महापौर का इस्तीफा मांगने सड़क पर उतरी कांग्रेस: शहर का पानी जहरीला होने का दावा
KHULASA FIRST
संवाददाता

‘केयर बडी’ में बिक रहा निगम का पानी
जनता प्यासी और अवैध कमाई का काला खेल
रिद्धि-सिद्धि सर्विस कैटरर्स और रिया चिल्ड वाटर में चलाया जा रहा है अवैध कारोबार
40000 जमा किए, फिर भी शालीमार बंगलो प्यासा
अब केवल जरूरत नहीं... झगड़े और हिंसा की वजह बनता जा रहा है जलसंकट
आम जनता प्यासी, एमजी हेक्टर शोरूम में पानी की हो रही बर्बादी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गहराते जलसंकट को लेकर मंगलवार को कांग्रेस ने राजवाड़ा पर प्रदर्शन और आमसभा की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, बाला बच्चन, महिला प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी, शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने खाली मटके लेकर राजवाड़ा से नगर निगम मुख्यालय तक रैली निकाली और मुख्यालय के गेट के सामने मटके फोड़कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान शहर के मध्य क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि इंदौर को ‘वाटर सिटी’ व स्वच्छता में नंबर वन का तमगा मिला था, आज वही शहर पानी को तरस रहा है। पटवारी ने दावा किया कि सप्लाई हो रहे पानी का 90 प्रतिशत हिस्सा दूषित है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने विपक्ष का दायित्व निभाते हुए शहर के 30 वार्डों में पानी के सैंपलों की लैब के माध्यम से जांच कराई है, जिसकी रिपोर्ट तीन दिन में सार्वजनिक की जाएगी।
उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को चुनौती देते हुए कहा कि यदि रिपोर्ट गलत हो तो वे किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने महापौर को ‘एक्सीडेंटल महापौर’ करार देते हुए भाजपा पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने कहा इंदौर में भाजपा के नौ विधायक, सांसद और महापौर होने के बावजूद जनता पानी के लिए प्यासी है और गंदा पानी पीने को मजबूर है।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने ‘महापौर पानी दो, पानी नहीं दे सकते तो इस्तीफा दो’ के नारे लगाए।
प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
पटवारी ने कहा कि इंदौर विपक्ष विहीन है, जिसका फायदा उठाकर भाजपा जनता की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गली-गली जाकर जनता की समस्याओं को उठाएं और इस कुशासन के खिलाफ संगठित होकर बदलाव के लिए तैयार रहें।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और नगर निगम मुख्यालय पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। यह प्रदर्शन अब शहर की राजनीति में जल संकट को केंद्र बिंदु बना चुका है, क्योंकि शहर की कई बस्तियों और कॉलोनियों में अभी भी टैंकरों के भरोसे ही पानी की आपूर्ति हो रही है।
अब सबकी निगाहें कांग्रेस द्वारा जारी की जाने वाली उस विस्तृत लैब रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो शहर की पेयजल व्यवस्था की हकीकत को सबके सामने लाएगी।
विजय नगर इलाके में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। जोन 05, वार्ड 27 का नगर निगम पानी का टैंकर अपने निर्धारित क्षेत्र को छोड़कर विजय नगर स्थित केयर बडी अस्पताल में पानी बेच रहा है।
जहां आम जनता पानी के लिए परेशान है, वहीं निगम के टैंकर का उपयोग अवैध कमाई के लिए किया जा रहा है। खुलासा फर्स्ट के एक जागरूक पाठक ने वीडियो उपलब्ध कराया है जिसमें स्पष्ट प्रमाण है कि टैंकर (क्रमांक एमपी 19 जीए 2695) के माध्यम से सरकारी पानी को निजी अस्पताल में खाली कराया जा रहा है, जो प्रशासनिक मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
एक तरफ निगम प्रशासन पानी की समस्या दूर करने के दावे कर रहा है तो दूसरी तरफ विभाग के कर्मचारी और टैंकर माफिया मिलकर इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं।
विजय नगर क्षेत्र के नागरिक जब पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं तब सरकारी टैंकरों का निजी अस्पताल में पानी बेचना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
यह स्थिति महज पानी की चोरी नहीं, बल्कि इंदौर की जनता के साथ किया गया क्रूर मजाक और सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग है।
