दूषित पानी कांड: इतनी मौतों की जांच पूरी; रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश,अब होगा जिम्मेदारों का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच पूरी हो गई है। इस मामले में गठित एक सदस्यीय जांच आयोग ने 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश कर दी है।
रिपोर्ट फिलहाल सीलबंद लिफाफे में है। हाईकोर्ट ही तय करेगा कि इसे कब खोला जाएगा और इसकी कॉपी कब उपलब्ध कराई जाएगी।
भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान दूषित पानी की वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए थे। इस घटनाक्रम में 36 लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 27 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था।
आयोग ने इंदौर नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA), जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित विभागों से दस्तावेज जुटाए।
इसके अलावा आम लोगों से भी लिखित बयान आमंत्रित किए गए। इन सभी तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।
सीलबंद लिफाफे में 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट
जांच आयोग की रिपोर्ट 600 से ज्यादा पन्नों की बताई जा रही है। इसे हाईकोर्ट में जमा करा दिया गया है और फिलहाल रिपोर्ट पूरी तरह सीलबंद है।
मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को संभावित है। अब हाईकोर्ट की बेंच यह तय करेगी कि रिपोर्ट को कब खोला जाए, उसके निष्कर्ष किस तरह सामने रखे जाएं और रिपोर्ट की प्रतियां संबंधित पक्षों को कब उपलब्ध कराई जाएं।
अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक की भूमिका जांची
संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया। आयोग ने जल प्रदूषण की वजह और घटना के दौरान प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही के साथ-साथ विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की।
जांच के दायरे में आईएएस अधिकारियों से लेकर नगर निगम के अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों तक की भूमिका शामिल रही। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला की भूमिका को लेकर भी जांच की गई है।
अब रिपोर्ट सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि आयोग ने किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को जिम्मेदार माना है और किस स्तर पर लापरवाही सामने आई है।
दो IAS अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर
जांच रिपोर्ट को तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव और तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया की भूमिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दोनों अधिकारियों की उस समय की जिम्मेदारियों और घटनाक्रम के दौरान प्रशासनिक स्तर पर लिए गए फैसलों की भी जांच की गई है।
इसके अलावा कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव और पार्षद कमल वाघेला सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इस पर नजर रहेगी।
सरकार ने अभी तक दूषित पानी से मौतों को लेकर मुआवजा नहीं दिया
भागीरथपुरा कांड में मौतों को दूषित पानी से जोड़कर मुआवजा दिए जाने का मुद्दा भी अहम है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इन मौतों को दूषित पानी से हुई मौत मानते हुए मुआवजे की राशि तय नहीं की गई है।
फिलहाल रेडक्रॉस की ओर से प्रभावित लोगों को इलाज के लिए दो लाख रुपए की सहायता दिए जाने की जानकारी है। अब जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
आयोग ने इन प्रमुख बिंदुओं पर की जांच
जांच आयोग ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर तथ्य जुटाए और जांच की।
-भागीरथपुरा में जल दूषित होने का वास्तविक कारण क्या था?
-क्या क्षेत्र में सप्लाई किया गया पानी वास्तव में दूषित था?
-पानी के दूषित होने का स्रोत और प्रकृति क्या थी?
-क्या सीवेज का पानी सप्लाई लाइन में मिला, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था?
-दूषित पानी से कितने लोगों की मौत हुई?
-दूषित पानी के कारण कौन-कौन सी बीमारियां हुईं?
-घटना के लिए प्रथम दृष्टया कौन से अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार पाए गए?
-प्रभावित परिवारों को कितना और किस आधार पर मुआवजा दिया जाना चाहिए?
-भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
25 अगस्त की सुनवाई पर टिकी नजर
600 से ज्यादा पन्नों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश होने के बाद अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर है। रिपोर्ट अभी सीलबंद होने के कारण उसके निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं। ऐसे में 25 अगस्त की संभावित सुनवाई में हाईकोर्ट रिपोर्ट को लेकर क्या निर्देश देता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के लिए आयोग ने किन लोगों की जिम्मेदारी तय की है और मृतकों के परिजनों तथा प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर क्या सिफारिश की गई है।
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