प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक कॉलेज में संविधान संशोधन को लेकर गहराया विवाद: यह शब्द बन गया विवाद की जड़; किसे अधिकारों पर उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक डेली कॉलेज में प्रस्तावित संविधान संशोधन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह संशोधन में जोड़ा गया “Preferably” शब्द है, जिससे ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन यानी ओडीए के अधिकारों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अभी होते हैं 9 सदस्य
डेली कॉलेज बोर्ड में अभी 9 सदस्य होते हैं, जिनमें से 5 सदस्य चुनाव के जरिए चुने जाते हैं। लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार बोर्ड के सदस्यों की संख्या 10 हो जाएगी, जबकि निर्वाचित सदस्यों की संख्या घटकर सिर्फ 3 रह जाएगी। इससे चुनाव आधारित प्रतिनिधित्व 55% से घटकर करीब 30% रह जाएगा।
सबसे बड़ा बदलाव इस कैटेगरी में
सबसे बड़ा बदलाव ओल्ड डेलियंस कैटेगरी में किया गया है। पहले ओडीए के सदस्य सीधे वोटिंग करके अपने प्रतिनिधि चुनते थे, लेकिन अब प्रस्ताव है कि ओडीए के प्रेसिडेंट और सचिव ही बोर्ड में शामिल होंगे। साथ ही “Preferably” शब्द जोड़कर यह भी खुला रखा गया है कि उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति को भी शामिल किया जा सकता है। इसी को लेकर मनमानी और पक्षपात की आशंका जताई जा रही है।
मतदान अधिकार कमजोर होंगे
ओडीए का कहना है कि इससे उनके हजारों सदस्यों के मतदान अधिकार कमजोर होंगे। उनका स्पष्ट मत है कि प्रतिनिधि चुनने का अधिकार ODA के सदस्यों के पास ही रहना चाहिए। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए ओडीए जल्द ही एक असाधारण साधारण सभा बुलाने की तैयारी में है।
विवाद और गहरा गया
इस बीच, डेली कॉलेज बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाए जाने और संशोधन प्रस्ताव को रजिस्ट्रार के पास मंजूरी के लिए भेजने से भी विवाद और गहरा गया है। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन संशोधनों को लागू करने की कोशिश पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले को और संवेदनशील बना दिया
विवाद के बीच वॉइस ऑफ डीसी नाम से एक सोशल मीडिया पेज और उससे जुड़ी एफआईआर ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। कुछ पूर्व छात्रों ने एफआईआर के खिलाफ प्रदर्शन भी किया, जबकि दूसरी ओर एक वर्ग प्रबंधन के समर्थन में भी खड़ा है।
संशोधन पूरी तरह कानूनी
कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि संशोधन पूरी तरह कानूनी है और संरचना को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। वहीं विरोध कर रहे पूर्व छात्र इसे अधिकारों में कटौती और मनमानी का प्रयास बता रहे हैं।
इनकी बातों पर कीजिये गौर
ओडीए (ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन)
ओडीए के प्रेसिडेंट पंकज बागड़िया के अनुसार संगठन जल्द ही असाधारण साधारण सभा बुला रहा है। इस बैठक में प्रस्तावित संशोधनों का ओडीए के हितों पर क्या असर पड़ेगा, इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और सर्वसम्मति से आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बोर्ड प्रबंधन
डेली कॉलेज बोर्ड के प्रेसीडेंट विक्रम पंवार का कहना है कि प्रबंधन हर मंच पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखें। उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधन पूरी तरह कानूनी हैं और इन्हें सरकारी मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है।
‘डबल इलेक्शन’ व्यवस्था खत्म होगी
प्रेसीडेंट विक्रम पंवार ने यह भी स्पष्ट किया कि इन बदलावों से ओडीए में ‘डबल इलेक्शन’ व्यवस्था खत्म होगी, लेकिन पूर्व छात्रों के वोटिंग अधिकार समाप्त नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि संस्थागत संरचना को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
विरोध करने वाले ओल्ड डेलियंस
विरोध कर रहे पूर्व छात्रों का आरोप है कि यह बोर्ड की मनमानी है। उनका कहना है कि एफआईआर दर्ज कराना असहमति की आवाज दबाने का तरीका है। वहीं, पूर्व छात्रों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए हैं। एक समूह संशोधन का विरोध कर रहा है, जबकि दूसरा समूह संस्था की छवि खराब करने वालों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
मनमाने तरीके से संविधान संशोधन
बोर्ड के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे संदीप पारेख का कहना है कि अगस्त 2025 में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सभी कैटेगरी के सदस्यों को शामिल कर एजीएम आयोजित की जाए। हालांकि, उनके अनुसार बोर्ड ने इस आदेश पर स्टे ले लिया और अब मनमाने तरीके से संविधान संशोधन किया जा रहा है।
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