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कमर्शियल गैस सिलेंडर संकट का असर सोने की घड़ाई पर: सराफा से पांच हजार कारीगर पश्चिम बंगाल लौटे

KHULASA FIRST

संवाददाता

07 अप्रैल 2026, 1:01 pm
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कमर्शियल गैस सिलेंडर संकट का असर सोने की घड़ाई पर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सोना वैसे ही बहुत महंगा है और ग्राहकी काफी कम और अब गैस सिलेंडर की दिक्कत ने उसकी घड़ाई को भी संकट में डाल दिया है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलने के कारण घड़ाई नहीं हो पा रही है। नतीजा सराफा के करीब 20 हजार बंगाली कारीगरों में से पांच हजार तो पश्चिम बंगाल लौट चुके हैं।

बंगाली कारीगर एसोसिएशन का कहना है जेवर कला और पसंद लोगों के अनुसार बहुत बदल गई है। 2000 से गैस का उपयोग हो रहा है, जबकि पहले मोम और दीये से काम होता था। अब पूरी तकनीक गैस पर आधारित है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी ने सोने की घड़ाई लगभग ठप कर दी है।

जो थोड़ा बहुत चल रहा है लेकिन डिलीवरी देने में 15 दिन लग रहे हैं। यह भी ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा। पीएनजी लाइन का सर्वे हो चुका लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ी। प्रति दुकान 80 हजार रुपए की कॉस्टिंग कारीगर देने को तैयार थे, फिर भी काम रुका है।

5 हजार कारीगर इंदौर छोड़ चुके हैं शेष कब तक रुकेंगे, तय नहीं है। हमारा सारा काम कमर्शियल गैस सिलेंडर पर ही होता है, जो मिल नहीं रहा। व्यापारी बसंत सोनी के अनुसार कारीगरी गैस के बिना संभव नहीं।

सभी गोल्ड आइटम गैस पर निर्भर हैं। गैस की कमी से सिस्टम धीमा हो गया है। जो जेवर 2-4 दिन में तैयार होते थे, अब 15 दिन लग रहे हैं। बाजार की अनिश्चितता से स्थिति और जटिल हो गई है।

वजन नहीं, बजट प्राथमिकता
गैस संकट और सोने की बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों के व्यवहार में बदलाव आया है। सराफा व्यापारी के अनुसार लाइट वेट आभूषण की मांग बढ़ी है। पहले ग्राहक 30, 50 या 100 ग्राम सोना लेते थे, अब वे 50 हजार या 1 लाख के बजट में खरीदारी कर रहे हैं।

कारीगरों और व्यापारियों का कहना है दो हफ्तों में गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई या पीएनजी सप्लाई शुरू नहीं हुई तो उद्योग ठप हो सकता है। शादी सीजन में ऑर्डर हैं, लेकिन सिलेंडर की कमी से काम सीमित है।

सराफा हजारों परिवारों की आजीविका है, लेकिन गैस संकट से पूरा ढांचा प्रभावित है। प्रशासन और गैस एजेंसियों में तालमेल की कमी का खामियाजा सब भुगत रहे हैं।

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