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कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त: देर रात विधानसभा पहुंचे प्रमुख सचिव; आदेश किया जारी, इस मामले में लिया एक्शन

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 अप्रैल 2026, 12:30 pm
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कांग्रेस विधायक की सदस्यता समाप्त

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुरुवार देर रात प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा विधानसभा पहुंचे और सचिवालय खोलकर उनकी सीट रिक्त घोषित करने का पत्र चुनाव आयोग को भेजने की कार्रवाई शुरू की गई।

देर रात खुला विधानसभा सचिवालय
घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व विधायक पीसी शर्मा भी देर रात विधानसभा पहुंचे। दोनों नेताओं ने प्रमुख सचिव से सवाल किया कि रात में सचिवालय क्यों खोला गया।

हालांकि, इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। पटवारी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भाजपा के दबाव में और नियमों के खिलाफ की गई है।

27 साल पुराने केस में 3 साल की सजा
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को 27 साल पुराने एफडी घोटाले के मामले में राजेंद्र भारती को दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा सुनाई है। हालांकि, कोर्ट ने अपील के लिए 60 दिन की मोहलत देते हुए सजा को फिलहाल निलंबित रखा है। सह-आरोपी बैंक क्लर्क रघुवीर प्रजापति को भी दोषी करार दिया गया है।

इन धाराओं में दोषी
कोर्ट ने भारती को आपराधिक साजिश (धारा 120B), धोखाधड़ी (धारा 420), जालसाजी (धारा 467, 468, 471) के तहत दोषी माना है। अलग-अलग धाराओं में 2 से 3 साल तक की सजा सुनाई गई है।

विधायकी पर असर
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत विधायकी समाप्त हो सकती है। हालांकि, यदि हाईकोर्ट से सजा पर स्टे मिल जाता है, तो सदस्यता बहाल रह सकती है।

यह है पूरा मामला
मामला 1998 का है, जब श्याम सुंदर संस्थान की अध्यक्ष (भारती की मां) ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी। आरोप है कि एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए 1999 से 2011 तक हर साल 1.35 लाख रुपए ब्याज निकाला गया। यह घोटाला 2011 में भाजपा नेता पप्पू पुजारी के सामने लाने के बाद उजागर हुआ।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला
जांच, ऑडिट आपत्तियों और विभिन्न अदालतों में सुनवाई के बाद मामला आगे बढ़ा। 2015 में प्रशासन की पहल पर आपराधिक केस दर्ज हुआ, जो बाद में एमपी-एमएलए कोर्ट होते हुए दिल्ली ट्रांसफर किया गया।

आगे क्या?
अब नजर हाईकोर्ट पर टिकी है। यदि राजेंद्र भारती को सजा पर (स्टे) मिल जाता है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है। अन्यथा, सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

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