ठेका खत्म फिर भी अवैध होडिंग पर लग रहे विज्ञापन
KHULASA FIRST
संवाददाता

एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने जताई आपत्ति, इसके बाद भी निगम अफसर नहीं कर रहे कार्रवाई
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम अफसरों की मेहरबानी से विज्ञापन कंपनियां ठेका खत्म होने के बाद भी धड़ल्ले से विज्ञापन लगाकर कमाई कर रही हैं। जबकि निगम अफसर नए ठेेकेदार की तलाश के नाम पर बार-बार टेंडर जारी करने का खेल रच रहे हैं।
निगम अफसरों की मिलीभगत से ही नगर निगम के 44 जेंट्री गेट और 3 पैदल पुलों का ठेका दो साल पहले खत्म हो जाने के बाद भी यहां मुफ्त में विज्ञापन लग रहे हैं। इस बीच निगम ने दो बार टेंडर निकाले, लेकिन कोई ठेकेदार आगे नहीं आया।
अब तीसरा टेंडर जारी किया गया है, जिसमें साढ़े छह करोड़ रुपए की मांग रखी गई है। इस तरह निगम अफसरों की मेहरबानी से विज्ञापन कंपनी ठेका खत्म होने के बाद भी विज्ञापन लगाकर कमाई करने में जुटी हुई है।
निगम अफसरों की मेहरबानी से शहर भर में यूनिपोल और लालीपोल का जाल बिछ गया है। इसके चलते दीपक एडवरटाइजिंग विज्ञापन कंपनी सहित जिन कंपनियों ने ठेके लिए उन्होंने खुलकर नियमों की अनदेखी करते हुए मनचाहे स्थानों पर अवैध यूनिपोल खड़े कर दिए।
इससे विज्ञापन कंपनी की तो कमाई बढ़ गई, लेकिन शहरवासियों की सुरक्षा को खतरा बढ़ गया। विज्ञापन कंपनियों को सड़क के डिवाइडर, फुटपाथ और चौराहों पर यूनिपोल नहीं लगाने की शर्त के साथ निगम ने ठेका दिया था।
लेकिन ठेका मिलते ही विज्ञापन कंपनियों ने मनमानी करते हुए शहर के डिवाइडर, फुटपाथ, चौराहे और ब्रिज पर करीब 48 अवैध यूनिपोल खड़े कर दिए। इस मामले में निगम के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि अदालत ने अवैध यूनिपोल की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इसके चलते विज्ञापन कंपनियों के यूनिपोल की जांच की जा रही है। हालांकि, निगम अफसर अब तक कई बार जांच कर चुके हैं, लेकिन मामला फाइलों में दबा रह जाता है। इस बार तो निगम जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने भी विज्ञापन कंपनी की शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
इसके चलते महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दीपक एडवरटाइजिंग सहित सभी विज्ञापन कंपनियों की जांच कर कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन निगम अफसरों की मेहरबानी से विज्ञापन कंपनियों के खिलाफ जांच जोर नहीं पकड़ पा रही है।
यही वजह है कि कार्रवाई नहीं होती है। निगम अफसरों की मिलीभगत का फायदा उठाकर ही विज्ञापन कंपनियां करीब दो साल पहले ठेका खत्म होने के बाद भी 44 जेंट्री गेट और 3 पैदल पुल पर विज्ञापन लगाकर कमाई करने में जुटी हुई है। फिर भी निगम अफसर मूक दर्शक बने हुए है।
चौराहों और ब्रिज पर विशालकाय विज्ञापन बोर्ड, बन सकते है हादसे का कारण
निगम अफसरों की मिलीभगत से विज्ञापन कंपनियों द्वारा मेट्रो ट्रेन के डिवाइडर पर भी विज्ञापन लगा दिए गए। इस बात का खुलासा जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने जांच के बाद किया। राठौर की नाराजगी के बाद मेट्रो के डिवाइडर से विज्ञापन तो हट गए, लेकिन किसी भी कंपनी पर कार्रवाई नहीं हुई।
इसी तरह शहर के चौराहों और ब्रिज पर विशालकाय विज्ञापन बोर्ड लग गए हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं, लेकिन निगम अफसर ऐसे विज्ञापन बोर्ड की अनदेखी कर रहे हैं। इसके चलते ही मेट्रो टावर चौराहा, भंवरकुआ चौराहा, विजय नगर चौराहा, शास्त्री ब्रिज, जूनी इंदौर ब्रिज आदि स्थानों पर विशालकाय विज्ञापन बोर्ड की भरमार है।
एलईडी स्क्रीन की भी समय सीमा खत्म
स्मार्ट सिटी द्वारा शहर में एलईडी स्क्रीन लगाई गई है, जिस पर विज्ञापन दिखता है। बताया जाता है कि इसके टेंडर की भी समय सीमा पहले ही पूरी हो चुकी है। इसके बाद भी शहर में 5-6 हजार एलईडी स्क्रीन और लगाने की तैयारी है।
शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाई गई एलईडी दुर्घटना का खुला आमंत्रण दे रहे हैं। इन एलईडी पर एमआईसी सदस्य आपत्ति जता चुके हैं, लेकिन निगम अफसर महापौर के आदेश के बाद भी कार्रवाई करने से बच रहे हंै।
अब तक कार्रवाई नहीं
बताया जाता है कि मप्र नगर निगम अधिनियम तथा मप्र आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम 2017 के अनुसार डिवाइडर, फुटपाथ पर विज्ञापन बोर्ड लगाना प्रतिबंधित है, इसके बाद भी शहर के सेंट्रल डिवाइडर, फुटपाथों, ट्रेफिक सिग्नल के पास, ऐतिहासिक धरोहरों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के आसपास अवैध यूनिपोल लगाकर विज्ञापन किए जा रहे हैं। निगम को इस तरह की शिकायतें भी मिली हैं। लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं की गई।
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