चार बार बेची सी-21 बिजनेस पार्क की जमीन: एक संस्था ने दूसरी को दी; उसने तीसरे बिल्डर को और चौथे ने तान दी दानवाकार बिल्डिंग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रेडिसन होटल के सामने तने सी-21 बिजनेस पार्क का मामला फिर सुर्खियों में है। इंदौर विकास प्राधिकरण में हुए फर्जी एनओसी घोटाले में सामने आया कि इसके निर्माण में बिल्डर मोहन चुघ ने आईडीए की फर्जी एनओसी का उपयोग किया था।
ये जमीन गरीब की जोरू की तरह रही, क्योंकि इसे एक संस्था ने दूसरी को नियम विरुद्ध बेचा और उसने बिल्डर और उस बिल्डर ने चौथे बिल्डर को, जिसने इस पर दानवाकार बिजनेस पार्क तान दिया।
प्रशासन की नाक के नीचे इतना बड़ा पार्क खड़ा हो गया और चालू है, लेकिन किसी भी अधिकारी को इस ओर ध्यान देने की फुर्सत नहीं है।
ये तथ्य सहकारिता विभाग के अंकेक्षक जीएस परिहार ने जांच के बाद निकाले हैं। अपनी रिपोर्ट उन्होंने प्रदेश के सहकारिता आयुक्त को भेजी है, जो इस बाबत फैसला करेंगे। यदि इसे अवैध ठहराया गया तो विभाग पर इस पर कब्जा लेगा।
अंकेक्षक परिहार की रिपोर्ट में जो तथ्य हैं उनके अनुसार ये खसरा नंबर 28/2 पर बना बिजनेस पार्क आईडीए की स्कीम 53 का हिस्सा है। ये जमीन कनकेश्वरी संस्था को आवंटित की गई थी, जो बाद में तृष्णा हाउसिंग सोसायटी को ट्रांसफर हो गई।
नियमानुसार कोई संस्था आवंटित जमीन को दूसरी संस्था को ट्रांसफर नहीं कर सकती। बाद में दोनों संस्थाओं में विवाद हो गया और वे कोर्ट पहुंची, जहां फैसला तृष्णा के पक्ष में हुआ। बाद में इस संस्था ने बिल्डर चुघ को जमीन बेच दी। चुघ ने जमीन दूसरे बिल्डर पिंटू छाबड़ा को बेच दी, जिसने इस पर आलीशान दानवाकार सी-21 बिजनेस पार्क खड़ा कर दिया।
चुघ ने आईडीए के नाम से फर्जी एनओसी बनवाई और इस आधार पर छाबड़ा ने रजिस्ट्री भी करवा ली। बाद में राज खुला, जबकि आईडीए के तत्कालीन सीईओ रामप्रकाश अहिरवार ने कहा कि ऐसी कोई एनओसी आईडीए से जारी ही नहीं की गई है।
इसमें सनसनीखेज तथ्य ये भी है कि छाबड़ा ने यह जमीन तृष्णा हाउसिंग सोसायटी से हरियाणा की बेबीलोन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को खरीदवाई। इस जमीन की पांच रजिस्ट्री हंै। इसकी चार रजिस्ट्री पर आईडीए के 21 दिसंबर 1998 के पत्र क्रमांक 1700 का जिक्र किया गया है।
इस पत्र में कहा गया है कि यह जमीन आईडीए की किसी योजना में नहीं है। इसी तरह एक रजिस्ट्री में 20 अक्टूबर 2005 के आईडीए के पत्र क्रमांक 6864 का जिक्र किया गया है, जिसमें उल्लेख है कि यह जमीन आईडीए की किसी स्कीम में नहीं है। इनमें से कोई भी एनओसी आईडीए के रिकॉर्ड में नहीं है।
फर्जी एनओसी समेत सारा खेल कुख्यात बिल्डर चुघ ने रचा
जिस जमीन पर पिंटू छाबड़ा ने सी 21 बिजनेस पार्क बनाया है, वह पांच कृषि भूमि का टुकड़ा है। यह सारी रजिस्ट्री बेबीलोन इंफ्रास्ट्रक्चर, गुरुग्राम, हरियाणा के जीएम आलोक भंडारी के नाम हुई है। रजिस्ट्री चुघ परिवार ने की है और इसमें स्पष्ट तौर पर लिखा है कि यह कृषि भूमि है, जो तृष्णा गृह निर्माण संस्था से खरीदी गई है।
सभी रजिस्ट्रियां वर्ष 2007 में हुई हैं। रजिस्ट्री करने वालों में मोहनलाल चुघ, चुघ हाउसिंग डेवलपर्स, नीतेश कुमार पिता मोहनलाल चुघ, चुघ की ही कंपनी शिवम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, रीना देवी पति मोहनलाल चुघ के नाम हैं।
सारी जमीन आलोक भंडारी, जीएम बेबीलोन इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्लाट नंबर 124 सेक्टर 44, गुरुग्राम, हरियाणा को बेची गई और सबके सेल डीड पर राजेश पिता चंपालाल सिद्ध के हस्ताक्षर हैं।
चुघ ने तृष्णा संस्था की जमीन को मात्र 26.74 लाख में खरीदा और 11 करोड़ में बेबीलोन को बेचा। फिर भी जांच एजेंसी या विभाग नहीं जागा, जबकि न तो संस्था की जमीन को बेचा जा सकता है और न ही हस्तांतरित किया जा सकता है। लेकिन चुघ के दबाव में ये खेल हो गया।
राजस्व विभाग ने कैसे किया डायवर्शन?
चुघ ब्रदर्स ने सारी रजिस्ट्री में फर्जी एनओसी लगाने के साथ ही इन्हीं से जमीन का डायवर्शन भी करा लिया गया। अब यह भी जांच का विषय है कि कलेक्टर कार्यालय में बैठे उस समय के तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने इस फर्जी एनओसी पर डायवर्शन कैसे कर दिया? जबकि उस समय आईडीए द्वारा एसडीओ से इस जमीन को लेकर पत्र व्यवहार भी चल रहा था।
मामला केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह तक भी पहुंच चुका है और उन्होंने जांच के आदेश भी दिए थे। अंकेक्षक परिहार ने बताया कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट सहकारिता आयुक्त को भेज दी है। वे ही इस पर अंतिम निर्णय लेंगे। यदि विपरीत निर्णय आया तो आगे कार्रवाई तय की जाएगी। सहकारिता विभाग इस बिजनेस पार्क पर कब्जा भी ले सकता है।
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