जिम्मेदार अधिकारियों की इस पूरे मामले पर चुप्पी उनकी संलिप्तता को पुख्ता करती है। शहर के लोग इस माफिया राज के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
नगर निगम जोन 18 में सरकारी टैंकरों से दुकानों पर हो रही सप्लाई
नगर निगम के जोन 18 के अंतर्गत जनता के लिए संचालित पानी के टैंकरों का खुलेआम व्यावसायिक दुरुपयोग हो रहा है। लोहामंडी रोड स्थित अग्रसेन चौराहे के पास रिद्धि सिद्धि सर्विस कैटरर्स और रिया चिल्ड वाटर जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नगर निगम के टैंकर रोजाना दो बार पहुंचकर पानी की सप्लाई कर रहे हैं।
जागरूक नागरिकों द्वारा जुटाए गए प्रमाणों से स्पष्ट है कि सरकारी टैंकरों का पानी इन दुकानों पर खाली किया जाता है, जहां से इसे केन में भरकर खुले बाजार में बेचा जा रहा है।
सरकारी पानी का अवैध भंडारण
इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के भीतर जमीन के अंदर बड़े टैंक भी बनाए गए हैं, जिनमें सरकारी पानी का अवैध भंडारण किया जाता है। एक तरफ क्षेत्र की जनता पानी की भारी किल्लत से जूझ रही है, वहीं दूसरी तरफ जोन 18 के जिम्मेदार अधिकारियों की लचर मॉनिटरिंग के चलते सरकारी संसाधनों का निजी लाभ के लिए दोहन हो रहा है।
करदाताओं के पैसे से संचालित इस सेवा का व्यावसायिक उपयोग सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जिससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
15 साल का इंतजार: भीषण गर्मी में परेशान हैं 150 घरों के रहवासीे
शहर के सुखलिया क्षेत्र स्थित शालीमार बंगलो कॉलोनी में पानी का संकट इस कदर गहरा गया है कि रहवासी बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। कॉलोनी के 150 बंगलों में रहने वाले करीब 500 लोग 15 वर्षों से नर्मदा जल का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन तमाम प्रयासों और आश्वासनों के बावजूद यह सपना अधूरा है।
रहवासियों ने बताया कि 15 साल पहले नगर निगम में नर्मदा पाइप लाइन बिछाने के लिए 40 हजार रुपये की राशि जमा की गई थी। तब से लेकर आज तक क्षेत्र के कई पार्षद और जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन पाइप लाइन का जाल आज भी कॉलोनी से कुछ दूरी पर आकर थम गया है।
कॉलोनी की एकमात्र लाइफ लाइन बोरिंग ने भी दम तोड़ा
भीषण गर्मी के इस दौर में कॉलोनी की एकमात्र लाइफलाइन बोरिंग भी अब दम तोड़ चुका है। पानी का स्तर गिर जाने से बोरिंग सूख गया है। जिसके चलते रहवासियों के सामने पेयजल का भीषण संकट खड़ा हो गया है।
स्थिति यह है कि रहवासी हर दिन 15 से 20 हजार रुपये खर्च करके निजी टैंकर मंगवाने को मजबूर हैं। स्थानीय रहवासी संघ के अध्यक्ष अशोक खंडेलवाल के अनुसार, यदि टैंकरों के जरिए पानी की व्यवस्था न की जाए, तो दैनिक दिनचर्या पूरी तरह ठप हो जाएगी।
वर्तमान में पार्षद मनोज मिश्रा और एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर द्वारा भी टैंकरों के माध्यम से मदद पहुंचाई जा रही है, लेकिन यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है।
रहवासियों ने देर रात विधायक रमेश मेंदोला से की मुलाकात... पानी की गंभीर समस्या से त्रस्त रहवासियों ने देर रात क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदोला से मुलाकात की।
इस दौरान अशोक खंडेलवाल, डॉ. हेमंत जोशी, विवेक उपाध्याय, जयंत झाला, जोसेफ थामस, धर्मेंद्र त्रिपाठी, डॉ. दिनेश सिंह, किशोर सोमवंशी, आर. बी. यादव, गोविंद जोशी, शांति श्री लक्ष्मीपति, एतल झाला, कोमल गंगराड़े और नेता देशमुख सहित बड़ी संख्या में रहवासी मौजूद थे।
रहवासियों ने विधायक को बताया कि सरकारी अड़चनों के कारण नर्मदा लाइन अब तक उनके घरों तक नहीं पहुंची है।
कहीं पानी के लिए बाल्टी चली तो कहीं पत्थर
इंदौर में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। पानी अब सिर्फ जरूरत नहीं, झगड़े और हिंसा की वजह बनता जा रहा है। कहीं मोटर से पानी भरने को लेकर महिलाओं में मारपीट हो गई, तो कहीं सरकारी बोरिंग पर पानी भरने पहुंचे लोगों के बीच गालियां और थप्पड़ चल गए।
जूनी इंदौर में तो पीने के पानी से ऑटो धोने से रोकने पर युवक का सिर पत्थर मारकर फोड़ दिया गया। वहीं बेटमा में सामुदायिक भवन के लिए रखा पानी का टैंकर ही चोरी हो गया।
एमआईजी थाना क्षेत्र की सोमनाथ की नई चाल में हनुमान मंदिर के पास गुड्डू नामक बदमाश ने पानी भरने को लेकर विवाद के दौरान महिला के साथ मारपीट कर दी।
