चेकिंग पॉइंट्स पर अवैध वसूली को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत: स्टिंग ऑपरेशन और सिकंदरा घटना के बाद बढ़ा विवाद; पारदर्शिता और सख्त निगरानी की मांग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश में परिवहन चेकिंग पॉइंट्स पर कथित अवैध वसूली, दबाव और दुर्व्यवहार को लेकर अब मामला गरमा गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक विस्तृत शिकायत भेजकर तत्काल हस्तक्षेप और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।
शिकायत में बताया गया कि परिवहन चेकिंग पॉइंट्स पर आधुनिक और पारदर्शी तकनीक के बजाय पुराने और संदिग्ध तरीकों से जांच की जा रही है। कई स्थानों पर वाहन चालकों को कानून का भय दिखाकर एंट्री के नाम पर अवैध वसूली हो रही है। आरोप है कि कुछ जगहों पर निजी व्यक्तियों के जरिये दबाव बनाकर गुंडागर्दी जैसी स्थितियां भी निर्मित हो रही हैं, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।
स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा: हाल ही एक राष्ट्रीय समाचार पोर्टल के स्टिंग ऑपरेशन में परिवहन चेकिंग पॉइंट्स पर कथित अवैध वसूली का खुलासा होने का दावा किया है। वीडियो में विभागीय अधिकारी-कर्मचारी वाहनों के आवागमन के लिए पैसों की मांग करते नजर आए।
सिकंदरा घटना ने बढ़ाई चिंता: शिकायत में सिकंदरा चेकिंग पॉइंट पर बस के साथ हुई घटना को अमानवीय बताया गया। आरोप है कि सड़क पर यात्रियों से भरी बस को रोककर चालक, परिचालक और यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई, जबकि नियमानुसार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर वाहन को विधिवत जब्त किया जाना चाहिए था।
शिकायत में कहा गया है कि चेकिंग पॉइंट्स पर प्रभावी निगरानी का अभाव है। अधिकारी-कर्मचारी लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहकर मनमानी कर रहे हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार द्वारा पूर्व में परिवहन चेकपोस्ट समाप्त करने का निर्णय सराहनीय बताया गया, लेकिन वर्तमान में रैंडम चेकिंग पॉइंट्स अपने मूल उद्देश्य से भटककर फिर से अवैध वसूली के केंद्र बनते जा रहे हैं।
हाल ही जबलपुर में लोकायुक्त कार्रवाई और सिकंदरा की घटना को इसका उदाहरण बताया गया है।
कार्रवाई की मांग: मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि मामले पर शीघ्र संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि प्रदेश में सुगम, सरल और भ्रष्टाचारमुक्त परिवहन व्यवस्था स्थापित की जा सके।
शिकायतकर्ता ने व्यवस्था में सुधार के लिए दिए कई अहम सुझाव
उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन।
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को निरीक्षण की जिम्मेदारी।
बॉडी कैमरा और सीसीटीवी से चेकिंग की रिकॉर्डिंग।
15 दिन में कंप्यूटर आधारित रैंडम रोटेशन नीति लागू करना।
मोबाइल रैंडम चेकिंग को बढ़ावा, स्थायी पॉइंट्स कम करना।
यात्रियों और वाहन चालकों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना।
संबंधित समाचार

पीठासीन अधिकारी की जान बचाने वाले जवान सम्मानित:चुनाव ड्यूटी के दौरान आया था हार्ट अटैक

भारतीय किसान संघ ने बिजली की आपूर्ति को लेकर की चर्चा:विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक से की भेंट

व्यापारियों का विवाद बना जानलेवा:मारपीट के बाद बुजुर्ग व्यापारी की मौत; मारे थे लात-घूंसे

लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन करके कर्मचारियों को बिंदी-टीका लगाया:हिंदू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!