पार्षद रूबीना इकबाल ने बंद किया मोबाइल: आरोप- संघ और हिंदू संगठनों के लोग फोन कर बोल रहे- वंदे मातरम्; लगातार कॉल से परेशान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता जा रहा है। कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने लगातार आ रहे फोन कॉल्स से परेशान होकर अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया है। उनका आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) और अन्य हिंदू संगठनों के लोग उन्हें बार-बार कॉल कर ‘वंदे मातरम्’ बोलने के लिए कह रहे हैं।
लगातार कॉल से बढ़ी परेशानी
रुबीना इकबाल के बेटे शाहबाज के अनुसार, उनका मोबाइल नंबर विभिन्न ग्रुप्स में शेयर कर दिया गया है, जिसके बाद हर कुछ मिनट में कॉल आ रहे थे। कॉल करने वाले लोग उनसे ‘वंदे मातरम्’ बोलने को कह रहे थे। लगातार हो रही इस स्थिति से परेशान होकर उन्हें फोन स्विच ऑफ करना पड़ा। फिलहाल वह अपने बेटे के मोबाइल के जरिए ही संपर्क में हैं।
बयान के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला 8 अप्रैल को नगर निगम के बजट सत्र से शुरू हुआ। इसी दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के बयान पर विवाद खड़ा हुआ था। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार करते हुए कहा था कि यह अनिवार्य नहीं है।इसके बाद रुबीना इकबाल खान भी विवाद में कूद पड़ीं और उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोई उन्हें जबरदस्ती ‘वंदे मातरम्’ बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। उनके इस बयान के बाद विवाद और बढ़ गया।
हिंदू संगठनों का विरोध तेज
इस मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। इससे पहले हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट करते हुए फौजिया शेख अलीम के खिलाफ इनाम की घोषणा भी की थी।
निगम सत्र में हुआ था टकराव
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब नगर निगम के सत्र में फौजिया शेख देरी से पहुंचीं। इस पर भाजपा पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने टिप्पणी की, जिसके जवाब में फौजिया ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें सदन से बाहर कर दिया गया।
कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
मामले के तूल पकड़ने के बाद भाजपा ने दोनों पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और शिकायत दर्ज कराई। वहीं कांग्रेस संगठन ने भी सख्ती दिखाते हुए रुबीना इकबाल को पार्टी से निष्कासित करने के लिए भोपाल में पत्र भेज दिया है। साथ ही पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है।
कोर्ट तक पहुंचा मामला
इस विवाद ने कानूनी रूप भी ले लिया है। जिला अदालत में दोनों पार्षदों के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि उनके बयान धार्मिक वैमनस्य फैलाने वाले हैं। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर शहर का राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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