मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चयन प्रक्रिया में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका: नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश को मिली बड़ी हिस्सेदारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश को मिली बड़ी हिस्सेदारी ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश से आठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।
इनमें गजेंद्र पटेल को राष्ट्रीय महामंत्री, लालसिंह आर्य को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा कविता पाटीदार, बंसीलाल गुर्जर, आशीष अग्रवाल और वीडी शर्मा को अलग-अलग संगठनात्मक दायित्व दिए गए हैं।
संगठन को अपेक्षाकृत युवा और ऊर्जावान नेता देने के साथ प्रदेश में भी संगठन और लीडरशिप की सेकंड लाइन तैयार करने में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश के नेताओं की नियुक्तियां निश्चित तौर से मुख्यमंत्री को और मजबूत बनाएंगी। मुख्यमंत्री और प्रदेश के प्रमुख नेताओं की आपसी समझ के बाद प्रदेश के भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक नेतृत्व क्षमता से विपक्ष की चुनौतियों के आधार पर संगठन के लिए उपयुक्त नेताओं का चयन किया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने अनुभवी, पुराने और सांसदों के साथ नए चेहरों के नाम आगे बढ़ाए।
बताते हैं मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश भाजपा के प्रमुख वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रीय संगठन में मध्य प्रदेश के हिस्से में 10% से अधिक पद ले लिए। मुख्यमंत्री का प्रयास यह भी है कि राष्ट्रीय संगठन के साथ प्रदेश में भी संगठन और नेतृत्व की सेकंड लाइन अभी से तैयार करने का काम शुरू किया जाए।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत पसंद और नापसंद तथा गुटबाजी से इतर प्रदेश से राष्ट्रीय संगठन में फिट और हिट होने वाले नेताओं को महत्व दिलाने के साथ मजबूती से लॉबिंग भी की। कार्यकारिणी में मध्य प्रदेश की असाधारण हिस्सेदारी मुख्यमंत्री के बढ़ते संगठनात्मक प्रभाव का परिचायक है।
साथ ही देश व प्रदेश की भाजपाई राजनीति में उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता का प्रमाण भी। यानी दिल्ली में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ प्रदेश और संगठन का दबदबा भी बढ़ा है। इस बढ़ी हिस्सेदारी की राजनीतिक अनुगूंज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संगठनात्मक प्रभाव के रूप में भी सुनाई दे रही है।
नियुक्तियां राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रक्रिया का परिणाम
इस पूरी तस्वीर को भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदर्भ में देखें तो मध्य प्रदेश की राष्ट्रीय संगठन में बढ़ी हुई हिस्सेदारी उनके लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
मुख्यमंत्री स्वयं ओबीसी पृष्ठभूमि से आते हैं और उनकी सरकार के दौरान प्रदेश भाजपा में ओबीसी, एससी-एसटी, किसान, महिला और युवा वर्ग से जुड़े नेताओं को आगे बढ़ाने की राजनीतिक रणनीति दिखाई देती रही है।
हालांकि नियुक्तियां भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रक्रिया का परिणाम हैं, लेकिन राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के आठ नेताओं को जगह मिलना यह संकेत जरूर देता है कि दिल्ली में मध्य प्रदेश का राजनीतिक व संगठनात्मक कद मजबूत है।
सीएम के प्रभाव का संकेत
राजनीतिक रूप से इसका एक दूसरा अर्थ भी निकाला जा रहा है। मध्य प्रदेश से इतने नेताओं का राष्ट्रीय संगठन में पहुंचना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए संगठनात्मक रूप से सकारात्मक संकेत है।
खासकर तब जब राष्ट्रीय टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ अनुभवी तथा अपेक्षाकृत नई पीढ़ी के नेताओं को आगे किया गया है। गजेंद्र पटेल का राष्ट्रीय महामंत्री, लालसिंह आर्य का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनना और कविता पाटीदार तथा बंसीलाल गुर्जर जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना प्रदेश भाजपा के अॉसामाजिक आधारों को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ता है। राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय इन नेताओं के माध्यम से प्रदेश और केंद्रीय संगठन के बीच राजनीतिक संगठनात्मक समन्वय और मजबूत होने की संभावना है।
10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी ने बढ़ाई प्रदेश की अहमियत
नई राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश से आठ नेताओं की मौजूदगी को प्रदेश भाजपा के बढ़ते राजनीतिक महत्व के तौर पर देखा जा रहा है। यह प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय संगठन में प्रदेश की हिस्सेदारी को 10 फीसदी से अधिक के स्तर पर ले जाता है।
इस लिहाज से यह केवल नेताओं की नियुक्ति नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश को भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति में मिले बढ़े वजन का संकेत है। हालांकि इसे अभी ‘डॉ. मोहन यादव की पूरी टीम’ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रदेश की असाधारण हिस्सेदारी को मुख्यमंत्री के बढ़ते संगठनात्मक प्रभाव और प्रदेश की भाजपा राजनीति में उनके नेतृत्व की स्वीकार्यता के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में जरूर पढ़ा जा सकता है। यानी दिल्ली में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ी और इसकी राजनीतिक छाया भोपाल में मुख्यमंत्री के संगठनात्मक प्रभाव पर भी दिखाई दे सकती है।
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