रहवासियों के मुताबिक आरोपी आए दिन पानी भरने वाली महिलाओं से विवाद करता है। इस बार उसने महिला पर हाथ उठा दिया। गुड्डू सूदखोर है और क्षेत्र में एक पार्षद का नाम लेकर लोगों पर दबाव बनाता है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
इसी थाना क्षेत्र के जगजीवन राम नगर में पानी भरने को लेकर घर के अंदर विवाद हिंसा में बदल गया। फरियादी मनीष वर्मा ने पुलिस को बताया कि भाई की पत्नी ममता पानी भरने पहुंची थी।
इसी दौरान पड़ोसी महिला लक्ष्मी ने गालियां देना शुरू कर दीं और गुस्से में बाल्टी उठाकर ममता के सिर पर दे मारी। हमले में महिला घायल हो गई।
उधर, बाणगंगा थाना क्षेत्र के कुमेड़ी कांकड़ में सरकारी बोरिंग पर पानी भरने को लेकर झगड़ा हो गया। जान्हवी तिवारी के मुताबिक टीना चौहान ने उस पर पानी बबाज़्द करने का आरोप लगाया और देखते ही देखते विवाद गाली-गलौच व मारपीट में बदल गया।
आरोप है कि टीना ने झूमाझटकी की, जबकि उसका पति राजू चौहान मारपीट करने लगा। जूनी इंदौर क्षेत्र में तो पानी को लेकर विवाद खूनी रूप ले बैठा। राजू ओमजारे प्याऊ पर पानी भरने पहुंचे थे।
वहां ऑटो चालक पीने के पानी से ऑटो के टायर धो रहा था। विरोध करने पर आरोपी गालियां देने लगा, फिर पत्थर उठाकर राजू के सिर पर दे मारा। हमले में वह घायल हो गए।
वहीं, बेटमा थाना क्षेत्र के ग्राम सेजवानी में बदमाश सामुदायिक भवन निर्माण स्थल से पानी का टैंकर ही चुरा ले गए। ग्राम पंचायत सरपंच नारायणसिंह सुनेर ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है।
नगर निगम के नियम केवल गरीबों के लिए, बड़े शोरूमों पर क्यों मेहरबान है प्रशासन?
शहर भीषण जलसंकट की चपेट में है। प्यासी जनता पानी के लिए जद्दोजहद कर रही है, लेकिन एबी रोड स्थित अनूप नगर में एमजी हेक्टर शोरूम प्रशासन के जल संरक्षण के दावों को सरेआम कुचल रहा है।
नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने पानी की बर्बादी रोकने और अवैध सर्विस सेंटरों को सील करने की हुंकार क्या भरी, यह शोरूम मानो उस आदेश को चुनौती दे रहा है।
शोरूम की वर्कशॉप के बाहर सड़क पर गाड़ियों की धुलाई का जो खेल दिन-रात चल रहा है, वह शहर के जल संसाधनों के प्रति एमजी हेक्टर की आपराधिक लापरवाही और बेशर्मी का जीवंत सबूत है।
हकीकत यह है कि जब शहर का आम नागरिक पानी की एक बाल्टी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, तब एमजी हेक्टर के कर्मचारी घंटों तक पाइप लगाकर सड़कों पर गाड़ियां धो रहे हैं।
यह सिर्फ गाड़ियों की धुलाई नहीं, बल्कि शहर के नागरिकों के हक के पानी की सीधी लूट है। इस पूरे खेल में नगर निगम प्रशासन की भूमिका भी अत्यंत संदिग्ध और लचर दिखाई देती है।
निगम के जिम्मेदार अधिकारी अक्सर छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई का ढिंढोरा तो खूब पीटते हैं, लेकिन जब बात एमजी हेक्टर जैसे बड़े शोरूम की आती है, तो उनकी सारी सक्रियता गायब हो जाती है।
वीडियो फुटेज और तस्वीरों में कैद पानी की बर्बादी
क्या नगर निगम के पास इन बड़े शोरूमों की करतूतें देखने के लिए हिम्मत नहीं बची है? शोरूम के बाहर हो रही जल की यह बर्बादी वीडियो फुटेज और तस्वीरों में स्पष्ट कैद है, फिर भी निगम प्रशासन की ओर से कोई भी ठोस कदम न उठाया जाना उनकी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
यदि एमजी हेक्टर के पास पानी का इतना भंडार है, तो नगर निगम का जल विभाग उसे जब्त करके शहर की उन प्यासी बस्तियों तक क्यों नहीं पहुंचा रहा, जहां टैंकरों का भी अकाल पड़ा है?
निगम की चुप्पी सीधे रसूखदारों के प्रति झुकाव
निगम की यह चुप्पी सीधे तौर पर प्रशासन की कायरता और रसूखदारों के प्रति उनके झुकाव को दर्शाती है। जनता अब यह समझने लगी है कि निगम के नियम सिर्फ गरीबों और छोटे व्यापारियों को प्रताड़ित करने के लिए हैं।
एमजी हेक्टर जैसी संस्थाओं को दी गई यह खुली छूट निगम की साख को पूरी तरह धूमिल कर रही है। अब शहर की जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। क्या निगम कमिश्नर सिंघल में वाकई इतना साहस है कि वे एमजी हेक्टर के शोरूम को सील कर एक मिसाल कायम कर सकें, या फिर यह वीआईपी लूट शहर की प्यास पर ऐसे ही डाका डालती रहेगी?
प्रशासन का मौन अब उनकी मिलीभगत का प्रमाण बनता जा रहा है। नगर निगम प्रशासन की यह चुप्पी केवल रसूख के कारण है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ी आर्थिक साठगांठ है?
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