्यम से नौकरी दी जाएगी।
महापौर ने स्पष्ट किया कि हमने जनता पर किसी भी तरह का कोई नया कर नहीं लगाया है और न ही पुराने टैक्स में कोई बढ़ोतरी की है। उन्होंने रिकॉर्ड 1086 करोड़ का राजस्व देने वाली इंदौर की जनता का आभार भी माना।
अधूरे प्रोजेक्ट्स पर घेरा
विपक्ष ने मास्टर प्लान की सड़कों और जल संरक्षण के लिए पिछले बजट में तय की गई राशि पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि आरई-2 और एमआर-4 जैसी महत्वपूर्ण सड़कें अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
सदन में वंदे मातरम के साथ शुरू हुई बैठक अंत तक विवादों में घिरी रही, जहां एक ओर सत्ता पक्ष ने इसे भविष्य का रोडमैप बताया, वहीं विपक्ष ने इसे बुनियादी समस्याओं और मानवीय संवेदनाओं से ध्यान भटकाने वाला दस्तावेज करार दिया।
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