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सीडीआर लीक का बड़ा खुलासा: जासूसों को बेची जा रही थी आईएएस-आईपीएस की कॉल डिटेल; एटीएस ने क्राइम ब्रांच के एएसआई को पकड़ा

KHULASA FIRST

संवाददाता

13 अप्रैल 2026, 1:23 pm
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सीडीआर लीक का बड़ा खुलासा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश में निजता (प्राइवेसी) को लेकर गंभीर खतरे का खुलासा हुआ है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर (CDR) लीक करने के मामले में मध्य प्रदेश एंटी टेररिज्म स्क्वाड यानी एटीएस (ATS) ने इंदौर क्राइम ब्रांच के एक एएसआई को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह निजी जासूसी एजेंसियों को पैसों के बदले लोगों की कॉल डिटेल उपलब्ध करा रहा था जिसमें नेता, आईएएस और आईपीएस अधिकारी तक शामिल हैं।

कैसे खुला पूरा नेटवर्क
जांच के दौरान इंदौर की एक निजी जासूसी फर्म “इंदौर डिटेक्टिव सर्विस” के संचालक मुकेश तोमर की गतिविधियों पर संदेह हुआ। पड़ताल में सामने आया कि यह एजेंसी अवैध तरीके से लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवा रही थी।पूछताछ में इंदौर क्राइम ब्रांच के एएसआई रामपाल की भूमिका सामने आई, जिसके बाद ATS ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि रामपाल अपने पद का दुरुपयोग कर जासूसों को CDR उपलब्ध कराता था।

नेताओं और अफसरों तक पहुंच
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह रैकेट सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं था। कई नेताओं की कॉल डिटेल निकाली गई। भोपाल में पदस्थ IAS और IPS अधिकारियों के रिकॉर्ड भी हासिल किए गए। हाई-प्रोफाइल टारगेट्स की निगरानी के लिए CDR का इस्तेमाल किया जा रहा था। ATS ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए जांच अपने हाथ में ली है।

कई शहरों में फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। भोपाल समेत अन्य शहरों की जासूसी एजेंसियां भी इसमें शामिल हो सकती हैं। पुलिस विभाग के कुछ अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका। कई संदिग्ध ATS के रडार पर।

20 से 40 हजार में बिक रही थी निजी जानकारी
जांच में सामने आया है कि किसी भी व्यक्ति की कॉल डिटेल रिकॉर्ड 20 से 40 हजार रुपए में उपलब्ध कराई जा रही थी। जरूरत और व्यक्ति की प्रोफाइल के हिसाब से इसकी कीमत तय होती थी। यह डेटा आगे “ओपन मार्केट” में भी बेचा जा रहा था।

सिस्टम का दुरुपयोग कैसे हुआ
आम तौर पर पुलिस किसी केस की जांच के दौरान मोबाइल कंपनियों से CDR लेती है, लेकिन आरोप है कि कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार कर “ऑफ रिकॉर्ड” तरीके से भी डेटा हासिल किया गया और बेचा गया।

एटीएस की आगे की कार्रवाई
एटीएस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका खंगाली जा रही है। जासूसी एजेंसियों के वित्तीय लेन-देन की जांच। गिरफ्तारियों की संभावना

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