सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेंस: युवाओं के हर माह मिलेंगे 10 हजार; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए निर्णय
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संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
प्रदेश सरकार ने युवाओं को शासन व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय लिया है। यह प्रोग्राम में तीन वर्षों में लगभग 190 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बैठक में विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए करीब 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई, साथ ही कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई। इसमें मुख्यमंत्री यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्रोम समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। प्रदेश में सुशासन को मजबूत बनाने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम शुरू करने का निर्णय लिया है।
इस योजना के तहत पूरे मध्यप्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में 15 स्थानीय युवाओं का चयन किया जाएगा, जो सरकारी योजनाओं की निगरानी और फीडबैक देने का काम करेंगे। इस प्रोग्राम का संचालन भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत चयनित युवाओं को एक वर्ष के लिए इंटर्न के रूप में रखा जाएगा और योजना की निरंतरता तीन वर्षों तक रहेगी।
प्रदेश के सभी ब्लॉकों से कुल मिलाकर करीब 4865 युवा इस योजना से जुड़ेंगे। इन युवाओं को हर महीने 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। चयनित युवा डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं से जुड़े आंकड़े एकत्र करेंगे और यह अध्ययन करेंगे कि योजनाओं का सामाजिक प्रभाव क्या पड़ रहा है तथा जनता को उनका लाभ किस हद तक मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार इन युवाओं के माध्यम से प्राप्त जानकारी को राज्य स्तर पर एक डैशबोर्ड और पोर्टल पर संकलित किया जाएगा, जिससे मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को योजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा मिल सकेगी।
योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर सुधार भी किए जा सकें।
साथ ही इससे युवाओं को शासन-प्रशासन और नई तकनीक से जुड़कर काम करने का अवसर भी मिलेगा। इस योजना पर तीन वर्षों में लगभग 190 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश में सुशासन को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को प्रशासनिक
प्रक्रियाओं से जोड़ने का एक नया मॉडल साबित होगी।
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