चार धाम यात्रा: खुल गए केदारनाथ धाम के कपाट; प्रधानमंत्री ने किया श्रद्धालुओं से 5 संकल्प अपनाने का आह्वान, मुख्यमंत्री ने की विशेष पूजा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है। इसी क्रम में बुधवार सुबह ठीक 8 बजे पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही बाबा केदार की ग्रीष्मकालीन यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो गई।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की।
पहली पूजा प्रधानमंत्री के नाम से
सेना के हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई। कपाट खुलने के बाद पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम में पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की पहली पूजा कराई। वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंदिर के मुख्य द्वार अब आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए और दर्शन शुरू हो गए हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कपाट खुलने पर ‘हर-हर महादेव’ का जयकारा लगाते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावनात्मक संदेश साझा किया।
पीएम मोदी का संदेश: आस्था, एकता और परंपरा का उत्सव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट खुलना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आस्था और एकता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने चारधाम यात्रा को भारतीय आध्यात्मिक विरासत का दिव्य उत्सव बताते हुए कहा कि यह यात्रा देश की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए कहा कि बाबा केदार सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
पत्र के जरिए देशवासियों से संवाद
प्रधानमंत्री ने चारधाम यात्रा के शुभारंभ पर देशवासियों के नाम एक विस्तृत पत्र भी लिखा। इसमें उन्होंने यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं। आज से केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो गई है। 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट भी खोले जाएंगे। उन्होंने कहा कि चारों धामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का भव्य प्रतीक है।
श्रद्धालुओं के लिए 5 संकल्पों का आग्रह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया, जो यात्रा को आध्यात्मिक के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी सार्थक बनाते हैं। ये हैं- स्वच्छता का संकल्प – यात्रा के दौरान धाम और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखें, पर्यावरण संरक्षण – प्रकृति और हिमालयी पारिस्थितिकी का संरक्षण करें, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा – ‘वोकल फॉर लोकल’ अपनाते हुए स्थानीय सामान खरीदें, अनुशासन और मर्यादा – यात्रा के नियमों और परंपराओं का पालन करें और आध्यात्मिक जागरूकता – यात्रा को केवल पर्यटन नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव बनाएं।
शास्त्रों का सार: यात्रा का गहरा संदेश
पीएम मोदी ने अपने संदेश में यह भी बताया कि हमारे शास्त्र केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी देते हैं। चारधाम यात्रा उसी मार्ग का अनुसरण है। जहां व्यक्ति बाहरी यात्रा के साथ-साथ आत्मिक यात्रा भी करता है।
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