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प्रमोटी IAS पर फिर घिरा विवाद: प्रमोशन पर उठे सवाल; मुख्यमंत्री ने खुद किया खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

26 फ़रवरी 2026, 1:28 pm
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प्रमोटी IAS पर फिर घिरा विवाद

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
ब्राह्मण समाज को लेकर हालिया टिप्पणी के बाद प्रमोटी आईएएस संतोष वर्मा एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बयान के बाद उनकी पुरानी फाइल दोबारा खुल गई है और उनके आईएएस बनने की प्रक्रिया को लेकर सवाल मध्य प्रदेश विधानसभा तक पहुंच गया है। मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में स्थिति स्पष्ट की है।

कांग्रेस विधायक कटारे ने उठाए थे सवाल
अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने विधानसभा में पूछे गए सवाल में संतोष वर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर, वर्ष 2020 में हुए प्रमोशन और लगाए गए सर्टिफिकेट्स को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी थी। कटारे ने यह भी पूछा था कि यदि सर्टिफिकेट कूटरचित थे तो सरकार ने वर्मा के खिलाफ तत्काल आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की।

मुख्यमंत्री ने बताया प्रमोशन का आधार
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि 6 अक्टूबर 2020 को न्यायालय द्वारा संतोष वर्मा को दोषमुक्त किए जाने का आदेश पारित किया गया था। वर्मा ने यह आदेश विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) के समक्ष प्रस्तुत किया था। इस आदेश की सत्यता की पुष्टि के लिए इसकी प्रति इंदौर पुलिस के एडीजी को भेजी गई थी।

इसके बाद 16 अक्टूबर 2020 को इंदौर आईजी द्वारा जिला लोक अभियोजन अधिकारी से अभिमत लिया गया, जिसमें आदेश को वैध बताया गया और उसके खिलाफ अपील का कोई आधार नहीं पाया गया। इसी आधार पर संतोष वर्मा को आईएएस पद पर पदोन्नति दी गई।

2021 में शिकायत के बाद बदली स्थिति
मुख्यमंत्री ने बताया कि अप्रैल 2021 में फरियादी महिला ने मुख्य सचिव को शिकायत देकर कोर्ट आदेश की प्रति को फर्जी बताया। इसके बाद पुलिस द्वारा जांच कराई गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर 10 जुलाई 2021 को संतोष वर्मा को गिरफ्तार किया गया और 13 जुलाई 2021 को उन्हें निलंबित कर दिया गया।

अगस्त 2021 में आरोप पत्र दाखिल कर विभागीय जांच शुरू की गई। आगे की कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को भी पत्र भेजा गया है।

2016 से जुड़ा है पूरा विवाद
संतोष वर्मा के खिलाफ वर्ष 2016 में इंदौर के लसूड़िया थाना में महिला संबंधी आरोपों में मामला दर्ज हुआ था। प्रकरण की सुनवाई के दौरान अक्टूबर 2020 में न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत की अदालत से दो अलग-अलग आदेश सामने आए-एक में राजीनामा और दूसरे में दोषमुक्ति का उल्लेख था।

बाद में न्यायाधीश रावत ने एमजी रोड थाना में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ फर्जी कोर्ट आदेश तैयार करने का मामला दर्ज कराया। इन्हीं आदेशों के आधार पर संतोष वर्मा को पदोन्नति मिली थी।

फिर चर्चा में आई पुरानी फाइल
हालिया विवाद के बाद पुलिस ने मामले की जांच दोबारा तेज कर दी है। कोर्ट ने संतोष वर्मा को हस्ताक्षर के नमूने देने के निर्देश दिए हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या फर्जी आदेश तैयार करने में उनकी कोई भूमिका थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि संतोष वर्मा और न्यायाधीश रावत के बीच पूर्व में संपर्क रहा है। फिलहाल, मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी तथ्यों की गहनता से पड़ताल कर रही है।

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