कांग्रेस से कटेगा पार्षद रूबीना इकबाल खान का पत्ता: निष्कासन का प्रस्ताव प्रदेश कमेटी को भेजा; शहर अध्यक्ष बोले- मानकर चलिए आज से पार्टी में नहीं, उधर अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी बोले- देशभक्ति थोपी नहीं जा सकती
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर नगर निगम में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रूप से और गहरा गया है। कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान के बयान के बाद पार्टी के भीतर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है और उनके निष्कासन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
“आज से रुबीना कांग्रेस में नहीं” – चिंटू चौकसे
शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “आज से रुबीना इकबाल को कांग्रेस का हिस्सा नहीं माना जाए।” उन्होंने मीडिया से कहा- आज से रुबीना इकबाल खान कांग्रेस पार्टी में नहीं है आप मान कर चलिए। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी को उनके निष्कासन का प्रस्ताव भेज दिया गया है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। चौकसे ने साफ कहा, “पार्टी के खिलाफ और उसकी विचारधारा के विरुद्ध बयान देने वालों के लिए कांग्रेस में कोई जगह नहीं है। ऐसे लोगों को पार्टी एंटरटेन नहीं करेगी।”
कांग्रेस के हर कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य
चौकसे ने घोषणा की कि अब इंदौर में कांग्रेस के हर कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से होगी और समापन ‘जन गण मन’ के साथ किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा, “जिसे ‘वंदे मातरम्’ गाने में आपत्ति है, वह पार्टी की मीटिंग में न आए।”चौकसे ने यह भी कहा कि कांग्रेस का इतिहास राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान से जुड़ा रहा है और आजादी से पहले भी हर अधिवेशन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से होती थी। उनका कहना था कि “धर्म से पहले राष्ट्र सर्वोपरि है। राजनीति कभी भी राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती।”
भाजपा का हमला: “धर्म की आड़ में राजनीति”
इस मामले में भाजपा नेताओं ने भी कांग्रेस पार्षद पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता महफूज पठान ने कहा कि सदन में ‘वंदे मातरम्’ को मुद्दा बनाना “राजनीतिक ड्रामा” है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक तर्क देकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा कि इस्लाम की बात करने वालों को उसके सभी सिद्धांतों का पालन भी करना चाहिए, जिनमें ईमानदारी, न्याय और दूसरों के अधिकारों की रक्षा शामिल है। पठान ने यह भी आरोप लगाए कि रुबीना इकबाल खान अपने वार्ड में विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक कार्ड खेल रही हैं।
कांग्रेस के भीतर ही विरोध: “देशभक्ति थोपी नहीं जा सकती”
इस विवाद में कांग्रेस के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी डॉ. अमीनुल खान सूरी ने इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष के उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें कहा गया था कि जिसे वंदे मातरम् नहीं गाना, वो कांग्रेस के कार्यक्रमों में न आए।
डॉ. अमीनुल खान सूरी ने शहर अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे “तानाशाही मानसिकता” बताया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का कांग्रेस के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है, लेकिन इसे कभी अनिवार्य नहीं बनाया गया। सूरी के मुताबिक, “देशभक्ति एक भावना है, इसे आदेश देकर नहीं थोपा जा सकता। हर भारतीय इसका सम्मान करता है, लेकिन अनिवार्यता गलत है।”
कैसे शुरू हुआ विवाद
बुधवार को नगर निगम की बजट बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार कर दिया था। फौजिया ने सवाल उठाया था कि ऐसा कौन-सा कानून है, जो इसे अनिवार्य बनाता है। इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और सभापति मुन्नालाल यादव ने उन्हें बाहर जाने के निर्देश दिए। वहीं, बाद में मीडिया से बातचीत में रुबीना इकबाल के बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया।
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