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क्लब बनाम नगर निगम विवाद गहराया: मुनादी पर हाईकोर्ट सख्त; अधिकारियों को जारी किया नोटिस

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 अप्रैल 2026, 4:22 pm
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क्लब बनाम नगर निगम विवाद गहराया

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर का प्रतिष्ठित यशवंत क्लब और नगर निगम के बीच प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर विवाद अब और गहरा गया है। बकाया टैक्स वसूली के लिए निगम द्वारा कराई गई मुनादी के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए निगम अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

मुनादी से बढ़ा विवाद
नगर निगम ने 14 मार्च को क्लब के बाहर बकाया टैक्स वसूली के लिए मुनादी कराई थी। निगम का आरोप है कि क्लब ने प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान नहीं किया है। वहीं क्लब प्रबंधन का कहना है कि मामला पहले से कोर्ट में विचाराधीन है और वसूली पर स्टे मिला हुआ है, ऐसे में मुनादी कराना कोर्ट की अवमानना है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख
मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और जोन-9 के सहायक राजस्व अधिकारी प्रशांत पटेल को नोटिस जारी किया है।

यह है विवाद
विवाद की शुरुआत साल 2020 में क्लब की नई नपती के बाद तय किए गए टैक्स से हुई थी। क्लब ने इसे चुनौती दी थी, जिस पर 2022 में कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए 30% टैक्स जमा करने को कहा था। बाकी मामला अब भी लंबित है।

नए भवन से बढ़ी तकरार
हाल ही में क्लब ने 100 नए सदस्य बनाकर करीब 25 करोड़ रुपए जुटाए और नए भवन का प्लान बनाया। लेकिन बकाया टैक्स के चलते निगम पोर्टल पर नक्शा मंजूर नहीं हुआ। इसके बाद क्लब ने 2025 में रिट पिटीशन दायर की, जिस पर दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने नक्शा पास करने के आदेश दिए।

निगम ने इसके खिलाफ अपील (86/2026) दायर की, जिसे 7 जनवरी को खारिज कर दिया गया। इसके बाद क्लब ने आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की, जिसमें 3 फरवरी को कोर्ट ने 30 दिन में आदेश लागू करने को कहा।

अब 2.64 करोड़ टैक्स बकाया
नगर निगम का दावा है कि स्टे के बाद से क्लब ने टैक्स जमा नहीं किया, जिससे बकाया राशि बढ़कर 2 करोड़ 64 लाख रुपए हो गई है। निगम ने इस वसूली के लिए कोर्ट में जल्द सुनवाई का आवेदन भी दिया है।

चुनाव से पहले बढ़ा मामला
क्लब के बाहर मुनादी होने से मैनेजिंग कमेटी की छवि पर असर पड़ा है। जून 2026 में होने वाले चुनाव को देखते हुए मामला अब प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। इसी के चलते क्लब ने एक और अवमानना याचिका (1989/26) दायर की है, जिस पर अब सुनवाई जारी है।

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